औरंगाबाद सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार तो किया गया है, लेकिन पर्याप्त डॉक्टर और तकनीकी कर्मी उपलब्ध नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण सेवाओं का मरीजों को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका सबसे अधिक असर अल्ट्रासाउंड जांच सेवा पर देखने को मिल रहा है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त रहने से यह सुविधा सीमित होकर रह गई है। इसके कारण मरीजों को जांच के लिए निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है। वर्तमान में प्रतिदिन महज चार से पांच अल्ट्रासाउंड ही किए जा रहे हैं। यह सुविधा मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। पेट संबंधी बीमारी, किडनी, लिवर, पित्त की थैली समेत अन्य चिकित्सकीय जरूरतों के लिए अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी जांच केंद्रों में अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। दो माह पहले हुई बहाली, चिकित्सक ने नहीं दिया योगदान जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल में गाइनकोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट दोनों के पद लंबे समय से रिक्त थे। गाइनकोलॉजिस्ट के पद पर अब नियुक्ति हो चुकी है, जिससे महिला मरीजों को कुछ राहत मिली है। वहीं रेडियोलॉजिस्ट के पद पर करीब दो माह पहले बहाली की प्रक्रिया पूरी हुई थी। संबंधित चिकित्सक की नियुक्ति होने के बावजूद उन्होंने अब तक अस्पताल में योगदान नहीं दिया है। इसके कारण पद दोबारा रिक्त स्थिति में बना हुआ है। अस्पताल में मशीन और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में पूरी क्षमता से अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो पा रही है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद उसका लाभ नहीं मिलना परेशानी का कारण है। खासकर गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निजी केंद्रों में जांच कराने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। विभाग को भेजा गया पत्र कर्मियों की कमी का असर सिर्फ अल्ट्रासाउंड सेवा पर ही नहीं है। लाखों रुपए की लागत से उपलब्ध कराई गई सी-आर्म मशीन का भी पर्याप्त उपयोग नहीं हो पा रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सक और तकनीकी कर्मियों की कमी के कारण आधुनिक उपकरण होने के बावजूद मरीजों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। इससे अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर भी सवाल उठ रहे हैं। इधर, रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति और अस्पताल में पद भरने को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से विभाग को पत्र लिखा गया है। अस्पताल प्रबंधक प्रफुल्लकांत निराला ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त है। पद पर नियुक्ति को लेकर विभाग को पत्र भेजा गया है। चिकित्सक के योगदान करते ही अल्ट्रासाउंड सेवा को पूरी तरह शुरू किया जाएगा। मरीजों की सुविधा को लेकर अस्पताल प्रशासन गंभीर है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए परेशानी नहीं हो, इसके लिए उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से सेवा जारी रखी जा रही है। अस्पताल में कर्मियों की कमी के कारण प्रभावित अन्य सुविधाओं को भी जल्द शुरू कराने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। औरंगाबाद सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार तो किया गया है, लेकिन पर्याप्त डॉक्टर और तकनीकी कर्मी उपलब्ध नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण सेवाओं का मरीजों को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका सबसे अधिक असर अल्ट्रासाउंड जांच सेवा पर देखने को मिल रहा है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त रहने से यह सुविधा सीमित होकर रह गई है। इसके कारण मरीजों को जांच के लिए निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है। वर्तमान में प्रतिदिन महज चार से पांच अल्ट्रासाउंड ही किए जा रहे हैं। यह सुविधा मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। पेट संबंधी बीमारी, किडनी, लिवर, पित्त की थैली समेत अन्य चिकित्सकीय जरूरतों के लिए अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी जांच केंद्रों में अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। दो माह पहले हुई बहाली, चिकित्सक ने नहीं दिया योगदान जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल में गाइनकोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट दोनों के पद लंबे समय से रिक्त थे। गाइनकोलॉजिस्ट के पद पर अब नियुक्ति हो चुकी है, जिससे महिला मरीजों को कुछ राहत मिली है। वहीं रेडियोलॉजिस्ट के पद पर करीब दो माह पहले बहाली की प्रक्रिया पूरी हुई थी। संबंधित चिकित्सक की नियुक्ति होने के बावजूद उन्होंने अब तक अस्पताल में योगदान नहीं दिया है। इसके कारण पद दोबारा रिक्त स्थिति में बना हुआ है। अस्पताल में मशीन और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में पूरी क्षमता से अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो पा रही है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद उसका लाभ नहीं मिलना परेशानी का कारण है। खासकर गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निजी केंद्रों में जांच कराने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। विभाग को भेजा गया पत्र कर्मियों की कमी का असर सिर्फ अल्ट्रासाउंड सेवा पर ही नहीं है। लाखों रुपए की लागत से उपलब्ध कराई गई सी-आर्म मशीन का भी पर्याप्त उपयोग नहीं हो पा रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सक और तकनीकी कर्मियों की कमी के कारण आधुनिक उपकरण होने के बावजूद मरीजों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। इससे अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर भी सवाल उठ रहे हैं। इधर, रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति और अस्पताल में पद भरने को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से विभाग को पत्र लिखा गया है। अस्पताल प्रबंधक प्रफुल्लकांत निराला ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त है। पद पर नियुक्ति को लेकर विभाग को पत्र भेजा गया है। चिकित्सक के योगदान करते ही अल्ट्रासाउंड सेवा को पूरी तरह शुरू किया जाएगा। मरीजों की सुविधा को लेकर अस्पताल प्रशासन गंभीर है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए परेशानी नहीं हो, इसके लिए उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से सेवा जारी रखी जा रही है। अस्पताल में कर्मियों की कमी के कारण प्रभावित अन्य सुविधाओं को भी जल्द शुरू कराने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।

