जेएसएससी-सीजीएल में हुई गड़बड़ी की जांच कर रही सीआईडी ने दिल्ली से गिरफ्तार विक्रमगंज (रोहतास) निवासी सोमांश प्रकाश और उसके सहयोगी वैशाली (बिहार) निवासी राहुल कुमार को 5 दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया है। रिमांड में पूछताछ के दौरान सीआईडी के मुताबिक आरोपियों ने परीक्षा संचालन से लेकर पेपर लीक तक की कई अहम कड़ियों का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि जेएसएससी ने सीजीएल परीक्षा संचालन का मुख्य टेंडर मेसर्स वेबेल टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को दिया था। वेबेल ने परीक्षा संचालन का काम आईसीएन को सब-लेट कर दिया था। आईसीएन का मुख्य कर्ताधर्ता और संचालक मिथिलेश सिंह है, जो गिरफ्तारी के डर से फरार चल रहा है। सीआईडी के अनुसार इसी आईसीएन से जुड़े दोनों कर्मियों ने प्रश्न पत्र लीक किया और इसके बदले पैसे कमाए। अब जांच एजेंसी पेपर लीक की पूरी कड़ी जोड़ रही है। सीआईडी को ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर जांच एजेंसी मान रही है कि सीजीएल का प्रश्न पत्र आईसीएन एजेंसी के स्तर से लीक हुआ। दिल्ली से पकड़े गए सोमांश और राहुल ने पूछताछ में एजेंसी संचालक मिथिलेश सिंह की भूमिका के बारे में जानकारी दी है। अब सीआईडी इनसे यह पता कर रही है कि प्रश्न पत्र कैसे लीक किया गया, किसे उपलब्ध कराया गया और इसके बदले किस-किस से कितनी रकम की डील हुई। इसके अलावा इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे। 150 लोगों से पूछताछ, जेएसएससी सचिव भी शामिल मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी ने जांच तेज कर दी है। पिछले 13 दिनों में करीब 150 लोगों को समन जारी कर पूछताछ की जा चुकी है। इनमें जेएसएससी सचिव सुधीर गुप्ता के अलावा आयोग से जुड़े अन्य पदाधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। वेबेल कंपनी से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा चुकी है। इधर, शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए चार अभ्यर्थियों को शनिवार को न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (होटवार, रांची) भेज दिया गया। इनमें नवाडीह, धनबाद निवासी दीपक कुमार, दुगदा, बोकारो निवासी उमेश कुमार राय, राजगंज, धनबाद निवासी विजय कुमार तिवारी और सुदामडीह, धनबाद निवासी आनंद कुमार सिंह शामिल हैं। सीआईडी सोमवार को इन चारों को रिमांड पर लेने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल करेगी। जांच एजेंसी को इनके बैंक खातों से पैसे के लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं। इसी आधार पर इनकी गिरफ्तारी हुई है। अब पूछताछ में यह पता लगाया जाएगा कि वे किन बिचौलियों के संपर्क में आए, सेटिंग के लिए कितनी रकम दी। फरार मिथिलेश सिंह की तलाश तेज सीआईडी सूत्रों के मुताबिक, जांच का तीसरा और महत्वपूर्ण एंगल आईसीएन एजेंसी के फरार संचालक मिथिलेश सिंह से जुड़ा है। जांच एजेंसी को ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे उसे संदेह है कि सीजीएल का प्रश्न पत्र आईसीएन के नेटवर्क से योजनाबद्ध तरीके से लीक किया गया। जांच में मिथिलेश सिंह, सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार के अलावा बिहार, झारखंड और अन्य राज्यों में सक्रिय परीक्षा माफिया के कनेक्शन भी खंगाले जा रहे हैं। सीआईडी बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज जोड़ रही है। मिथिलेश की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली, पटना और झारखंड में संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। सीआईडी ने पहले सिर्फ ठगी का केस मानकर जांच की थी सीजीएल मामले की जांच जनवरी 2025 में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद शुरू हुई थी। उस समय सीआईडी इसे प्रश्न पत्र लीक का मामला नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों को प्रश्न पत्र के नाम पर गेस पेपर रटवाकर ठगी करने का मामला मान रही थी। उस दौरान पैसे लेकर फर्जी प्रश्न पत्र रटवाने वाले 11 बिचौलियों और आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। लेकिन अगस्त 2026 में करीब 20 महीने बाद मामला फिर गरमाया तो जांच की दिशा बदल गई। इसी महीने सीआईडी ने 14वीं जेपीएससी परीक्षा में गड़बड़ी करने के मामले में मास्टरमाइंड अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और उसकी पत्नी सुषमा कुमारी को गिरफ्तार किया। इसके बाद 27 अगस्त को दिल्ली के बुराड़ी से परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आईसीएन के दो प्रमुख कर्मियों सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को गिरफ्तार किया