अमरोहा के डिडौली क्षेत्र में पांच साल पहले हुए नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म मामले में शनिवार को फैसला आया। अपर सत्र न्यायाधीश विशेष पॉक्सो एक्ट प्रथम की अदालत ने तीन बालिग आरोपियों को उम्रकैद और एक बाल अपचारी को 20 साल कैद की सजा सुनाई। अदालत ने भूरा उर्फ अजीम, कपिल और गौरव को उम्रकैद की सजा दी, जबकि बाल अपचारी को 20 साल कैद की सजा सुनाई गई। चारों दोषियों पर कुल 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। फैसला सुनाए जाने के बाद, जमानत पर चल रहे तीनों बालिग दोषियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। वहीं, बाल अपचारी को बाल सुधार गृह भेजा गया। यह घटना 29 अगस्त 2020 की है। कोरोना काल के दौरान उत्तराखंड के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के शिक्षक अपने परिवार के साथ गांव आए हुए थे। दोपहर करीब 12 बजे उनकी नाबालिग बेटी दादी की समाधि पर गई थी। आरोप है कि इसी दौरान गांव के भूरा उर्फ अजीम, शेरू, कपिल और एक बाल अपचारी किशोरी को खींचकर गन्ने के खेत में ले गए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, भूरा उर्फ अजीम और शेरू ने किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया, जबकि कपिल और बाल अपचारी पहरा देते रहे। डिडौली कोतवाली में सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान गौरव का नाम भी सामने आया। पुलिस ने भूरा, कपिल और गौरव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि बाल अपचारी को बाल सुधार गृह भेजा गया। शेरू घटना के बाद से फरार बताया गया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश विशेष पॉक्सो एक्ट प्रथम की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक नवीन कुमार त्यागी ने पैरवी की। शनिवार को अंतिम सुनवाई के दौरान अदालत ने साक्ष्यों और पत्रावली के अवलोकन के आधार पर भूरा उर्फ अजीम, कपिल, गौरव और बाल अपचारी को दोषी करार दिया।

