मध्य प्रदेश के सीधी जिले में सवर्ण समाज ने अपने ही नेताओं के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। सीधी-रीवा मुख्य मार्ग पर सोन नदी के कोलदहा घाट पर सवर्ण समाज के लोगों ने प्रतीकात्मक रूप से सवर्ण नेताओं की अर्थी निकाली। इसके बाद सिर मुंडवाकर कर विधि-विधान से पिंडदान और प्रतीकात्मक अंत्येष्टि संस्कार किया गया। यह प्रदर्शन जातिगत आरक्षण, एससी-एसटी एक्ट और यूजीसी से जुड़े मुद्दों पर नेताओं की चुप्पी के विरोध में था। इस प्रदर्शन का नेतृत्व सवर्ण नेता शत्रुघ्न पांडे ने अपने समर्थकों के साथ किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सवर्ण समाज के नेताओं की चुप्पी के विरोध में है। शत्रुघ्न पांडे ने आरोप लगाया कि विंध्य क्षेत्र में सवर्ण समाज से आने वाले विधायक और सांसद सहित 12 से अधिक बड़े नेता हैं। इसके बावजूद, समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर किसी भी नेता ने अब तक कोई बयान नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि अन्य समाजों के नेता अपने वर्ग के हितों के लिए आवाज उठाते हैं, लेकिन सवर्ण नेताओं की चुप्पी बनी हुई है। नेताओं को जगाना उद्देश्य पांडे ने बताया कि इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन का उद्देश्य नेताओं को जगाना है, ताकि वे सवर्ण समाज से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नेताओं की चुप्पी नहीं टूटी और समाज के मुद्दों को लेकर आवाज नहीं उठाई गई, तो आने वाले समय में इससे भी बड़ा और व्यापक आंदोलन किया जाएगा। एकजुट होने की अपील प्रदर्शन में शामिल सवर्ण समाज के प्रतिनिधि कमलेश तिवारी ने भी समाज के लोगों से एकजुट होने की अपील की। प्रदर्शनकारियों ने यह भी संकेत दिया कि यदि उनकी मांगों और मुद्दों को नजरअंदाज किया गया, तो इसका राजनीतिक असर आगामी चुनावों में भी देखने को मिल सकता है। सीधी के कोलदहा घाट पर सवर्ण नेताओं की प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर मुंडन और पिंडदान करने का यह अनोखा प्रदर्शन जिलेभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

