नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद बिहार के मैदानी इलाकों में नदियों का जलस्तर प्रभावित हुआ है। मुजफ्फरपुर जिले से गुजरने वाली प्रमुख नदियों, बूढ़ी गंडक, बागमती और गंडक के जलस्तर में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने इन नदियों के ताजा आंकड़े जारी किए हैं। प्रशासन के अनुसार, स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। जारी रिपोर्ट के अनुसार, बागमती नदी की स्थिति सबसे अधिक संवेदनशील बनी हुई है। कटौझा स्थित मापक केंद्र पर बागमती का जलस्तर 53.50 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान 55.00 मीटर से नीचे है। हालांकि, इसमें लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे तटबंधों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। बागमती नदी के जलस्तर में वृद्धि से मुजफ्फरपुर के औराई, कटरा और गायघाट प्रखंडों में बाढ़ की आशंका बढ़ जाती है। फिलहाल खतरे की बात नहीं है बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर सिकंदरपुर मापक केंद्र पर 47.25 मीटर पर स्थिर है। इसका खतरे का निशान 52.53 मीटर है, जिससे यह नदी अभी सुरक्षित दायरे में बह रही है। वहीं, रेवाघाट पर गंडक नदी का जलस्तर 53.32 मीटर दर्ज किया गया है। गंडक का खतरे का निशान 54.41 मीटर है और इसके जलस्तर में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जिससे निचले इलाकों को राहत मिली है। आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन तैयार जिलाधिकारी कुमार गौरव और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रही हैं। संवेदनशील तटबंधों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और बाढ़ नियंत्रण कक्ष को सक्रिय कर दिया गया है। प्रशासन ने स्थानीय अभियंताओं और अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे लगातार गश्त करें और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें। निचले और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री और नावों की व्यवस्था का आकलन भी पूरा कर लिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद बिहार के मैदानी इलाकों में नदियों का जलस्तर प्रभावित हुआ है। मुजफ्फरपुर जिले से गुजरने वाली प्रमुख नदियों, बूढ़ी गंडक, बागमती और गंडक के जलस्तर में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने इन नदियों के ताजा आंकड़े जारी किए हैं। प्रशासन के अनुसार, स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। जारी रिपोर्ट के अनुसार, बागमती नदी की स्थिति सबसे अधिक संवेदनशील बनी हुई है। कटौझा स्थित मापक केंद्र पर बागमती का जलस्तर 53.50 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान 55.00 मीटर से नीचे है। हालांकि, इसमें लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे तटबंधों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। बागमती नदी के जलस्तर में वृद्धि से मुजफ्फरपुर के औराई, कटरा और गायघाट प्रखंडों में बाढ़ की आशंका बढ़ जाती है। फिलहाल खतरे की बात नहीं है बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर सिकंदरपुर मापक केंद्र पर 47.25 मीटर पर स्थिर है। इसका खतरे का निशान 52.53 मीटर है, जिससे यह नदी अभी सुरक्षित दायरे में बह रही है। वहीं, रेवाघाट पर गंडक नदी का जलस्तर 53.32 मीटर दर्ज किया गया है। गंडक का खतरे का निशान 54.41 मीटर है और इसके जलस्तर में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जिससे निचले इलाकों को राहत मिली है। आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन तैयार जिलाधिकारी कुमार गौरव और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रही हैं। संवेदनशील तटबंधों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और बाढ़ नियंत्रण कक्ष को सक्रिय कर दिया गया है। प्रशासन ने स्थानीय अभियंताओं और अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे लगातार गश्त करें और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें। निचले और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री और नावों की व्यवस्था का आकलन भी पूरा कर लिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

