सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए 4 ई यानी इंजीनियरिंग, इमरजेंसी केयर, इंफोर्समेंट और एजुकेशन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने सड़कों पर पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों को रोकने के लिए समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इसके लिए स्थानीय स्तर पर समितियों का गठन कर उनकी मदद लेने और उन्हें प्रोत्साहन राशि देने की जरूरत बताई। मुख्य सचिव कार्यालय में हुई बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रदेश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर दुर्घटना संभावित स्थलों पर भविष्य में हादसे रोकने के लिए कार्ययोजना तैयार कर समय-सीमा में उसका क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। बैठक में इंदौर, भोपाल और उज्जैन में जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम शुरू करने पर सहमति बनी। वर्तमान में धार, सतना, रीवा, सागर, जबलपुर और खरगोन के साथ उज्जैन, भोपाल और इंदौर में भी यह कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में अब ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ का नियम सख्ती से लागू होगा। यदि किसी वाहन का बीमा नहीं है तो उसे पेट्रोल या डीजल भी नहीं मिलेगा। प्रदेश में बगैर वैध थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रहे लाखों वाहनों पर सरकार शिकंजा कसने जा रही है। बैठक में इस नई व्यवस्था को हरी झंडी दी गई। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के सामने खुली पोल 1. ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर पर लापरवाही उजागर सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने भोपाल बायपास स्थित ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वाहनों की जांच और पासिंग प्रक्रिया में भारी लापरवाही उजागर हुई। 2. टेक्नीशियन बोला पास, सिस्टम में निकली फेल निरीक्षण में एक वाहन की फिटनेस जांच हुई। जस्टिस सप्रे ने पूछा तो टेक्नीशियन ने कहा कि गाड़ी पास हो गई है। लेकिन जब उन्होंने कंप्यूटर सिस्टम पर रिपोर्ट चेक की तो गाड़ी हेडलाइट व हॉर्न में खराबी के कारण फेल दर्ज थी। 3. जस्टिस सप्रे ने लगाई- बिना फाइनल रिपोर्ट पास न करें जस्टिस सप्रे ने इस घालमेल पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि बिना सिस्टम की फाइनल रिपोर्ट आए मनमाने ढंग से गाड़ियां पास न की जाएं और किसी भी सूरत में अनफिट वाहनों को फिट का सर्टिफिकेट जारी न हो। टेक्नीशियन से फिटनेस की प्रक्रिया के बारे में पूछा अध्यक्ष सप्रे ने वाहनों का फिटफनेस किए जाने की संपूर्ण प्रक्रिया का अवलोकन किया। फिटनेस के दौरान वहां मौजूद एक वाहन की संपूर्ण फिटनेस प्रक्रिया कराई गई। फिटनेस टेक्नीशियन से जब पूछा गया कि क्या हुआ? तब टेक्नीशियन ने कहा कि यह वाहन पास हो गया है परंतु जब उक्त वाहन की सिस्टम पर रिपोर्ट देखी गई तो वह वाहन हेडलाइट और हॉर्न की कमी के कारण फेल दिखाया गया। सप्रे ने आपत्ति ली और निर्देश दिए कि जब तक रिपोर्ट कंप्लीट नहीं हो जाती तब तक इस प्रकार का निर्णय नहीं आना चाहिए। बाद में उन्होंने संपूर्ण प्रक्रिया का अवलोकन कर समझाईश दी और कहा कि किसी भी प्रकार का कोई कार्य ऐसा नहीं किया जाए जिससे अनफिट वाहनों को प्रक्रिया पूर्ण किए बिना फिट कर दिया जाए। कैमरों से पहचानकर रोकेंगे जानकारी के अनुसार, प्रोजेक्ट के तहत पंपों पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगेंगे, जिन्हें केंद्र सरकार के वाहन पोर्टल से इंटीग्रेट किया जाएगा। जैसे ही वाहन पंप पर पहुंचेगा, कैमरे नंबर प्लेट स्कैन कर इंश्योरेंस वैलिडिटी जांच लेंगे। गैर-बीमित होने पर वाहन को ईंधन नहीं मिलेगा। सबसे ज्यादा अन-इंश्योर्ड वाहनों वाले जिले से पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा, फिर इसे पूरे प्रदेश में लागू करेगा। 4 ई फॉर्मूले पर फोकस न्यायमूर्ति सप्रे ने सड़क दुर्घटनाओं और इनमें होने वाली मौतों की संख्या कम करने के लिए 4 ई- इंजीनियरिंग, इमरजेंसी केयर, इंफोर्समेंट और एजुकेशन पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य शासन जरूरी वित्तीय प्रावधान सुनिश्चित करे। इसके लिए सीएसआर और तकनीकी संसाधनों की भी मदद ली जाए। उन्होंने पशुओं के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लघु और दीर्घकालीन योजना बनाकर समय-सीमा में लागू करने के निर्देश दिए। बीमा नहीं तो ईंधन नहीं पर पायलट प्रोजेक्ट बैठक में पेट्रोल पंपों पर कैमरे लगाने और उन्हें वाहन पोर्टल से जोड़ने पर चर्चा हुई। इसके जरिए गैर-बीमित वाहनों की पहचान कर उन्हें ईंधन नहीं देने की व्यवस्था लागू करने की योजना है। न्यायमूर्ति सप्रे ने राज्य शासन को पहले एक जिले में इसकी पायलट परियोजना शुरू करने के निर्देश दिए। इसके लिए ऐसे जिले का चयन किया जाएगा, जहां सबसे ज्यादा गैर-बीमित वाहन संचालित हो रहे हैं। पायलट प्रोजेक्ट से मिले अनुभव के आधार पर इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। सड़क सुरक्षा के लिए जन-जागरूकता बढ़ेगी सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए शिक्षा विभाग का सहयोग लेने का निर्णय लिया गया। शिक्षण संस्थानों और अन्य एजेंसियों के माध्यम से सड़क सुरक्षा को लेकर जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में औसतन 16 मिनट का समय लगता है। इस समय को कम करने के प्रयास किए जाएंगे। प्रदेश में हर साल औसतन 13 हजार लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है। राज्य शासन के प्रयासों से वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में वर्ष 2025 की इसी अवधि की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में करीब 800 की कमी आई है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026 में पिछले वर्षों की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या में और कमी लाना है। राज्य सरकार ने पेश किए सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े बैठक की शुरुआत में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के निर्देशों, केंद्र सरकार की सड़क सुरक्षा योजनाओं और प्रदेश सरकार द्वारा सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लिए गए लघु एवं दीर्घकालीन निर्णयों की जानकारी दी। सचिव, परिवहन मनीष सिंह ने प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों और सड़क सुरक्षा के लिए किए जा रहे उपायों पर प्रस्तुतिकरण दिया। इसमें सड़क दुर्घटनाओं के तुलनात्मक आंकड़े, ब्लैक स्पॉट, हिट एंड रन मामलों और विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे सड़क सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई। राहवीर योजना और पीएम राहत योजना के प्रावधानों को भी प्रस्तुतिकरण में शामिल किया गया। बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

