दरभंगा राज परिसर के दो ऐतिहासिक काली मंदिरों का जीर्णोद्धार:पूजा-अर्चना के बाद हुआ भंडारा, धार्मिक अनुष्ठान में जुटे श्रद्धालु

दरभंगा राज परिसर के दो ऐतिहासिक काली मंदिरों का जीर्णोद्धार:पूजा-अर्चना के बाद हुआ भंडारा, धार्मिक अनुष्ठान में जुटे श्रद्धालु

दरभंगा में माधवेश्वर, कामेश्वरनगर स्थित राज परिसर में श्री श्री 108 मां रुद्रेश्वरी काली मंदिर और श्री श्री 108 मां कामेश्वरी श्यामा मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य सोमवार को संपन्न हुआ। कामेश्वर धार्मिक न्यास के ट्रस्टी कुमार राजेश्वर सिंह और कुमार कपिलेश्वर सिंह के सौजन्य से दोनों ऐतिहासिक मंदिरों के जीर्णोद्धार का कार्य कराया गया। जीर्णोद्धार के बाद आयोजित समारोह में धार्मिक अनुष्ठान, विशेष पूजा-अर्चना और आरती के साथ मंदिरों में श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया। कार्यक्रम के समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
समारोह का उद्घाटन कामेश्वर धार्मिक ट्रस्ट के ट्रस्टी कुमार कपिलेश्वर सिंह, उनकी पत्नी रानी कविता कुमारी सिंह और बेटे कुमार अरिहंत सिंह ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम की शुरुआत माता की विशेष पूजा से हुई। शंखवादक विपिन मिश्रा की ओर से मंत्रोच्चारण और आरती की गई। धार्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने मां रुद्रेश्वरी काली और मां कामेश्वरी श्यामा के दर्शन किए। महाराजा रुद्र सिंह की समाधि पर स्थापित है मां रुद्रेश्वरी काली कामेश्वर धार्मिक ट्रस्ट के ट्रस्टी कुमार कपिलेश्वर सिंह ने दरभंगा राजवंश के इतिहास और अपने पूर्वजों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि खंडवाला राजवंश के महाराजा छत्र सिंह के ज्येष्ठ बेटे महाराजा रुद्र सिंह की समाधि स्थल पर मां रुद्रेश्वरी काली विराजमान हैं। महाराजा रुद्र सिंह दरभंगा राज के 18वें अधिपति थे। उनका कार्यकाल भले ही अल्पकालिक रहा, लेकिन दूरदर्शिता, विद्यानुराग और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के कारण इतिहास में उनका विशिष्ट स्थान है। महाराजा रुद्र सिंह ने मिथिला में आधुनिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार और विकास की मजबूत आधारशिला रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुमार कपिलेश्वर सिंह के अनुसार, 1835 में महाराजा रुद्र सिंह ने मुजफ्फरपुर में अंग्रेजी शिक्षा के प्रथम संस्थानों में से एक ‘एंग्लो वर्नाक्युलर स्कूल’ की स्थापना के लिए 5 हजार रुपए और भूमि दान दिया था। इसके अलावा मुंगेर और दरभंगा में अंग्रेजी विद्यालयों की स्थापना के लिए भी उन्होंने आर्थिक सहयोग प्रदान किया था।
उन्होंने बताया कि महाराजा रुद्र सिंह की समाधि पर स्थित मां रुद्रेश्वरी काली मंदिर का निर्माण 1855 में उनके बेटे महाराजा महेश्वर सिंह ने करवाया था। राज परिवार की विरासत से जुड़ना सौभाग्य- कुलपति
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति लक्ष्मीविलास पाण्डेय ने कहा कि दरभंगा राज धर्म जागरण के लिए पूरे देश में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि कुलपति होने के नाते मैं खुद राज परिवार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ा हूं।
उन्होंने कहा कि दरभंगा राज का योगदान शिक्षा, खेल, कला, स्वास्थ्य सहित समाज के लगभग हर क्षेत्र में रहा है। राज परिवार के पूर्वजों ने जिस तरह समाज और क्षेत्र के विकास में अपनी भूमिका निभाई, उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का काम कुमार कपिलेश्वर सिंह भी कर रहे हैं।
कुलपति ने कहा कि वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि कुमार कपिलेश्वर सिंह को ऊर्जा और शक्ति मिले, ताकि वे आगे भी धर्म जागरण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और समाज उत्थान के कार्य करते रहें।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. संतोष कुमार ने किया। समारोह में डॉ. हेमपति झा, वरिष्ठ प्रचारक डॉ. विनोद यादव, भाजपा के वरिष्ठ नेता रंगनाथ ठाकुर, दरभंगा राज के मुख्य प्रबंधक आशुतोष दत्ता, अमरकांत झा, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री मीना झा, मंजेश चौधरी, निखिल खेरिया, प्रियांशु झा, प्रदीप गुप्ता, ठाकुर भूपेंद्र किशोर, डॉ. गोपाल ठाकुर, संजीव झा, लक्ष्मीनारायण झा, लम्बोदर झा, रमेश झा, आशीष झा, बबलू त्रिगुणायत, संतोष सिंह, राजीव प्रकाश मधुकर, सत्यम सिंह, मनोज साह, आयुष वैभव, नंदू पासवान, सुनील राय, राजू मंडल, मुरली शंकर, राम कृष्ण लाल दास, जितेंद्र ठाकुर, अशोक मंडल, मुकेश झा, प्रभाकर कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
