मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में रक्षाबंधन पर जेल की ऊंची दीवारें और सलाखें भाई-बहन के अटूट रिश्ते के आड़े नहीं आ सकीं। सुबह से ही जेल के बाहर बहनों की कतार लगी रही और मुलाकात के दौरान जैसे ही बहनों ने बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, भावनाओं का बांध टूट गया। भाई की आंखों में आंसू देख बहनें भी फफक पड़ीं और बहनों को रोता देख भाइयों की आंखें भी नम हो गईं। सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक करीब 1600 बहने अपने भाइयों की कलाई पर राखी सजा चुकी थीं। हालांकि पिछले साल की तुलना में इस बार राखी बांधने के लिए पहुंचने वाली बहनों की संख्या में साफ कमी दर्ज की गई। रक्षाबंधन को लेकर जिला कारागार प्रशासन ने इस बार भी विशेष मुलाकात व्यवस्था की थी। सुबह सात बजे से ही बहनों का जेल पहुंचना शुरू हो गया था। जेल प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए अलग-अलग बैच में मुलाकात की व्यवस्था की, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। नौ घंटे के दौरान करीब 1600 बहनों ने अपने बंदी भाइयों से मुलाकात की और उनकी कलाई पर राखी बांधी। इस दौरान जेल परिसर में कहीं भाई की कलाई पर राखी बांधती बहन भावुक नजर आई तो कहीं बहन के आंसू पोंछता भाई दिखाई दिया। बंदियों की संख्या घटी, बहनों की भीड़ भी हुई कम
जेल अधिकारियों के मुताबिक, पिछले वर्ष रक्षाबंधन पर जिला कारागार में करीब 2500 बंदी निरुद्ध थे और लगभग 2900 बहने उनसे राखी बांधने के लिए मिलने पहुंची थीं। इस बार बंदियों की संख्या घटकर करीब 1900 रह गई है। यही वजह है कि राखी बांधने आने वाली बहनों की संख्या भी पिछले वर्ष के मुकाबले कम रही। बावजूद इसके सुबह से शाम तक जेल के बाहर काफी संख्या में परिजन मौजूद रहे। बच्चों ने पिता, मामा और चाचा की कलाई पर बांधी राखी
इस बार रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में बच्चे भी अपने पिता, मामा और चाचा से मिलने मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार पहुंचे। नन्हे हाथों से जब बच्चों ने अपनों की कलाई पर राखी बांधी तो माहौल और भावुक हो गया। कई परिवारों के लिए यह मुलाकात सामान्य नहीं, बल्कि लंबे समय बाद अपनों से मिलने का मौका थी। बच्चों को देखकर बंदी भी भावुक हो उठे। राखी नहीं ला पाई तो जेल ने उपलब्ध कराया सामान
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ वीरेश राज शर्मा ने बताया कि रक्षाबंधन पर इस बार मुलाकात की व्यवस्था पिछली बार से भी बेहतर रखी गई। जिन बहनों के पास किसी कारणवश राखी या अन्य जरूरी सामान नहीं था, उन्हें जेल प्रशासन की ओर से निशुल्क राखी समेत अन्य सामान उपलब्ध कराया गया। उद्देश्य यही रहा कि कोई बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने से वंचित न रहे। महिला बंदियों को करना पड़ा इंतजार, मुस्कान से नहीं मिला कोई
जिला कारागार की महिला बैरक में वर्तमान में 64 महिला बंदी हैं। जेल प्रशासन के मुताबिक, महिला बंदियों के लिए मुलाकात का बैच सामान्यत: सबसे आखिर में आता है। यदि उनके भाई या अन्य परिजन मिलने पहुंचते हैं तो उन्हें महिला बंदियों से मुलाकात कराई जाती है। डॉ वीरेश राज शर्मा बताते हैं कि यदि किसी महिला बंदी का कोई भाई नहीं आता और वह राखी बांधने की इच्छा जताती है तो जेल के अधिकारी भी उससे राखी बंधवा सकते हैं। हालांकि इस बार दोपहर तक मुस्कान समेत चार महिला बंदियों से राखी बंधाने के लिए कोई नहीं मिला। जेल रोड पर सामाजिक संगठनों ने संभाली जिम्मेदारी
रक्षाबंधन के मौके पर सामाजिक संगठनों ने भी जिला कारागार के बाहर सेवा शिविर लगाए। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने सुरेंद्र शर्मा के नेतृत्व में बहनों और उनके साथ आए परिजनों के लिए पेय पदार्थ और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई। सुबह से शाम तक जेल आने वाले लोगों को पानी और अन्य खाद्य सामग्री वितरित की गई। इससे लंबी कतार में इंतजार कर रहे लोगों को राहत मिली। अधीक्षक बोले- समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि इस तरह के आयोजन जिला कारागार आने वाले बंदियों को समाज से जोड़े रखने का प्रयास है। जिला कारागार में आने के बाद प्रत्येक बंदी से समान व्यवहार किया जाता है ताकि वह अपने आप को समाज से अलग न समझे। बंदी भाइयों की कलाई पर बंधी राखी के साथ बहनों की आंखों से निकले आंसू और भाइयों की भावुकता ने पूरे दिन जिला कारागार के माहौल को रिश्तों की गर्माहट से भर दिया।

