उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मथुरा में 6 दिसंबर 2026 को महाशौर्य दिवस का ऐलान किया गया है। मथुरा के चित्रगुप्त पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज ने कहा है कि 6 दिसंबर को शाही ईदगाह मस्जिद का विध्वंस किया जाएगा और इस दिन ‘शौर्य दिवस’ के बजाय ‘महाशौर्य दिवस’ मनाया जाएगा। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर ने भोजपुर के रहने वाले ब्रह्मलीन संत श्री देवराहा बाबाजी महाराज के परम शिष्य संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज के सानिध्य में 23 अगस्त को इसकी घोषणा की। पीठाधीश्वर ओर से कहा गया है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह से जुड़ा मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण आगे की स्थिति कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी। उन्होंने ये भी कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट को चार महीने का समय दिया गया है। दावा किया गया है कि अगर इस अवधि में कोर्ट का फैसला नहीं आता है तो 16 नवंबर को छठ पूजा के बाद देशभर के हिंदू संगठनों और श्रीकृष्ण के लाखों भक्तों के मथुरा कूच करेंगे। भक्तों को मथुरा पहुंचाने और उन्हें संगठित करने के लिए अलग-अलग हिंदू संगठनों को जिम्मेदारी सौंपने की बात कही गई है। शुरुआती दौर में मथुरा पहुंचने वाले भक्तों के ठहरने की व्यवस्था पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज की ओर से पीठ समेत अन्य स्थानों पर किए जाने की योजना है। संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज 22 अगस्त को बिहार से मथुरा पहुंचे और संतों तथा हिंदू संगठनों के साथ बैठक कर अभियान को लेकर दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने ‘अयोध्या तो झांकी है, मथुरा-काशी अभी बाकी है’ का नारा भी दिया। सितंबर से देशभर में घूमेगी शिला और अखंड दीप पीठाधीश्वर की ओर से जानकारी दी गई कि देशभर में सितंबर से शिला (आधारशिला) और अखंड दीप का भ्रमण कराने की योजना बनाई गई है। भक्त अखंड दीप से अपने घरों में दीप जलाएंगे। यह दीप मंदिर निर्माण के लिए शिला (आधारशिला) रखे जाने तक जलता रहेगा। इसके बाद अखंड दीप को प्रस्तावित मंदिर में स्थापित करने की बात कही गई है। संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि वो पवित्र स्थान है जहां द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। यहां राजा कंस का कारागार था। जहां उसने अपनी बहन देवकी और कृष्ण के पिता वासुदेव को कैद किया था। जन्म के समय चमत्कारी रूप से सभी पहरेदार सो गए और कारागार के ताले खुल गए। वासुदेव, कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना नदी पार और उन्हें गोकुल में यशोदा–नन्द के पास सुरक्षित पहुंचा दिया। शिवनाथ जी महाराज ने बताया कि इस स्थान पर केशवदेव मंदिर था, जिसे समय–समय अतिक्रमणकारियों ने तोड़ा। 1669–70 ईस्वी में युगल मुगल शासक औरंगजेब ने यहां मंदिर को तुड़वाकर शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण करवाया था। इसके बाद 1770 के आसपास गोवर्धन में मुगलों और मराठाओं में जंग हुई। मराठाओं के जीत के बाद मंदिर का निर्माण कराया। 1935 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 13.37 एकड़ जमीन की भूमि बनारस के राजा कृष्ण दास को आवंटित कर दी थी। शिवनाथ जी महाराज ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है। एक हिंदू और दूसरा मुस्लमान पक्ष है। 6 दिसंबर को हिंदू संगठन और श्रीकृष्ण के भक्त विध्वंस करके पुनः मंदिर का निर्माण करेंगे। 23 अगस्त को उन्होंने कहा कि मथुरा में हमारी चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज समेत अन्य हिन्दू संगठन से बात हुई है। 