नवादा के जलालपुर गांव में माता-पिता को खो चुके तीन अनाथ बच्चों को संत रामपाल जी महाराज की ओर से मदद मिली है। करीब दो महीने पहले मां की मृत्यु के बाद इन बच्चों के सामने रहने, भोजन और पढ़ाई की गंभीर समस्या खड़ी हो गई थी। स्वर्गीय फेकू राजवंशी और उनकी पत्नी स्वर्गीय समाती देवी के तीन पुत्र कारू कुमार (11), दिलखुश कुमार (7) और अंकुश कुमार (5) हैं। बच्चों के पिता की लगभग चार वर्ष पहले ट्रेन दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद मां की मौत से तीनों बच्चे पूरी तरह बेसहारा हो गए थे और एक जर्जर मिट्टी के घर में रहने को मजबूर थे। बच्चों के लिए लगभग 14 लाख रुपये की लागत से एक पक्का मकान बनवाया गया है। इस मकान में दो कमरे, किचन, बाथरूम और एक हॉल के साथ-साथ आवश्यक घरेलू सामान भी उपलब्ध कराए गए हैं। ग्रामीणों के सहयोग से माता-पिता का हुआ अंतिम संस्कार गांव के समाजसेवी मुकेश यादव ने बच्चों की दयनीय स्थिति देखकर ग्रामीणों के सहयोग से उनका अंतिम संस्कार कराया। उन्होंने बच्चों की मदद के लिए एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। यह वीडियो संत रामपाल जी महाराज की टीम तक पहुंचा, जिसके बाद बच्चों की स्थिति की जानकारी ली गई और सहायता की पहल की गई। मुकेश यादव के अनुसार, बच्चों को मकान के साथ बिस्तर, पंखा, बिजली, राशन, चूल्हा, सिलेंडर, कपड़े, स्कूल ड्रेस, बैग, जूते-चप्पल, कॉपी-किताब और अन्य जरूरी सामान भी उपलब्ध कराए गए हैं। समाजसेवी चंदन चौधरी ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई, भोजन और परवरिश में 18 वर्ष की आयु तक सहयोग करने का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने समाज से भी ऐसे जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए आगे आने का आह्वान किया। चांदी का मुकुट पहनाकर किया सम्मानित मकान पर एक बड़ा बैनर भी लगाया गया है, जिस पर मानव सेवा और गरीबों को रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा व मकान उपलब्ध कराने का संदेश लिखा है। इस मदद के सम्मान में ग्रामीणों ने लगभग छह किलोमीटर की शोभायात्रा निकाली, जिसमें संत रामपाल जी महाराज की तस्वीर को शामिल किया गया और उन्हें चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया गया। नवादा के जलालपुर गांव में माता-पिता को खो चुके तीन अनाथ बच्चों को संत रामपाल जी महाराज की ओर से मदद मिली है। करीब दो महीने पहले मां की मृत्यु के बाद इन बच्चों के सामने रहने, भोजन और पढ़ाई की गंभीर समस्या खड़ी हो गई थी। स्वर्गीय फेकू राजवंशी और उनकी पत्नी स्वर्गीय समाती देवी के तीन पुत्र कारू कुमार (11), दिलखुश कुमार (7) और अंकुश कुमार (5) हैं। बच्चों के पिता की लगभग चार वर्ष पहले ट्रेन दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद मां की मौत से तीनों बच्चे पूरी तरह बेसहारा हो गए थे और एक जर्जर मिट्टी के घर में रहने को मजबूर थे। बच्चों के लिए लगभग 14 लाख रुपये की लागत से एक पक्का मकान बनवाया गया है। इस मकान में दो कमरे, किचन, बाथरूम और एक हॉल के साथ-साथ आवश्यक घरेलू सामान भी उपलब्ध कराए गए हैं। ग्रामीणों के सहयोग से माता-पिता का हुआ अंतिम संस्कार गांव के समाजसेवी मुकेश यादव ने बच्चों की दयनीय स्थिति देखकर ग्रामीणों के सहयोग से उनका अंतिम संस्कार कराया। उन्होंने बच्चों की मदद के लिए एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। यह वीडियो संत रामपाल जी महाराज की टीम तक पहुंचा, जिसके बाद बच्चों की स्थिति की जानकारी ली गई और सहायता की पहल की गई। मुकेश यादव के अनुसार, बच्चों को मकान के साथ बिस्तर, पंखा, बिजली, राशन, चूल्हा, सिलेंडर, कपड़े, स्कूल ड्रेस, बैग, जूते-चप्पल, कॉपी-किताब और अन्य जरूरी सामान भी उपलब्ध कराए गए हैं। समाजसेवी चंदन चौधरी ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई, भोजन और परवरिश में 18 वर्ष की आयु तक सहयोग करने का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने समाज से भी ऐसे जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए आगे आने का आह्वान किया। चांदी का मुकुट पहनाकर किया सम्मानित मकान पर एक बड़ा बैनर भी लगाया गया है, जिस पर मानव सेवा और गरीबों को रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा व मकान उपलब्ध कराने का संदेश लिखा है। इस मदद के सम्मान में ग्रामीणों ने लगभग छह किलोमीटर की शोभायात्रा निकाली, जिसमें संत रामपाल जी महाराज की तस्वीर को शामिल किया गया और उन्हें चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया गया।

