बांका में 100 एकड़ में अमरूद-नींबू की सामूहिक खेती:4 क्लस्टर बनेंगे; किसानों को अनुदान के साथ बाजार भी मिलेगा

बांका में 100 एकड़ में अमरूद-नींबू की सामूहिक खेती:4 क्लस्टर बनेंगे; किसानों को अनुदान के साथ बाजार भी मिलेगा

बांका जिले में किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उद्यान विभाग ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत किसानों को पारंपरिक खेती से बागवानी की ओर प्रोत्साहित करने के लिए अमरूद और नींबू की सामूहिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इस वर्ष जिले में अमरूद और नींबू के दो-दो विशेष क्लस्टर तैयार किए जाएंगे। प्रत्येक क्लस्टर 25 एकड़ भूमि में विकसित होगा। योजना के तहत किसान समूह बनाकर वैज्ञानिक तरीके से अमरूद और नींबू का उत्पादन करेंगे। किसानों को पौधों की खरीद से लेकर खेतों की घेराबंदी तक के लिए दो किश्तों में अनुदान दिया जाएगा। इससे किसानों पर शुरुआती पूंजी का बोझ कम होगा। जिला उद्यान पदाधिकारी दिवाकर कुमार भारती ने बताया कि पहल का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को एकजुट कर उनकी आय बढ़ाना है। सामूहिक खेती से उत्पादन लागत कम होने के साथ किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों का लाभ भी मिलेगा। कम पानी में कई वर्षों तक मिलेगा उत्पादन कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बांका की मिट्टी और जलवायु अमरूद और नींबू की बागवानी के लिए अनुकूल है। इन फसलों को अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है। एक बार पौधे लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता रहता है। इससे किसानों के लिए निरंतर आय का स्थायी स्रोत तैयार हो सकता है। खेत से ही उपज खरीद सकेंगे बड़े व्यापारी क्लस्टर स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन होने से किसानों को बाजार तलाशने में भी आसानी होगी। विभाग का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में उत्पादन होने पर बड़े व्यापारी सीधे खेतों से ही उपज खरीद सकेंगे। अमरूद और नींबू की मांग स्थानीय बाजारों के अलावा बड़े शहरों में भी बनी रहती है। ऐसे में किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है। ‘तकनीकी और बाजार दोनों स्तर पर मिलेगा लाभ’ जिला उद्यान पदाधिकारी दिवाकर कुमार भारती ने बताया कि अमरूद और नींबू के दो-दो क्लस्टर बनाए जाएंगे और प्रत्येक क्लस्टर 25 एकड़ का होगा। किसानों को दो किश्तों में अनुदान दिया जाएगा। सामूहिक खेती के माध्यम से किसानों को तकनीकी सहायता के साथ बाजार तक पहुंच का भी लाभ मिलेगा। बांका जिले में किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उद्यान विभाग ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत किसानों को पारंपरिक खेती से बागवानी की ओर प्रोत्साहित करने के लिए अमरूद और नींबू की सामूहिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इस वर्ष जिले में अमरूद और नींबू के दो-दो विशेष क्लस्टर तैयार किए जाएंगे। प्रत्येक क्लस्टर 25 एकड़ भूमि में विकसित होगा। योजना के तहत किसान समूह बनाकर वैज्ञानिक तरीके से अमरूद और नींबू का उत्पादन करेंगे। किसानों को पौधों की खरीद से लेकर खेतों की घेराबंदी तक के लिए दो किश्तों में अनुदान दिया जाएगा। इससे किसानों पर शुरुआती पूंजी का बोझ कम होगा। जिला उद्यान पदाधिकारी दिवाकर कुमार भारती ने बताया कि पहल का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को एकजुट कर उनकी आय बढ़ाना है। सामूहिक खेती से उत्पादन लागत कम होने के साथ किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों का लाभ भी मिलेगा। कम पानी में कई वर्षों तक मिलेगा उत्पादन कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बांका की मिट्टी और जलवायु अमरूद और नींबू की बागवानी के लिए अनुकूल है। इन फसलों को अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है। एक बार पौधे लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता रहता है। इससे किसानों के लिए निरंतर आय का स्थायी स्रोत तैयार हो सकता है। खेत से ही उपज खरीद सकेंगे बड़े व्यापारी क्लस्टर स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन होने से किसानों को बाजार तलाशने में भी आसानी होगी। विभाग का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में उत्पादन होने पर बड़े व्यापारी सीधे खेतों से ही उपज खरीद सकेंगे। अमरूद और नींबू की मांग स्थानीय बाजारों के अलावा बड़े शहरों में भी बनी रहती है। ऐसे में किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है। ‘तकनीकी और बाजार दोनों स्तर पर मिलेगा लाभ’ जिला उद्यान पदाधिकारी दिवाकर कुमार भारती ने बताया कि अमरूद और नींबू के दो-दो क्लस्टर बनाए जाएंगे और प्रत्येक क्लस्टर 25 एकड़ का होगा। किसानों को दो किश्तों में अनुदान दिया जाएगा। सामूहिक खेती के माध्यम से किसानों को तकनीकी सहायता के साथ बाजार तक पहुंच का भी लाभ मिलेगा।  

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