सीवान के जीरादेई प्रखंड के भैंसाखाल स्थित बालगृह में मंगलवार सुबह एक 24 वर्षीय युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान पप्पू कुमार के रूप में हुई है, जो छपरा जिले का रहने वाला बताया जाता है। बताया जा रहा है कि पप्पू लंबे समय से मानसिक बीमारी से जूझ रहा था और उसका पटना के पीएमसीएच में कई बार इलाज कराया गया था। पटना से सीवान बालगृह में किया गया था स्थानांतरण जानकारी के अनुसार, भैंसाखाल में बालगृह का निर्माण होने के बाद पप्पू कुमार को पटना स्थित बालगृह से सीवान स्थानांतरित किया गया था। बालगृह के सहायक निदेशक रूपेश कुमार ने बताया कि पप्पू मानसिक रूप से बीमार था। करीब तीन दिन पहले भी उसकी तबीयत खराब हुई थी, जिसके बाद उसे सदर अस्पताल में दिखाया गया था। अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में मौत सोमवार रात अचानक पप्पू की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। इसके बाद बालगृह के कर्मचारी उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर रवाना हुए, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। मंगलवार सुबह शव को सीवान सदर अस्पताल लाया गया, जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही थी। 18 साल से अधिक उम्र होने के बावजूद बालगृह में था सहायक निदेशक के अनुसार, पप्पू की उम्र 18 वर्ष से अधिक थी। नियमानुसार बालगृह में 18 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को रखने का प्रावधान है। हालांकि, पप्पू की मानसिक बीमारी और उसके लिए अन्य उपयुक्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे बालगृह में रखा गया था। परिजनों की पहचान बनी बड़ी चुनौती पप्पू की मौत के बाद विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके परिजनों की पहचान और उनके ठिकाने का पता लगाना है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल विभाग के पास उसके परिवार से जुड़ी कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। परिजनों का पता लगाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि शव को नियमानुसार परिवार तक पहुंचाया जा सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगी मौत की वजह समाचार लिखे जाने तक पप्पू कुमार का शव सीवान सदर अस्पताल में रखा हुआ था और पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जा रही थी। उसकी मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। सीवान के जीरादेई प्रखंड के भैंसाखाल स्थित बालगृह में मंगलवार सुबह एक 24 वर्षीय युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान पप्पू कुमार के रूप में हुई है, जो छपरा जिले का रहने वाला बताया जाता है। बताया जा रहा है कि पप्पू लंबे समय से मानसिक बीमारी से जूझ रहा था और उसका पटना के पीएमसीएच में कई बार इलाज कराया गया था। पटना से सीवान बालगृह में किया गया था स्थानांतरण जानकारी के अनुसार, भैंसाखाल में बालगृह का निर्माण होने के बाद पप्पू कुमार को पटना स्थित बालगृह से सीवान स्थानांतरित किया गया था। बालगृह के सहायक निदेशक रूपेश कुमार ने बताया कि पप्पू मानसिक रूप से बीमार था। करीब तीन दिन पहले भी उसकी तबीयत खराब हुई थी, जिसके बाद उसे सदर अस्पताल में दिखाया गया था। अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में मौत सोमवार रात अचानक पप्पू की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। इसके बाद बालगृह के कर्मचारी उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर रवाना हुए, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। मंगलवार सुबह शव को सीवान सदर अस्पताल लाया गया, जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही थी। 18 साल से अधिक उम्र होने के बावजूद बालगृह में था सहायक निदेशक के अनुसार, पप्पू की उम्र 18 वर्ष से अधिक थी। नियमानुसार बालगृह में 18 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को रखने का प्रावधान है। हालांकि, पप्पू की मानसिक बीमारी और उसके लिए अन्य उपयुक्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे बालगृह में रखा गया था। परिजनों की पहचान बनी बड़ी चुनौती पप्पू की मौत के बाद विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके परिजनों की पहचान और उनके ठिकाने का पता लगाना है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल विभाग के पास उसके परिवार से जुड़ी कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। परिजनों का पता लगाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि शव को नियमानुसार परिवार तक पहुंचाया जा सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगी मौत की वजह समाचार लिखे जाने तक पप्पू कुमार का शव सीवान सदर अस्पताल में रखा हुआ था और पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जा रही थी। उसकी मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

