सीतापुर के पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के यौमे पैदाइश (ईद-मिलाद-उन-नबी) का त्योहार बुधवार को शहर में अकीदत और अदब के साथ मनाया गया। दोपहर करीब 4 बजे पुराने शहर का इलाका नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर और ‘सरकार की आमद मरहबा’ के नारों से गूंज उठा। घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों को रंग-बिरंगी रोशनी, झालरों और इस्लामी झंडों से सजाया गया। जगह-जगह बनाए गए सजावटी गेट और रोशनी से पूरा पुराना शहर दुल्हन की तरह सजा नजर आया। जुलूस-ए-मोहम्मदी में शामिल हुए सैकड़ों अकीदतमंद त्योहार का मुख्य आकर्षण जोहर की नमाज के बाद निकाला गया पारंपरिक जुलूस-ए-मोहम्मदी रहा। जुलूस से पहले कल्लू पहलवान के आवास पर फातिहाख्वानी कर मुल्क की तरक्की और अमन-चैन के लिए दुआ की गई। इसके बाद मरकजी कमेटी के जनरल सेक्रेटरी इकबाल अहमद के नेतृत्व में पक्के पुल से जुलूस शुरू हुआ।
नात-ए-पाक और नारों से गूंजता रहा शहर जुलूस पुराने शहर के कोर्ट चौराहे से होते हुए निर्धारित मार्गों से गुजरा। करीब पांच घंटे तक चले जुलूस में सैकड़ों अंजुमनों के उलेमा और अकीदतमंद शामिल हुए। नात-ए-पाक और धार्मिक नारों से माहौल गूंजता रहा। हाथों में इस्लामी परचम लिए बच्चे और उत्साहित युवा आकर्षण का केंद्र रहे। सजे-धजे ऊंट, घोड़े और रंगीन रोशनी से सजाए गए वाहन भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। युवाओं और अकीदतमंदों ने अपने दोपहिया और चार पहिया वाहनों को भी रंग-बिरंगी लाइटों से सजाकर जुलूस में शामिल किया। सबील लगाकर जुलूस का स्वागत किया शहरवासियों ने जगह-जगह जुलूस का स्वागत किया। लोगों ने ठंडे पानी और खाने-पीने की सबीलें लगाईं। देर शाम जुलूस कजियारे चौराहे पहुंचा, जहां जलसा आयोजित किया गया। उलेमा-ए-किराम ने देश में अमन, भाईचारे और तरक्की के लिए सामूहिक दुआ कराई। इसके बाद जुलूस और जलसा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मरकजी कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।