6 दिसंबर को मस्जिद टूटने पर रणनीति बनाई गई, पूरे भारतवर्ष से लोग मथुरा पहुंचेंगे। अगर कोर्ट हमारी मांग को मान लेती है तो ठीक, नहीं तो शौर्य दिवस के अवसर पर अयोध्या के बाद मथुरा में भी मस्जिद टूटेगा। स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त बोले- कई साल से हमलोगों ने कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा की है पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज ने बताया कि श्रीराम लला के बाद अब श्रीकृष्ण लला को भी उस स्थान से मुक्त किया जाए जो औरंगजेब के कार्यकाल से कलंक के रूप में गुम्बद स्थापित किया गया था। गुम्बद धराशायी करने का सबका सपना अब साकार होने जा रहा है। हमने जब इसकी घोषणा की उसके बाद से पूरे देश से आपार समर्थन मिल रहा है। अलग–अलग राज्य के साधु–संत, अखाड़ा परिषद समेत अन्य हिन्दू संगठनों का समर्थन मिल रहा है। इसके साथ बिहार के संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज का भी समर्थन मिला है। स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त ने बताया कि हमने कई सालों से न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा की है। बार–बार पूजा स्थल अधिनियम 1991 का हवाला देकर हम लोगों को गुमराह किया जा रहा है। ये कानून सनातनी विरोधी है। इस काले कानून का सहारा लेकर मामले को खींचा जा रहा है। कोर्ट के अंदर अपराधियों को जिस गीता की शपथ दिलाई जाती है, उसे भगवान श्रीकृष्ण ने लिखा था। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का निर्णय क्या कोर्ट करेगी। कोर्ट को निर्णय करना होता, अगर उनके मन में वास्तव में भावना आई होती कि हम भगवान के लिए कार्य कर रहे हैं, तो अबतक निर्णय आ गया होता। अगर कोर्ट चाहता है कि इस प्रकार का गुम्बद धराशायी का कार्य ना हो, तो कोर्ट के पास अभी भी चार महीने का समय है। समय के अन्दर कोर्ट अपना फैसला दे, खुद मस्जिद के गुम्बद को गिराए, क्योंकि दूसरे पक्ष के पास कोई साक्ष्य नहीं है, ये स्थान कृष्ण जन्मभूमि का था और हमेशा रहेगा। ‘हिंदू पक्ष पहुंचता है, लेकिन मुस्लिम पक्ष लगातार भाग रहा है’ स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज ने बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से निर्णय किया गया कि जिला न्यायालय में दोनों पक्ष आपस में समाधान कर ले। कोर्ट में हिंदू पक्ष पहुंचता है, लेकिन मुस्लमान पक्ष नहीं आता, क्योंकि उनके पास कोई साक्ष्य नहीं है। उनके पास एक बैसाखी के तौर पर एक्ट 1991 टूट गई, क्योंकि हमने राष्ट्रपति, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को एक ज्ञापन दिया था। हमने लिखा था कि यहां पूजा स्थल अधिनियम 1991 लागू नहीं होता है, क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर गुम्बद बनाया गया है। उन्होंने कहा कि परमपूज्य संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज ने 2024 में भविष्यवाणी की थी कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि को संतों की ओर से मुक्त कराया जाएगा। वो अब सच होने जा रहा है। 6 दिसंबर को करोड़ों की संख्या में चारों दिशाओं से भक्त मथुरा पहुंचेंगे। चित्रगुप्त पीठ के महामंडलेश्वर बोले- राम के समय में शौर्य दिवस था, यहां महाशौर्य दिवस होगा चित्रगुप्त पीठ के महामण्डलेश्वर सुरेश आनंद जी महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए 6 दिसंबर को कितने लोग पहुंचे इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। बिहार से चलकर 95 वर्षीय परमपूज्य संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज अपने शिष्यों के साथ मथुरा पहुंचे। उहोंने भविष्यवाणी की थी कि कृष्ण जन्मभूमि का उद्धार और निर्माण संतों की ओर से किया जाएगा। आज योगी सरकार है, उनकी भविष्यवाणी का योग इस सरकार में बना है। उन्होंने कहा कि पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज की ओर से 6 दिसंबर को जो आह्वान किया गया है। राम के समय में शौर्य दिवस था, यहां महाशौर्य दिवस होगा। उस समय कृष्णजन्म भूमि के कारागारों के ऊपर जो अवैध रूप से मलेच्छो की ओर से मस्जिद का निर्माण किया गया था। उन्होंने कहा कि मथुरा में निश्चितरूप से मस्जिद धराशायी होगी और मंदिर का दोबारा निर्माण होगा। महामंडलेश्वर ने कहा कि डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज ने कोर्ट को चार महीने का समय दिया है। