2 माह से पोर्टल बंद:रांची में 2 माह में 2200 भवनों को वैध करने के आवेदन आए, पास एक भी नहीं

2 माह से पोर्टल बंद:रांची में 2 माह में 2200 भवनों को वैध करने के आवेदन आए, पास एक भी नहीं

राज्यभर में बिना नक्शा बने करीब 7 लाख अनधिकृत भवनों को वैध करने की सरकारी योजना अफसरों की लापरवाही की भेंट चढ़ती दिख रही है। आवेदन जमा हुए दो महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन नगर विकास विभाग ने अब तक नक्शा पास करने के लिए कोई स्पष्ट गाइडलाइन (SOP) जारी नहीं की है। रांची में दो माह के दौरान 2200 भवनों (रांची नगर निगम में 1656 और RRDA में 544) तथा अन्य नगर निकायों में 2300 भवनों को मिलाकर राज्यभर से करीब 4500 आवेदन जमा हुए। विकास विभाग ने आवेदन जमा होने के बाद नक्शा स्वीकृति के लिए गाइडलाइन जारी करने की बात कही थी, लेकिन आवेदन लेने के 2 माह बाद भी विभाग ने अब तक गाइडलाइन जारी नहीं की है। ऐसे में नक्शा नियमित कराने के लिए फीस जमा कर चुके आवेदक अब निगम और RRDA के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। दोनों कार्यालयों में एक ही रटा-रटाया जवाब मिलता है, ‘ऊपर से कोई आदेश नहीं आया है।’ ऐसे में आवेदक जब पूछते हैं कि उनके घर का नक्शा पास होगा या नहीं, इस पर भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है। दूसरी ओर निगम और RRDA के अधिकारियों को भी नगर विकास विभाग से कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं मिली है। इस वजह से वे भी असमंजस की स्थिति में हैं। इस संबंध में दैनिक भास्कर ने नगर विकास के अधिकारी से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। 60 दिन का समय, 17 दिनों बाद बना पोर्टल 27 अप्रैल : अवैध भवनों को नियमित करने की नियमावली अधिसूचित हुई। 60 दिनों के भीतर आवेदन मांगा गया।
14 मई : अधिसूचना के 17 दिन बाद ऑनलाइन पोर्टल शुरू हुआ। जनता को मिले महज 43 दिन मिले।
27 जून : मध्य रात्रि को बिल्डिंग प्लान एप्रूवल मैनेजमेंट सिस्टम (बीपीएएमएस) को बंद कर दिया गया। सिर्फ नक्शा जमा कराया, पास कैसे होगा यह बताया ही नहीं नगर विकास विभाग के टाउन प्लानर को अवैध भवनों को वैध करने के लिए गाइडलाइन जारी करनी थी। लेकिन नक्शा जमा होने के 60 दिनों बाद भी विभाग स्तर से इस संबंध में नगर निकायों को कोई पत्र नहीं भेजा गया। जबकि, अधिसूचना जारी होने के समय से ही इससे संबंधित सवालों के जवाब आर्किटेक्ट द्वारा पूछे जा रहे थे। नगर निकायों के टाउन प्लानर इस मामले में आर्किटेक्ट को जल्द ही गाइडलाइन मिलने का भरोसा देते रहे, इस इंतजार में काफी आर्किटेक्टों ने आवेदन ही जमा नहीं किया। सिस्टम की मार झेल रहे लोग केस 1: ढाई माह से चक्कर काट रहे
मोरहाबादी निवासी रजनीश कुमार के पिता ने बिना पास नक्शे के दो मंजिला मकान बनाया था। योजना के तहत आवेदन किया। पिछले ढाई महीने से निगम जा रहे हैं, पर कोई बताने वाला नहीं कि नक्शा पास होगा या खारिज। केस 2: 2012 में ₹49 हजार डूबे़ॉ सिंह मोड़ निवासी कुंदन कुमार ने वर्ष 2012 में नक्शा पास कराने को ₹49,000 रु. जमा किए थे। न नक्शा पास हुआ, न पैसे लौटे। इस बार फिर आवेदन जमा किया। कुंदन कहते हैं, सिर्फ परेशान किया जा रहा है। एक तरफ वैध करने का भरोसा, दूसरी तरफ अफसर कर रहे केस राज्य सरकार जिस तरह अवैध भवनों को वैध करने की योजना लेकर आई थी, उससे लग रहा था कि काफी भवन वैध हो जाएंगे। लेकिन बात सिर्फ अधिसूचना तक रह गई। निगम और RRDA के अधिकारी अब बिना नक्शा वाले भवनों पर केस कर रहे हैं। ऐसे में आम लोगों के बीच भ्रम और डर की स्थिति बन गई है। इसे