दबंगों की कब्जेदारी से आजिज महिला ने खुलेआम लगाई फांसी:वाराणसी DM-CP-DCP भी नहीं दिला पाए रास्ता, 14 घंटे से शव को अंतिम संस्कार का इंतजार

दबंगों की कब्जेदारी से आजिज महिला ने खुलेआम लगाई फांसी:वाराणसी DM-CP-DCP भी नहीं दिला पाए रास्ता, 14 घंटे से शव को अंतिम संस्कार का इंतजार

वाराणसी के बड़ागांव अहरक में दबंगों की जमीन कब्जेदारी और घर का रास्ता बंद होने से आजिज महिला ने फांसी लगाकर जान दे दी। घर से बाहर निकलने का रास्ता मांगने के लिए उसने कई दिन अफसरों के चक्कर लगाए लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। डीएम, सीपी और डीसीपी गोमती भी जब रास्ता नहीं दिला पाई तो उसने अफसरों से खुद के मर जाने की बात कही लेकिन किसी ने हालातों को गंभीरता से नहीं लिया। मायूसी के बाद बुधवार रात महिला ने पूर आत्महत्या कर ली। पति ने परिजनों के साथ मिलकर उसे समझाने का प्रयास किया, पड़ोसियों से पत्नी को बचाने की गुहार लगाई लेकिन कोई मदद ना कर सका। इसके बाद उसने पुलिस को सूचना दी, पहले तो पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, बाद में पहुंचकर शव को उतरवाया। शव को गांव के बाहर ले जाने का रास्ता बंद होने के चलते अब 14 घंटे से शव घर के बाहर रखा है, हालात यह है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी महिला के शव का अंतिम संस्कार कराने की कवायद में जुटे हैं लेकिन परिवार रास्ता दिलाने की जिद पर अड़ाहै। बड़ागांव थाना अंतर्गत अहरक गांव निवासी संतोष उपाध्याय का घर गांव के बीच में है और पड़ोसियों ने उसके घर के रास्ते पर कब्जा करके निर्माण कर लिया। इसके बाद उसने कई दफ्तारों के चक्कर लगाए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुआ। कविता उपाध्याय के पति संतोष उपाध्याय दिल्ली की एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। उनका बेटा विशाल उपाध्याय एमए की पढ़ाई कर रहा है। परिवार का कहना है कि स्व. लक्ष्मी नारायण उपाध्याय के चार बेटे संतोष, अजय, अक्षयवर नाथ और केदार नाथ उपाध्याय का परिवार रास्ता न होने के चलते परेशान है। बुधवार शाम संतोष की पत्नी कविता उपाध्याय (50) ने शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद परिजनों ने शव को घर के सामने रख दिया और रास्ते की समस्या का समाधान होने तक अंतिम संस्कार न करने की बात पर अड़े हैं। सूचना मिलने के बाद रात से ही बड़ागांव थाने की पुलिस मौके पर तैनात है। कविता उपाध्याय के बेटे विशाल उपाध्याय ने बताया कि परिवार पिछले करीब दो वर्षों से रास्ते को लेकर परेशान है। रास्ते के विवाद के समाधान के लिए परिवार ने जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी पिंडरा समेत अन्य अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। विशाल का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद रास्ता नहीं मिलने से उनकी मां काफी परेशान थीं। इसी परेशानी के चलते उन्होंने ऐसा कदम उठा लिया। विशाल ने बताया कि बुधवार दोपहर बाद से ही उसकी मां कहीं दिखाई नहीं दे रहीं थीं। परिजन काफी खोजबीन किये और शाम करीब सात बजे जब शौचालय में गए तो वहां पर उनकी मां की लाश शौचालय में फंदे से लटका मिला। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। इसके बाद परिजनों ने शव को घर के सामने रख दिया। परिवार का कहना है कि जब तक रास्ते की समस्या का समाधान नहीं होता है तब तक शव को वहां से नहीं ले जाने दिया जाएगा। 14 घंटे से घर के बाहर रखा शव मृतका के बेटे विशाल और उसके परिजनों ने आरोप लगाया कि नवीन परती की जमीन पर कब्जे को लेकर मनीष उपाध्याय पुत्र स्व. चंद्रिका उपाध्याय से भी विवाद चल रहा है। परिवार का आरोप है कि इसी विवाद के चलते करीब दो वर्षों से रास्ते का मामला लंबित है। परिजनों का कहना है कि रास्ते को लेकर विवाद था, इसी को लेकर आत्महत्या की हैं। ग्रामीणों का कहना है कि महीनों से तहसील और जिलाधिकारी कार्यालय का चक्कर काटने के बाद भी, रास्ता न खुलने से निराश और अवसाद ग्रस्त होकर सविता उपाध्याय ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। गांव में सूचना पर पुलिस बल ततैनात किया गया है। रास्ता नहीं होने के चलते 14घंटे से लाश रोककर परिजन बैठे है। परिवार के लोग बिना न्याय मिले शव का दाह संस्कार करने को तैयार नहीं हैं। मौके पर ग्रामीणों में सरकार और स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है।

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