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के लिए कोर्ट रात में भी खुल सकती है। हिंदुओं के देश में मथुरा के लिए कोर्ट जल्द अपना फैसला सुनाए। अगर कोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में आता है तो सेवकों को मस्जिद के गुंबद को गिराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर कोर्ट का फैसला भक्तों के पक्ष में नहीं आता है तो संतों की ओर से 6 दिसंबर को मस्जिद धराशायी होगी। सुप्रीम कोर्ट के वकील बोले- 1670 से हिंदू अपने मन को मारकर रुके हुए हैं सुप्रीम कोर्ट के वकील सागर आनंद ने बताया कि साल 2020 में श्रीकृष्ण की भक्त रंजना अग्निहोत्री ने सिविल जज, सीनियर डिवीजन के सिविल कोर्ट, मथुरा में अपील की। जहां से उनकी अपील को कोर्ट ने लीगल पोजिशन का हवाला देते हुए खारिज कर दिया। फिर उन्होंने डिस्ट्रिक्ट जज के पास अपील की। उसके बाद कोर्ट ने ये कहते हुए एक्सेप्ट किया कि भगवान श्रीकृष्ण के भक्त वाद्यमित्र बन सकते हैं। सागर आनंद ने बताया कि उसी दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले को अपने पास बुला लिया। इस मामले के साथ–साथ 17 और मामलों को एक साथ कर दिया गया। उसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि इसमें पूजा स्थल अधिनियम 1991 लागू नहीं होगा। एडवोकेट कमिश्नर को विडियोग्राफी कराने के लिए नियुक्त किया इलाहाबाद कोर्ट ने एक बार एडवोकेट कमिश्नर को विडियोग्राफी कराने के लिए नियुक्त किया गया। ताकि कोर्ट को पता चल पाए कि जो दावा किया जा रहा है उसमें कितनी सच्चाई है। उसमें भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट का उद्देश्य ये है कि न्यायिक प्रक्रिया का फायदा उठाकर जितना दिन इस केस को खींच सके। उन्होंने कहा कि 1670 से हिंदू अपने मन को मारकर रुके हुए हैं। ‘राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी दिया जाएगा’ सागर आनंद ने कहा कि संविधान के तहत हमलोग चल रहे हैं। रामलला का केस लड़ रहे थे, कृष्णलला के लिए भी केस लड़ रहे हैं। सभी केसों का स्टेट्स क्लियर नहीं है। हिंदू पक्ष ने भारत सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को पार्टी बनाया, जिसका मुस्लिम पक्ष ने विरोध किया। सागर आनंद ने बताया कि हमलोग एक पिटिशन फाइल करेंगे, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी दिया जाएगा। इस केस की समय सीमा तय करके सुनवाई की जाए। छह सालों में केस एक इंच आगे नहीं बढ़ा है। मुस्लिम पक्ष से जो भी बातचीत हो रही है, वो विफल हो रही है, क्योंकि उनका इंटेंशन क्लियर नहीं है। 6 दिसंबर को जो आह्वान की गई है, वो न्यायलय पर भरोसा न होने की निशानी है, हिंदुओं पर शोषण अब संत नहीं बर्दाश्त करेंगे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अन्य मुख्य आदेश कोर्ट कमिश्नर सर्वे आदेश (दिसंबर 2023): इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद परिसर के भीतर वैज्ञानिक और भौतिक निरीक्षण के लिए 3 सदस्यीय वकील कमिश्वरों के पैनल का गठन करने का आदेश दिया था। हिंदू पक्ष का दावा है कि वहां कमल के खंभे और शेषनाग की आकृतियां मौजूद हैं। मुख्य/प्रतिनिधि मुकदमा घोषित करना (जुलाई 2025): हाईकोर्ट ने ओरिजिनल सूट नंबर 17/2023 को सभी कृष्ण भक्तों की तरफ से प्रतिनिधित्व करने वाला मुख्य (Lead) मुकदमा घोषित किया। नामकरण पर रोक (4 जुलाई 2025): हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें अदालती दस्तावेजों में शाही ईदगाह मस्जिद को ‘विवादित ढांचा’ लिखने की मांग की गई थी। