Crude Oil Price Today: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार और पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों की ओर से हुए जवाबी सैन्य हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में प्रति बैरल 1 डॉलर से अधिक का उछाल आया है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री व्यापार मार्ग पर बढ़ते खतरे की वजह से तेल आपूर्ति ठप होने की आशंका गहरा गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अचानक तेजी देखने को मिल सकती है।
अमेरिका और ईरान में क्यों बढ़ा तनाव?
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की सबसे बड़ी वजह दोनों देशों का आमने-सामने आना है। अमेरिकी वायुसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित ईरान के लारक द्वीप पर हमला कर दो सैन्य लॉन्चरों को तबाह कर दिया, जिसे जुलाई के बाद ईरान पर अमेरिका की पहली बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। इसके जवाब में ईरान ने भी जॉर्डन में मौजूद दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दाग दीं। दोनों देशों की इस सीधी जंग से दुनिया भर में तेल की सप्लाई रुकने की आशंका गहरा गई है, जिससे कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में कितना आया उछाल?
हमलों की खबर फैलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम तुरंत बढ़ गए। ब्रेंट क्रूड वायदा 1.23 प्रतिशत बढ़कर 89.18 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 84.32 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करने लगा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह तनाव जारी रहता है और WTI क्रूड 85.90 डॉलर के प्रतिरोध स्तर को पार करता है, तो आने वाले दिनों में कीमतें 93.50 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकती हैं।
होर्मुज समुद्री रास्ता क्यों है इतना खास?
दुनिया भर में तेल पहुंचाने के लिए होर्मुज का समुद्री रास्ता सबसे अहम माना जाता है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। हमलों के बाद सुरक्षा चिंताओं की वजह से इस मार्ग से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों की संख्या घटकर रोजाना सिर्फ पांच रह गई है, क्योंकि शिपिंग कंपनियां अब सतर्कता बरत रही हैं। जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से फिर से खोलने के लिए मध्यस्थों द्वारा की जा रही बातचीत भी फिलहाल गतिरोध में फंस गई है।
अमेरिकी रणनीति और भारत पर संभावित असर
दुनिया भर में तेल के बढ़ते संकट को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि वे वेनेजुएला से मिलने वाले तेल का इस्तेमाल अपने खाली पड़े तेल भंडारों (पेट्रोलियम रिजर्व) को भरने के लिए करेंगे। वहीं भारत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी आवश्यकता का 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। अगर खाड़ी देशों में यह विवाद लंबा चला और कच्चे तेल के दाम ऐसे ही बढ़ते रहे, तो भारत को तेल खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों, सामान के परिवहन (भाड़े) और आम महंगाई पर देखने को मिल सकता है।


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