Dhruv Rathee On RSS Chief Mohan Bhagwat: सोशल मीडिया पर अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए पहचाने जाने वाले ध्रुव राठी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को लेकर एक नया बयान दिया है। उन्होंने स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा को लेकर चल रहे विवाद को अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र से जोड़ते हुए भागवत के सामने एक चुनौती रखी है। राठी ने कहा कि अगर निजी कार्यक्रम आयोजित करने की स्वतंत्रता में विश्वास है, तो कुणाल कामरा को नागपुर बुलाकर उनका कॉमेडी शो कराया जाना चाहिए।
मोहन भागवत के कार्यक्रम के बाद उठाया सवाल
ध्रुव राठी ने यह बात मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में हुए एक कार्यक्रम के संदर्भ में कही। भागवत ने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित किया था। इस कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने भी अपनी आपत्ति सार्वजनिक रूप से जाहिर की थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास नहीं हो सकता है।
इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर ध्रुव राठी ने अपने सोशल मीडिया वीडियो में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया और कुणाल कामरा का उदाहरण दिया।
कुणाल कामरा के शो को लेकर क्या है विवाद?
कुणाल कामरा अपने राजनीतिक व्यंग्य और स्टैंडअप कॉमेडी के लिए जाने जाते हैं। उनके कुछ कार्यक्रमों को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। ध्रुव राठी ने अपने बयान में हाल में बेंगलुरु में हुए घटनाक्रम का भी जिक्र किया। वहां व्हाइटफील्ड में होने वाले कामरा के कुछ कार्यक्रमों को विरोध के बाद दूसरी जगह स्थानांतरित किए जाने की खबरें सामने आई थीं।
राठी का तर्क था कि किसी व्यक्ति की राजनीतिक या वैचारिक सोच अलग होने के बावजूद उसे निजी कार्यक्रम करने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों की असहमति के आधार पर किसी कलाकार के कार्यक्रम को रोकना उचित नहीं है।
‘नागपुर में कुणाल कामरा को बुलाइए’
ध्रुव राठी ने मोहन भागवत के सामने सीधे तौर पर सुझाव रखा कि उन्हें कुणाल कामरा को नागपुर बुलाना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि भागवत चाहें तो RSS के मुख्यालय में भी कामरा का कॉमेडी शो कराया जा सकता है।
राठी ने अपने संदेश में कहा कि RSS जैसे बड़े संगठन के प्रमुख होने के नाते भागवत के पास इस तरह की पहल करने की क्षमता है। उनके मुताबिक, इससे लोकतंत्र और स्वतंत्रता को लेकर एक स्पष्ट संदेश भी जाएगा।
फ्रीडम ऑफ स्पीच पर ध्रुव राठी ने ने उठाया सवाल
ध्रुव राठी ने अपने बयान में यह सवाल भी उठाया कि अगर किसी व्यक्ति की विचारधारा RSS से अलग है, तो क्या उसके निजी कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार खत्म हो जाना चाहिए? उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र देश में अलग विचार रखने वाले लोगों को भी अपनी बात कहने और कार्यक्रम करने की आजादी होनी चाहिए।
हालांकि, राठी की टिप्पणी के बाद राजनीतिक और सोशल मीडिया बहस और तेज होने की संभावना है। फिलहाल मोहन भागवत की ओर से इस चुनौती पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में देखना होगा कि क्या RSS प्रमुख इस मुद्दे पर कोई जवाब देते हैं या फिर यह मामला सोशल मीडिया की बहस तक ही सीमित रहता है।

