चारपाई, मच्छरदानी, भट्टी और हलवाई लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान:चकबंदी में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ कलेक्ट्रेट में डाला डेरा, किसान अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे

चारपाई, मच्छरदानी, भट्टी और हलवाई लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान:चकबंदी में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ कलेक्ट्रेट में डाला डेरा, किसान अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे

मुज़फ़्फ़रनगर में चकबंदी विभाग में कथित धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ किसानों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। भारतीय किसान यूनियन नेता विकास शर्मा के नेतृत्व में नंगला एवं न्यामू गांव और आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में किसान रविवार दोपहर करीब 12 बजे कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे और चकबंदी दफ्तर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। खास बात यह रही कि किसान केवल विरोध जताने नहीं पहुंचे, बल्कि लंबी लड़ाई की पूरी तैयारी के साथ चारपाई, मच्छरदानी, बर्तन, भट्टी, हलवाई और पानी के टैंकर तक लेकर कलेक्ट्रेट में डेरा डाल दिया। धरने पर बैठे किसानों का आरोप है कि चकबंदी प्रक्रिया के नाम पर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताएं की गई हैं। किसानों ने करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। इस दौरान चकबंदी अधिकारी के दफ्तर के बाहर लगी नेम प्लेट उतारते हुए भी एक किसान कैमरे में कैद हुआ। किसानों का आरोप है कि जिन पटवारियों और कानूनगो के खिलाफ कार्रवाई की गई अथवा जिन्हें निलंबित और हटाया जा चुका है, वे कथित रूप से अब भी गांवों में सक्रिय हैं और किसानों से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। धरने पर बैठे किसानों ने आरोप लगाया कि इस पूरी व्यवस्था में भू-माफियाओं को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि आम किसान अपने अधिकारों के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी शिकायतें रखीं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर किसानों को लगातार गुमराह किया गया और अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी नाराजगी के चलते किसान इस बार पूरी तैयारी के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे हैं। धरना स्थल पर चारपाइयां बिछा दी गई हैं, रात में रुकने के लिए मच्छरदानियों की व्यवस्था की गई है और खाने के लिए बर्तन, भट्टी तथा हलवाई तक साथ लाए गए हैं। पानी के लिए टैंकर की व्यवस्था भी की गई है। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक चकबंदी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच नहीं होती और कथित रूप से दोषी लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे। किसानों का कहना है कि उनका आंदोलन फिलहाल 72 घंटे तक पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा। इसके बाद आंदोलन की अगली रणनीति पर फैसला 17 सितंबर को मुज़फ़्फ़रनगर के जीआईसी मैदान में प्रस्तावित बड़ी किसान पंचायत में किया जाएगा। किसानों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।

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