गया। जेएसएससी-सीजीएल में हुई गड़बड़ी की जांच कर रही सीआईडी ने दिल्ली से गिरफ्तार विक्रमगंज (रोहतास) निवासी सोमांश प्रकाश और उसके सहयोगी वैशाली (बिहार) निवासी राहुल कुमार को 5 दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया है। रिमांड में पूछताछ के दौरान सीआईडी के मुताबिक आरोपियों ने परीक्षा संचालन से लेकर पेपर लीक तक की कई अहम कड़ियों का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि जेएसएससी ने सीजीएल परीक्षा संचालन का मुख्य टेंडर मेसर्स वेबेल टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को दिया था। वेबेल ने परीक्षा संचालन का काम आईसीएन को सब-लेट कर दिया था। आईसीएन का मुख्य कर्ताधर्ता और संचालक मिथिलेश सिंह है, जो गिरफ्तारी के डर से फरार चल रहा है। सीआईडी के अनुसार इसी आईसीएन से जुड़े दोनों कर्मियों ने प्रश्न पत्र लीक किया और इसके बदले पैसे कमाए। अब जांच एजेंसी पेपर लीक की पूरी कड़ी जोड़ रही है। सीआईडी को ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर जांच एजेंसी मान रही है कि सीजीएल का प्रश्न पत्र आईसीएन एजेंसी के स्तर से लीक हुआ। दिल्ली से पकड़े गए सोमांश और राहुल ने पूछताछ में एजेंसी संचालक मिथिलेश सिंह की भूमिका के बारे में जानकारी दी है। अब सीआईडी इनसे यह पता कर रही है कि प्रश्न पत्र कैसे लीक किया गया, किसे उपलब्ध कराया गया और इसके बदले किस-किस से कितनी रकम की डील हुई। इसके अलावा इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे। 150 लोगों से पूछताछ, जेएसएससी सचिव भी शामिल मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी ने जांच तेज कर दी है। पिछले 13 दिनों में करीब 150 लोगों को समन जारी कर पूछताछ की जा चुकी है। इनमें जेएसएससी सचिव सुधीर गुप्ता के अलावा आयोग से जुड़े अन्य पदाधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। वेबेल कंपनी से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा चुकी है। इधर, शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए चार अभ्यर्थियों को शनिवार को न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (होटवार, रांची) भेज दिया गया। इनमें नवाडीह, धनबाद निवासी दीपक कुमार, दुगदा, बोकारो निवासी उमेश कुमार राय, राजगंज, धनबाद निवासी विजय कुमार तिवारी और सुदामडीह, धनबाद निवासी आनंद कुमार सिंह शामिल हैं। सीआईडी सोमवार को इन चारों को रिमांड पर लेने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल करेगी। जांच एजेंसी को इनके बैंक खातों से पैसे के लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं। इसी आधार पर इनकी गिरफ्तारी हुई है। अब पूछताछ में यह पता लगाया जाएगा कि वे किन बिचौलियों के संपर्क में आए, सेटिंग के लिए कितनी रकम दी। फरार मिथिलेश सिंह की तलाश तेज सीआईडी सूत्रों के मुताबिक, जांच का तीसरा और महत्वपूर्ण एंगल आईसीएन एजेंसी के फरार संचालक मिथिलेश सिंह से जुड़ा है। जांच एजेंसी को ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे उसे संदेह है कि सीजीएल का प्रश्न पत्र आईसीएन के नेटवर्क से योजनाबद्ध तरीके से लीक किया गया। जांच में मिथिलेश सिंह, सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार के अलावा बिहार, झारखंड और अन्य राज्यों में सक्रिय परीक्षा माफिया के कनेक्शन भी खंगाले जा रहे हैं। सीआईडी बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज जोड़ रही है। मिथिलेश की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली, पटना और झारखंड में संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। सीआईडी ने पहले सिर्फ ठगी का केस मानकर जांच की थी सीजीएल मामले की जांच जनवरी 2025 में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद शुरू हुई थी। उस समय सीआईडी इसे प्रश्न पत्र लीक का मामला नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों को प्रश्न पत्र के नाम पर गेस पेपर रटवाकर ठगी करने का मामला मान रही थी। उस दौरान पैसे लेकर फर्जी प्रश्न पत्र रटवाने वाले 11 बिचौलियों और आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। लेकिन अगस्त 2026 में करीब 20 महीने बाद मामला फिर गरमाया तो जांच की दिशा बदल गई। इसी महीने सीआईडी ने 14वीं जेपीएससी परीक्षा में गड़बड़ी करने के मामले में मास्टरमाइंड अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और उसकी पत्नी सुषमा कुमारी को गिरफ्तार किया। इसके बाद 27 अगस्त को दिल्ली के बुराड़ी से परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आईसीएन के दो प्रमुख कर्मियों सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को गिरफ्तार किया गया।

