पूर्णिया के थाना चौक स्थित धरना स्थल पर ‘आरक्षण समीक्षा अभियान’ के बैनर तले एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया। इस धरने में वक्ताओं ने ‘जन्म नहीं, योग्यता से तय हो भविष्य’ के मूल आह्वान के साथ अपनी बात रखी। धरने में वक्ताओं ने सामाजिक न्याय के मूल उद्देश्यों को बनाए रखते हुए प्रतिभा के सम्मान पर जोर दिया। उन्होंने समान अवसर और नीतियों के न्यायसंगत वितरण की भी मांग की। अखिल भारतीय भूमिहार ब्राह्मण संघ के प्रतिनिधि बिमल कुमार राय ने पूर्णिया में आयोजित एक दिवसीय धरने के दौरान अपनी प्रमुख मांगें और विचार रखे। उन्होंने करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना की राष्ट्रव्यापी पदयात्रा का समर्थन करते हुए आरक्षण समीक्षा और यूजीसी के नए प्रावधानों पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संगठन आरक्षण के पूरी तरह खिलाफ नहीं है, बल्कि इसकी तार्किक समीक्षा चाहता है। उनका कहना है कि जो परिवार आर्थिक व राजनीतिक रूप से संपन्न और क्रीमी लेयर में आ चुके हैं, आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं तक सीमित न रहकर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन के आरक्षण समीक्षा वाले बयान का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी से जुड़े नए प्रावधान छात्रों और समाज के बीच विभाजन पैदा कर रहे हैं, अतः इस कानून को वापस लिया जाना चाहिए। योग्यता और प्रतिभा को मिले प्राथमिकता
धरना में बैठे लोगों को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एसएम झा ने व्यवस्थागत विसंगतियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी वर्ग विशेष के अधिकारों के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था के विरुद्ध है जो प्रतिभा से पहले जन्म को प्राथमिकता देती है। डॉ. एसएम झा ने कहा कि हम किसी गरीब, दलित या पिछड़े भाई-बहन के अधिकार के खिलाफ नहीं हैं। गरीबी, बेरोजगारी, भूख और सपनों की कोई जाति नहीं होती। फिर अवसरों और सहायता की नीतियों पर यह विचार क्यों न हो कि वास्तविक जरूरतमंद और मेधावी पीछे न छूटें। डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक अधिकारी कोई जन्म से नहीं, बल्कि योग्यता, ज्ञान और कड़े परिश्रम से बनता है।
आरक्षण का लाभ अंतिम पायदान तक पहुंचे
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. अमित कुमार झा ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक रूप से वंचित वर्गों का उत्थान और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना था। डॉ. अमित झा ने कहा कि जब रामविलास पासवान ने वंचित वर्ग का प्रतिनिधित्व किया, तो वह सामाजिक लड़ाई का अहम पड़ाव था। उन्होंने कहा कि आज चिराग पासवान जैसे सक्षम नेताओं की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने ही वर्ग के अंतिम और वास्तविक रूप से वंचित व्यक्ति तक इन अवसरों का लाभ पहुंचाने की पहल करें। पूर्णिया के थाना चौक स्थित धरना स्थल पर ‘आरक्षण समीक्षा अभियान’ के बैनर तले एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया। इस धरने में वक्ताओं ने ‘जन्म नहीं, योग्यता से तय हो भविष्य’ के मूल आह्वान के साथ अपनी बात रखी। धरने में वक्ताओं ने सामाजिक न्याय के मूल उद्देश्यों को बनाए रखते हुए प्रतिभा के सम्मान पर जोर दिया। उन्होंने समान अवसर और नीतियों के न्यायसंगत वितरण की भी मांग की। अखिल भारतीय भूमिहार ब्राह्मण संघ के प्रतिनिधि बिमल कुमार राय ने पूर्णिया में आयोजित एक दिवसीय धरने के दौरान अपनी प्रमुख मांगें और विचार रखे। उन्होंने करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना की राष्ट्रव्यापी पदयात्रा का समर्थन करते हुए आरक्षण समीक्षा और यूजीसी के नए प्रावधानों पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संगठन आरक्षण के पूरी तरह खिलाफ नहीं है, बल्कि इसकी तार्किक समीक्षा चाहता है। उनका कहना है कि जो परिवार आर्थिक व राजनीतिक रूप से संपन्न और क्रीमी लेयर में आ चुके हैं, आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं तक सीमित न रहकर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन के आरक्षण समीक्षा वाले बयान का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी से जुड़े नए प्रावधान छात्रों और समाज के बीच विभाजन पैदा कर रहे हैं, अतः इस कानून को वापस लिया जाना चाहिए। योग्यता और प्रतिभा को मिले प्राथमिकता
धरना में बैठे लोगों को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एसएम झा ने व्यवस्थागत विसंगतियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी वर्ग विशेष के अधिकारों के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था के विरुद्ध है जो प्रतिभा से पहले जन्म को प्राथमिकता देती है। डॉ. एसएम झा ने कहा कि हम किसी गरीब, दलित या पिछड़े भाई-बहन के अधिकार के खिलाफ नहीं हैं। गरीबी, बेरोजगारी, भूख और सपनों की कोई जाति नहीं होती। फिर अवसरों और सहायता की नीतियों पर यह विचार क्यों न हो कि वास्तविक जरूरतमंद और मेधावी पीछे न छूटें। डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक अधिकारी कोई जन्म से नहीं, बल्कि योग्यता, ज्ञान और कड़े परिश्रम से बनता है।
आरक्षण का लाभ अंतिम पायदान तक पहुंचे
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. अमित कुमार झा ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक रूप से वंचित वर्गों का उत्थान और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना था। डॉ. अमित झा ने कहा कि जब रामविलास पासवान ने वंचित वर्ग का प्रतिनिधित्व किया, तो वह सामाजिक लड़ाई का अहम पड़ाव था। उन्होंने कहा कि आज चिराग पासवान जैसे सक्षम नेताओं की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने ही वर्ग के अंतिम और वास्तविक रूप से वंचित व्यक्ति तक इन अवसरों का लाभ पहुंचाने की पहल करें।

