सबौर में कटाव, आठ घर गंगा में समाए:एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बोले- 50 किमी का इलाका है, पहले से क्या तैयारी करते

सबौर में कटाव, आठ घर गंगा में समाए:एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बोले- 50 किमी का इलाका है, पहले से क्या तैयारी करते

भागलपुर में कोसी-गंगा उफान पर है। सबौर इलाके में आज सुबह से ही कटाव हो रहा है। अब तक 8 घर गंगा नदी में समा चुके हैं। यह तब हो रहा है, जब जल संसाधन विभाग पहले से पूरी तैयारी के साथ लगा हुआ था, लेकिन जहां कटाव हो रहा है, वहां विभाग की नजर नहीं गई। एग्जीक्यूटिव इंजीनियर आदित्य ने कहा, “50 किलोमीटर इलाका है, जहां-जहां कटाव होता है, हम लोग काम करते हैं।” पूछा गया कि पहले से कोई तैयारी नहीं थी क्या? तीन साल पहले इस इलाके में कटाव हुआ था। इस पर उन्होंने कहा, “पहले से हम लोग क्या तैयारी करेंगे? मामला सबौर प्रखंड के इंग्लिश फरक्का का है। सुबह से हो रहा है कटाव सुबह 3:00 बजे से ही इलाके में कटाव हो रहा है। सोते समय ही संजू देवी का घर गंगा में कटकर समा गया। इतना भी वक्त नहीं बचा कि वह घर से कुछ सामान भी बचा पातीं। 2 महीने पहले ही बेटे की शादी हुई थी। शादी में मिले सामान भी सब गंगा में समा गए। सुबह से दोपहर तक उनके घर में खाना नहीं बना। भूखे-प्यासे लोग धूप में किसी तरह बैठे हुए हैं। यह सिर्फ संजू देवी का हाल नहीं है। इसके साथ-साथ ऐसे कई परिवार हैं, जिनके घर गंगा नदी में समा गए। संजू देवी ने बताया कि पहले से अगर विभाग ने तैयारी की होती तो आज हमारा घर होता। बड़ी मेहनत से हम लोगों ने घर बनाया था। पति की मौत हो जाने के बाद दुकान लगाई, उसके बाद घर बनाया, लेकिन एक झटके में ही घर गंगा के आगोश में समा गया। और यह सब कुछ जल संसाधन विभाग की लापरवाही से हुआ। तीन साल पहले कटवरोधी कार्य कराया, इस बार भूल गए विभाग तीन साल पहले उसी जगह पर जल संसाधन विभाग ने कटावरोधी कार्य कराया था, लेकिन इस बार पहले से जल संसाधन विभाग की यहां तक नजर नहीं आई। कटाव शुरू हुआ तो 2 नाव के जरिए फ्लड फाइटिंग का काम कराया जा रहा है, जो नाकाफी साबित हो रहा है। 25 फीट पानी में 12 बोरी पैकेट गिराया जा रहा है।
मामले पर जल संसाधन विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर आदित्य से पूछे जाने पर संवेदनहीनता वाला जवाब सामने आया। उन्होंने सवालों पर कहा, “पहले से हम लोग कैसे पता लगाएंगे।” भागलपुर में कोसी-गंगा उफान पर है। सबौर इलाके में आज सुबह से ही कटाव हो रहा है। अब तक 8 घर गंगा नदी में समा चुके हैं। यह तब हो रहा है, जब जल संसाधन विभाग पहले से पूरी तैयारी के साथ लगा हुआ था, लेकिन जहां कटाव हो रहा है, वहां विभाग की नजर नहीं गई। एग्जीक्यूटिव इंजीनियर आदित्य ने कहा, “50 किलोमीटर इलाका है, जहां-जहां कटाव होता है, हम लोग काम करते हैं।” पूछा गया कि पहले से कोई तैयारी नहीं थी क्या? तीन साल पहले इस इलाके में कटाव हुआ था। इस पर उन्होंने कहा, “पहले से हम लोग क्या तैयारी करेंगे? मामला सबौर प्रखंड के इंग्लिश फरक्का का है। सुबह से हो रहा है कटाव सुबह 3:00 बजे से ही इलाके में कटाव हो रहा है। सोते समय ही संजू देवी का घर गंगा में कटकर समा गया। इतना भी वक्त नहीं बचा कि वह घर से कुछ सामान भी बचा पातीं। 2 महीने पहले ही बेटे की शादी हुई थी। शादी में मिले सामान भी सब गंगा में समा गए। सुबह से दोपहर तक उनके घर में खाना नहीं बना। भूखे-प्यासे लोग धूप में किसी तरह बैठे हुए हैं। यह सिर्फ संजू देवी का हाल नहीं है। इसके साथ-साथ ऐसे कई परिवार हैं, जिनके घर गंगा नदी में समा गए। संजू देवी ने बताया कि पहले से अगर विभाग ने तैयारी की होती तो आज हमारा घर होता। बड़ी मेहनत से हम लोगों ने घर बनाया था। पति की मौत हो जाने के बाद दुकान लगाई, उसके बाद घर बनाया, लेकिन एक झटके में ही घर गंगा के आगोश में समा गया। और यह सब कुछ जल संसाधन विभाग की लापरवाही से हुआ। तीन साल पहले कटवरोधी कार्य कराया, इस बार भूल गए विभाग तीन साल पहले उसी जगह पर जल संसाधन विभाग ने कटावरोधी कार्य कराया था, लेकिन इस बार पहले से जल संसाधन विभाग की यहां तक नजर नहीं आई। कटाव शुरू हुआ तो 2 नाव के जरिए फ्लड फाइटिंग का काम कराया जा रहा है, जो नाकाफी साबित हो रहा है। 25 फीट पानी में 12 बोरी पैकेट गिराया जा रहा है।
मामले पर जल संसाधन विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर आदित्य से पूछे जाने पर संवेदनहीनता वाला जवाब सामने आया। उन्होंने सवालों पर कहा, “पहले से हम लोग कैसे पता लगाएंगे।”  

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