उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद सभास्थल के कथित ‘शुद्धीकरण’ का मामला अब बिहार में भी गरमा गया है। घटना के 21 दिन बाद भी दोषियों पर कार्रवाई न होने से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रविवार को गयाजी के टावर चौक पर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका गया और भाजपा-आरएसएस के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारी कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड सरकार से इस मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करने पर जोर दिया। नेताओं ने कहा कि जाति के आधार पर भेदभाव या अपमानजनक व्यवहार संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। ‘संविधान हर नागरिक को समानता और सम्मान का अधिकार देता’ बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि विजय कुमार मिट्ठू ने कहा कि हल्द्वानी की घटना के 21 दिन बाद भी दोषियों पर कार्रवाई न होना गंभीर विषय है। उन्होंने इसे केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़ा मामला नहीं, बल्कि देश के करोड़ों अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के सम्मान, अधिकार और सामाजिक बराबरी से जुड़ा सवाल बताया। पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष राम प्रमोद सिंह, बाबूलाल प्रसाद सिंह, इंटक महासचिव टिंकू गिरी, धर्मेंद्र कुमार निराला, सुनील कुमार पासवान, खिजीर हायात, मुन्ना मांझी, इंदल पासवान और जगदीश मांझी सहित कई अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता और सम्मान का अधिकार देता है, लेकिन जातिगत भेदभाव की घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक हैं। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में एक ओर संविधान और सामाजिक न्याय की विचारधारा है, वहीं दूसरी ओर ऐसी मानसिकता है जो समाज में भेदभाव को बढ़ावा देती है। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज होगा उन्होंने कहा कि संविधान लागू हुए दशकों बीत चुके हैं, लेकिन अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के खिलाफ भेदभाव की घटनाओं का सामने आना बताता है कि सामाजिक बराबरी की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कानून के तहत तत्काल कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आंदोलन को और तेज करेगी।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र और उत्तराखंड सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कहा कि सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के सवाल पर पार्टी पीछे नहीं हटेगी। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद सभास्थल के कथित ‘शुद्धीकरण’ का मामला अब बिहार में भी गरमा गया है। घटना के 21 दिन बाद भी दोषियों पर कार्रवाई न होने से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रविवार को गयाजी के टावर चौक पर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका गया और भाजपा-आरएसएस के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारी कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड सरकार से इस मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करने पर जोर दिया। नेताओं ने कहा कि जाति के आधार पर भेदभाव या अपमानजनक व्यवहार संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। ‘संविधान हर नागरिक को समानता और सम्मान का अधिकार देता’ बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि विजय कुमार मिट्ठू ने कहा कि हल्द्वानी की घटना के 21 दिन बाद भी दोषियों पर कार्रवाई न होना गंभीर विषय है। उन्होंने इसे केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़ा मामला नहीं, बल्कि देश के करोड़ों अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के सम्मान, अधिकार और सामाजिक बराबरी से जुड़ा सवाल बताया। पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष राम प्रमोद सिंह, बाबूलाल प्रसाद सिंह, इंटक महासचिव टिंकू गिरी, धर्मेंद्र कुमार निराला, सुनील कुमार पासवान, खिजीर हायात, मुन्ना मांझी, इंदल पासवान और जगदीश मांझी सहित कई अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता और सम्मान का अधिकार देता है, लेकिन जातिगत भेदभाव की घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक हैं। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में एक ओर संविधान और सामाजिक न्याय की विचारधारा है, वहीं दूसरी ओर ऐसी मानसिकता है जो समाज में भेदभाव को बढ़ावा देती है। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज होगा उन्होंने कहा कि संविधान लागू हुए दशकों बीत चुके हैं, लेकिन अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के खिलाफ भेदभाव की घटनाओं का सामने आना बताता है कि सामाजिक बराबरी की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कानून के तहत तत्काल कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आंदोलन को और तेज करेगी।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र और उत्तराखंड सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कहा कि सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के सवाल पर पार्टी पीछे नहीं हटेगी।