मंदिरों के जीर्णोद्धार के साथ राज परिवार की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की इस पहल की श्रद्धालुओं ने सराहना की। दरभंगा में माधवेश्वर, कामेश्वरनगर स्थित राज परिसर में श्री श्री 108 मां रुद्रेश्वरी काली मंदिर और श्री श्री 108 मां कामेश्वरी श्यामा मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य सोमवार को संपन्न हुआ। कामेश्वर धार्मिक न्यास के ट्रस्टी कुमार राजेश्वर सिंह और कुमार कपिलेश्वर सिंह के सौजन्य से दोनों ऐतिहासिक मंदिरों के जीर्णोद्धार का कार्य कराया गया। जीर्णोद्धार के बाद आयोजित समारोह में धार्मिक अनुष्ठान, विशेष पूजा-अर्चना और आरती के साथ मंदिरों में श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया। कार्यक्रम के समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
समारोह का उद्घाटन कामेश्वर धार्मिक ट्रस्ट के ट्रस्टी कुमार कपिलेश्वर सिंह, उनकी पत्नी रानी कविता कुमारी सिंह और बेटे कुमार अरिहंत सिंह ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम की शुरुआत माता की विशेष पूजा से हुई। शंखवादक विपिन मिश्रा की ओर से मंत्रोच्चारण और आरती की गई। धार्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने मां रुद्रेश्वरी काली और मां कामेश्वरी श्यामा के दर्शन किए। महाराजा रुद्र सिंह की समाधि पर स्थापित है मां रुद्रेश्वरी काली कामेश्वर धार्मिक ट्रस्ट के ट्रस्टी कुमार कपिलेश्वर सिंह ने दरभंगा राजवंश के इतिहास और अपने पूर्वजों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि खंडवाला राजवंश के महाराजा छत्र सिंह के ज्येष्ठ बेटे महाराजा रुद्र सिंह की समाधि स्थल पर मां रुद्रेश्वरी काली विराजमान हैं। महाराजा रुद्र सिंह दरभंगा राज के 18वें अधिपति थे। उनका कार्यकाल भले ही अल्पकालिक रहा, लेकिन दूरदर्शिता, विद्यानुराग और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के कारण इतिहास में उनका विशिष्ट स्थान है। महाराजा रुद्र सिंह ने मिथिला में आधुनिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार और विकास की मजबूत आधारशिला रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुमार कपिलेश्वर सिंह के अनुसार, 1835 में महाराजा रुद्र सिंह ने मुजफ्फरपुर में अंग्रेजी शिक्षा के प्रथम संस्थानों में से एक ‘एंग्लो वर्नाक्युलर स्कूल’ की स्थापना के लिए 5 हजार रुपए और भूमि दान दिया था। इसके अलावा मुंगेर और दरभंगा में अंग्रेजी विद्यालयों की स्थापना के लिए भी उन्होंने आर्थिक सहयोग प्रदान किया था।
उन्होंने बताया कि महाराजा रुद्र सिंह की समाधि पर स्थित मां रुद्रेश्वरी काली मंदिर का निर्माण 1855 में उनके बेटे महाराजा महेश्वर सिंह ने करवाया था। राज परिवार की विरासत से जुड़ना सौभाग्य- कुलपति
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति लक्ष्मीविलास पाण्डेय ने कहा कि दरभंगा राज धर्म जागरण के लिए पूरे देश में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि कुलपति होने के नाते मैं खुद राज परिवार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ा हूं।
उन्होंने कहा कि दरभंगा राज का योगदान शिक्षा, खेल, कला, स्वास्थ्य सहित समाज के लगभग हर क्षेत्र में रहा है। राज परिवार के पूर्वजों ने जिस तरह समाज और क्षेत्र के विकास में अपनी भूमिका निभाई, उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का काम कुमार कपिलेश्वर सिंह भी कर रहे हैं।
कुलपति ने कहा कि वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि कुमार कपिलेश्वर सिंह को ऊर्जा और शक्ति मिले, ताकि वे आगे भी धर्म जागरण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और समाज उत्थान के कार्य करते रहें।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. संतोष कुमार ने किया। समारोह में डॉ. हेमपति झा, वरिष्ठ प्रचारक डॉ. विनोद यादव, भाजपा के वरिष्ठ नेता रंगनाथ ठाकुर, दरभंगा राज के मुख्य प्रबंधक आशुतोष दत्ता, अमरकांत झा, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री मीना झा, मंजेश चौधरी, निखिल खेरिया, प्रियांशु झा, प्रदीप गुप्ता, ठाकुर भूपेंद्र किशोर, डॉ. गोपाल ठाकुर, संजीव झा, लक्ष्मीनारायण झा, लम्बोदर झा, रमेश झा, आशीष झा, बबलू त्रिगुणायत, संतोष सिंह, राजीव प्रकाश मधुकर, सत्यम सिंह, मनोज साह, आयुष वैभव, नंदू पासवान, सुनील राय, राजू मंडल, मुरली शंकर, राम कृष्ण लाल दास, जितेंद्र ठाकुर, अशोक मंडल, मुकेश झा, प्रभाकर कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
मंदिरों के जीर्णोद्धार के साथ राज परिवार की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की इस पहल की श्रद्धालुओं ने सराहना की।  

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