सामाजिक सद्भाव और रिश्ते दांव पर लगाकर सत्ता हासिल करना राजनीति नहीं: एकनाथ खडसे

सामाजिक सद्भाव और रिश्ते दांव पर लगाकर सत्ता हासिल करना राजनीति नहीं: एकनाथ खडसे

महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता एकनाथ खडसे ने राज्य के राजनीतिक माहौल में आई भारी गिरावट पर खेद जताते हुए रविवार को कहा कि राजनीति को व्यक्तिगत रिश्ते और सामाजिक सद्भाव दांव पर लगाकर केवल सत्ता पाने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। खडसे ने अपने 75वें जन्मदिन के मौके पर यहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज के कटु माहौल के विपरीत, 2014 से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष आपसी सम्मान बनाए रखते हुए मिलकर काम करते थे। उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2014 तक अगर आप महाराष्ट्र की राजनीति को देखें, तो माहौल साफ-सुथरा और सौहार्दपूर्ण था।

विपक्ष और सत्तारूढ़ दल साथ रहते थे, एक-दूसरे से संवाद करते थे और साथ मिलकर काम करते थे। वे एक-दूसरे की आलोचना तो करते थे, लेकिन व्यक्तिगत मतभेद कभी इस हद तक नहीं पहुंचे।’’ उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत संबंध बनाए गए और वे आज भी कायम हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व नेता और अब राकांपा (शप) में शामिल हो चुके खडसे ने कहा कि भले ही समय के साथ सरकारें और राजनीतिक जुड़ाव बदलते रहते हैं, लेकिन अतीत और वर्तमान की राजनीतिक चर्चाओं में जो बदलाव आया है, वह बेहद खेदजनक है।

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उन्होंने कहा, ‘‘सरकारें आती-जाती रहती हैं, कार्यकर्ता बदलते रहते हैं, और लोग एक तरफ से दूसरी तरफ तथा एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाते रहते हैं।’’ राजनीति में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए खडसे ने कहा कि प्रमोद महाजन, गोपीनाथ मुंडे और कई अन्य नेताओं ने महाराष्ट्र में भाजपा का संगठन खड़ा करने के लिए कड़ी मेहनत की थी। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं उस दौर की राजनीति की तुलना आज की राजनीति से करता हूं, तो मुझे दुख होता है। मैं राजनीति के बारे में बात नहीं करना चाहता, लेकिन आज के हालात देखकर मुझे दुख होता है।’’ राज्य के पूर्व मंत्री ने कहा कि जब 2000 और 2014 के बीच महाराष्ट्र में भाजपा सत्ता में नहीं थी, तब विपक्ष में रहने के बावजूद पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रेरित रखने की कोशिशें की गईं।

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कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद पवार और खडसे के साथ उनके अच्छे संबंध रहे हैं और राजनीति में कोई भी शत्रुता स्थायी नहीं होनी चाहिए। आठवले ने कहा, ‘‘मैं हमेशा कहता हूं कि राजनीति में कभी भी दुश्मनी नहीं रखनी चाहिए। भारतीय लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष मिलकर देश चलाते हैं।’’ उन्होंने कहा कि अगर भाजपा ने खडसे को शामिल नहीं किया होता, तो वह खुशी-खुशी उन्हें रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल कर लेते।

आठवले ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि शायद खडसे को उनकी पार्टी से विधायक का टिकट नहीं मिल पाता।

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