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मथुरा में 6 दिसंबर 2026 को महाशौर्य दिवस का ऐलान किया गया है। मथुरा के चित्रगुप्त पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज ने कहा है कि 6 दिसंबर को शाही ईदगाह मस्जिद का विध्वंस किया जाएगा और इस दिन ‘शौर्य दिवस’ के बजाय ‘महाशौर्य दिवस’ मनाया जाएगा। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर ने भोजपुर के रहने वाले ब्रह्मलीन संत श्री देवराहा बाबाजी महाराज के परम शिष्य संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज के सानिध्य में 23 अगस्त को इसकी घोषणा की। पीठाधीश्वर ओर से कहा गया है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह से जुड़ा मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण आगे की स्थिति कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी। उन्होंने ये भी कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट को चार महीने का समय दिया गया है। दावा किया गया है कि अगर इस अवधि में कोर्ट का फैसला नहीं आता है तो 16 नवंबर को छठ पूजा के बाद देशभर के हिंदू संगठनों और श्रीकृष्ण के लाखों भक्तों के मथुरा कूच करेंगे। भक्तों को मथुरा पहुंचाने और उन्हें संगठित करने के लिए अलग-अलग हिंदू संगठनों को जिम्मेदारी सौंपने की बात कही गई है। शुरुआती दौर में मथुरा पहुंचने वाले भक्तों के ठहरने की व्यवस्था पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज की ओर से पीठ समेत अन्य स्थानों पर किए जाने की योजना है। संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज 22 अगस्त को बिहार से मथुरा पहुंचे और संतों तथा हिंदू संगठनों के साथ बैठक कर अभियान को लेकर दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने ‘अयोध्या तो झांकी है, मथुरा-काशी अभी बाकी है’ का नारा भी दिया। सितंबर से देशभर में घूमेगी शिला और अखंड दीप पीठाधीश्वर की ओर से जानकारी दी गई कि देशभर में सितंबर से शिला (आधारशिला) और अखंड दीप का भ्रमण कराने की योजना बनाई गई है। भक्त अखंड दीप से अपने घरों में दीप जलाएंगे। यह दीप मंदिर निर्माण के लिए शिला (आधारशिला) रखे जाने तक जलता रहेगा। इसके बाद अखंड दीप को प्रस्तावित मंदिर में स्थापित करने की बात कही गई है। संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि वो पवित्र स्थान है जहां द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। यहां राजा कंस का कारागार था। जहां उसने अपनी बहन देवकी और कृष्ण के पिता वासुदेव को कैद किया था। जन्म के समय चमत्कारी रूप से सभी पहरेदार सो गए और कारागार के ताले खुल गए। वासुदेव, कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना नदी पार और उन्हें गोकुल में यशोदा–नन्द के पास सुरक्षित पहुंचा दिया। शिवनाथ जी महाराज ने बताया कि इस स्थान पर केशवदेव मंदिर था, जिसे समय–समय अतिक्रमणकारियों ने तोड़ा। 1669–70 ईस्वी में युगल मुगल शासक औरंगजेब ने यहां मंदिर को तुड़वाकर शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण करवाया था। इसके बाद 1770 के आसपास गोवर्धन में मुगलों और मराठाओं में जंग हुई। मराठाओं के जीत के बाद मंदिर का निर्माण कराया। 1935 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 13.37 एकड़ जमीन की भूमि बनारस के राजा कृष्ण दास को आवंटित कर दी थी। शिवनाथ जी महाराज ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है। एक हिंदू और दूसरा मुस्लमान पक्ष है। 6 दिसंबर को हिंदू संगठन और श्रीकृष्ण के भक्त विध्वंस करके पुनः मंदिर का निर्माण करेंगे। 23 अगस्त को उन्होंने कहा कि मथुरा में हमारी चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज समेत अन्य हिन्दू संगठन से बात हुई है। 