दूर करना विभागीय अधिकारियों का काम है। सुजीत भगत, आर्किटेक्ट राज्यभर में बिना नक्शा बने करीब 7 लाख अनधिकृत भवनों को वैध करने की सरकारी योजना अफसरों की लापरवाही की भेंट चढ़ती दिख रही है। आवेदन जमा हुए दो महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन नगर विकास विभाग ने अब तक नक्शा पास करने के लिए कोई स्पष्ट गाइडलाइन (SOP) जारी नहीं की है। रांची में दो माह के दौरान 2200 भवनों (रांची नगर निगम में 1656 और RRDA में 544) तथा अन्य नगर निकायों में 2300 भवनों को मिलाकर राज्यभर से करीब 4500 आवेदन जमा हुए। विकास विभाग ने आवेदन जमा होने के बाद नक्शा स्वीकृति के लिए गाइडलाइन जारी करने की बात कही थी, लेकिन आवेदन लेने के 2 माह बाद भी विभाग ने अब तक गाइडलाइन जारी नहीं की है। ऐसे में नक्शा नियमित कराने के लिए फीस जमा कर चुके आवेदक अब निगम और RRDA के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। दोनों कार्यालयों में एक ही रटा-रटाया जवाब मिलता है, ‘ऊपर से कोई आदेश नहीं आया है।’ ऐसे में आवेदक जब पूछते हैं कि उनके घर का नक्शा पास होगा या नहीं, इस पर भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है। दूसरी ओर निगम और RRDA के अधिकारियों को भी नगर विकास विभाग से कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं मिली है। इस वजह से वे भी असमंजस की स्थिति में हैं। इस संबंध में दैनिक भास्कर ने नगर विकास के अधिकारी से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। 60 दिन का समय, 17 दिनों बाद बना पोर्टल 27 अप्रैल : अवैध भवनों को नियमित करने की नियमावली अधिसूचित हुई। 60 दिनों के भीतर आवेदन मांगा गया।
14 मई : अधिसूचना के 17 दिन बाद ऑनलाइन पोर्टल शुरू हुआ। जनता को मिले महज 43 दिन मिले।
27 जून : मध्य रात्रि को बिल्डिंग प्लान एप्रूवल मैनेजमेंट सिस्टम (बीपीएएमएस) को बंद कर दिया गया। सिर्फ नक्शा जमा कराया, पास कैसे होगा यह बताया ही नहीं नगर विकास विभाग के टाउन प्लानर को अवैध भवनों को वैध करने के लिए गाइडलाइन जारी करनी थी। लेकिन नक्शा जमा होने के 60 दिनों बाद भी विभाग स्तर से इस संबंध में नगर निकायों को कोई पत्र नहीं भेजा गया। जबकि, अधिसूचना जारी होने के समय से ही इससे संबंधित सवालों के जवाब आर्किटेक्ट द्वारा पूछे जा रहे थे। नगर निकायों के टाउन प्लानर इस मामले में आर्किटेक्ट को जल्द ही गाइडलाइन मिलने का भरोसा देते रहे, इस इंतजार में काफी आर्किटेक्टों ने आवेदन ही जमा नहीं किया। सिस्टम की मार झेल रहे लोग केस 1: ढाई माह से चक्कर काट रहे
मोरहाबादी निवासी रजनीश कुमार के पिता ने बिना पास नक्शे के दो मंजिला मकान बनाया था। योजना के तहत आवेदन किया। पिछले ढाई महीने से निगम जा रहे हैं, पर कोई बताने वाला नहीं कि नक्शा पास होगा या खारिज। केस 2: 2012 में ₹49 हजार डूबे़ॉ सिंह मोड़ निवासी कुंदन कुमार ने वर्ष 2012 में नक्शा पास कराने को ₹49,000 रु. जमा किए थे। न नक्शा पास हुआ, न पैसे लौटे। इस बार फिर आवेदन जमा किया। कुंदन कहते हैं, सिर्फ परेशान किया जा रहा है। एक तरफ वैध करने का भरोसा, दूसरी तरफ अफसर कर रहे केस राज्य सरकार जिस तरह अवैध भवनों को वैध करने की योजना लेकर आई थी, उससे लग रहा था कि काफी भवन वैध हो जाएंगे। लेकिन बात सिर्फ अधिसूचना तक रह गई। निगम और RRDA के अधिकारी अब बिना नक्शा वाले भवनों पर केस कर रहे हैं। ऐसे में आम लोगों के बीच भ्रम और डर की स्थिति बन गई है। इसे दूर करना विभागीय अधिकारियों का काम है। सुजीत भगत, आर्किटेक्ट  

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