6 दिसंबर को मस्जिद टूटने पर रणनीति बनाई गई, पूरे भारतवर्ष से लोग मथुरा पहुंचेंगे। अगर कोर्ट हमारी मांग को मान लेती है तो ठीक, नहीं तो शौर्य दिवस के अवसर पर अयोध्या के बाद मथुरा में भी मस्जिद टूटेगा। स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त बोले- कई साल से हमलोगों ने कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा की है पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज ने बताया कि श्रीराम लला के बाद अब श्रीकृष्ण लला को भी उस स्थान से मुक्त किया जाए जो औरंगजेब के कार्यकाल से कलंक के रूप में गुम्बद स्थापित किया गया था। गुम्बद धराशायी करने का सबका सपना अब साकार होने जा रहा है। हमने जब इसकी घोषणा की उसके बाद से पूरे देश से आपार समर्थन मिल रहा है। अलग–अलग राज्य के साधु–संत, अखाड़ा परिषद समेत अन्य हिन्दू संगठनों का समर्थन मिल रहा है। इसके साथ बिहार के संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज का भी समर्थन मिला है। स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त ने बताया कि हमने कई सालों से न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा की है। बार–बार पूजा स्थल अधिनियम 1991 का हवाला देकर हम लोगों को गुमराह किया जा रहा है। ये कानून सनातनी विरोधी है। इस काले कानून का सहारा लेकर मामले को खींचा जा रहा है। कोर्ट के अंदर अपराधियों को जिस गीता की शपथ दिलाई जाती है, उसे भगवान श्रीकृष्ण ने लिखा था। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का निर्णय क्या कोर्ट करेगी। कोर्ट को निर्णय करना होता, अगर उनके मन में वास्तव में भावना आई होती कि हम भगवान के लिए कार्य कर रहे हैं, तो अबतक निर्णय आ गया होता। अगर कोर्ट चाहता है कि इस प्रकार का गुम्बद धराशायी का कार्य ना हो, तो कोर्ट के पास अभी भी चार महीने का समय है। समय के अन्दर कोर्ट अपना फैसला दे, खुद मस्जिद के गुम्बद को गिराए, क्योंकि दूसरे पक्ष के पास कोई साक्ष्य नहीं है, ये स्थान कृष्ण जन्मभूमि का था और हमेशा रहेगा। ‘हिंदू पक्ष पहुंचता है, लेकिन मुस्लिम पक्ष लगातार भाग रहा है’ स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज ने बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से निर्णय किया गया कि जिला न्यायालय में दोनों पक्ष आपस में समाधान कर ले। कोर्ट में हिंदू पक्ष पहुंचता है, लेकिन मुस्लमान पक्ष नहीं आता, क्योंकि उनके पास कोई साक्ष्य नहीं है। उनके पास एक बैसाखी के तौर पर एक्ट 1991 टूट गई, क्योंकि हमने राष्ट्रपति, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को एक ज्ञापन दिया था। हमने लिखा था कि यहां पूजा स्थल अधिनियम 1991 लागू नहीं होता है, क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर गुम्बद बनाया गया है। उन्होंने कहा कि परमपूज्य संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज ने 2024 में भविष्यवाणी की थी कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि को संतों की ओर से मुक्त कराया जाएगा। वो अब सच होने जा रहा है। 6 दिसंबर को करोड़ों की संख्या में चारों दिशाओं से भक्त मथुरा पहुंचेंगे। चित्रगुप्त पीठ के महामंडलेश्वर बोले- राम के समय में शौर्य दिवस था, यहां महाशौर्य दिवस होगा चित्रगुप्त पीठ के महामण्डलेश्वर सुरेश आनंद जी महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए 6 दिसंबर को कितने लोग पहुंचे इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। बिहार से चलकर 95 वर्षीय परमपूज्य संतश्री देवराहा शिवनाथ जी महाराज अपने शिष्यों के साथ मथुरा पहुंचे। उहोंने भविष्यवाणी की थी कि कृष्ण जन्मभूमि का उद्धार और निर्माण संतों की ओर से किया जाएगा। आज योगी सरकार है, उनकी भविष्यवाणी का योग इस सरकार में बना है। उन्होंने कहा कि पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज की ओर से 6 दिसंबर को जो आह्वान किया गया है। राम के समय में शौर्य दिवस था, यहां महाशौर्य दिवस होगा। उस समय कृष्णजन्म भूमि के कारागारों के ऊपर जो अवैध रूप से मलेच्छो की ओर से मस्जिद का निर्माण किया गया था। उन्होंने कहा कि मथुरा में निश्चितरूप से मस्जिद धराशायी होगी और मंदिर का दोबारा निर्माण होगा। महामंडलेश्वर ने कहा कि डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज ने कोर्ट को चार महीने का समय दिया है। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के लिए कोर्ट रात में भी खुल सकती है। हिंदुओं के देश में मथुरा के लिए कोर्ट जल्द अपना फैसला सुनाए। अगर कोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में आता है तो सेवकों को मस्जिद के गुंबद को गिराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर कोर्ट का फैसला भक्तों के पक्ष में नहीं आता है तो संतों की ओर से 6 दिसंबर को मस्जिद धराशायी होगी। सुप्रीम कोर्ट के वकील बोले- 1670 से हिंदू अपने मन को मारकर रुके हुए हैं सुप्रीम कोर्ट के वकील सागर आनंद ने बताया कि साल 2020 में श्रीकृष्ण की भक्त रंजना अग्निहोत्री ने सिविल जज, सीनियर डिवीजन के सिविल कोर्ट, मथुरा में अपील की। जहां से उनकी अपील को कोर्ट ने लीगल पोजिशन का हवाला देते हुए खारिज कर दिया। फिर उन्होंने डिस्ट्रिक्ट जज के पास अपील की। उसके बाद कोर्ट ने ये कहते हुए एक्सेप्ट किया कि भगवान श्रीकृष्ण के भक्त वाद्यमित्र बन सकते हैं। सागर आनंद ने बताया कि उसी दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले को अपने पास बुला लिया। इस मामले के साथ–साथ 17 और मामलों को एक साथ कर दिया गया। उसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि इसमें पूजा स्थल अधिनियम 1991 लागू नहीं होगा। एडवोकेट कमिश्नर को विडियोग्राफी कराने के लिए नियुक्त किया इलाहाबाद कोर्ट ने एक बार एडवोकेट कमिश्नर को विडियोग्राफी कराने के लिए नियुक्त किया गया। ताकि कोर्ट को पता चल पाए कि जो दावा किया जा रहा है उसमें कितनी सच्चाई है। उसमें भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट का उद्देश्य ये है कि न्यायिक प्रक्रिया का फायदा उठाकर जितना दिन इस केस को खींच सके। उन्होंने कहा कि 1670 से हिंदू अपने मन को मारकर रुके हुए हैं। ‘राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी दिया जाएगा’ सागर आनंद ने कहा कि संविधान के तहत हमलोग चल रहे हैं। रामलला का केस लड़ रहे थे, कृष्णलला के लिए भी केस लड़ रहे हैं। सभी केसों का स्टेट्स क्लियर नहीं है। हिंदू पक्ष ने भारत सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को पार्टी बनाया, जिसका मुस्लिम पक्ष ने विरोध किया। सागर आनंद ने बताया कि हमलोग एक पिटिशन फाइल करेंगे, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी दिया जाएगा। इस केस की समय सीमा तय करके सुनवाई की जाए। छह सालों में केस एक इंच आगे नहीं बढ़ा है। मुस्लिम पक्ष से जो भी बातचीत हो रही है, वो विफल हो रही है, क्योंकि उनका इंटेंशन क्लियर नहीं है। 6 दिसंबर को जो आह्वान की गई है, वो न्यायलय पर भरोसा न होने की निशानी है, हिंदुओं पर शोषण अब संत नहीं बर्दाश्त करेंगे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अन्य मुख्य आदेश कोर्ट कमिश्नर सर्वे आदेश (दिसंबर 2023): इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद परिसर के भीतर वैज्ञानिक और भौतिक निरीक्षण के लिए 3 सदस्यीय वकील कमिश्वरों के पैनल का गठन करने का आदेश दिया था। हिंदू पक्ष का दावा है कि वहां कमल के खंभे और शेषनाग की आकृतियां मौजूद हैं। मुख्य/प्रतिनिधि मुकदमा घोषित करना (जुलाई 2025): हाईकोर्ट ने ओरिजिनल सूट नंबर 17/2023 को सभी कृष्ण भक्तों की तरफ से प्रतिनिधित्व करने वाला मुख्य (Lead) मुकदमा घोषित किया। नामकरण पर रोक (4 जुलाई 2025): हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें अदालती दस्तावेजों में शाही ईदगाह मस्जिद को ‘विवादित ढांचा’ लिखने की मांग की गई थी।

