मधेपुरा में पूर्व CM बीपी मंडल की जयंती मनी:विधानसभा उपाध्यक्ष ने कहा- मंडलजी ने सामाजिक न्याय की नींव रखी

मधेपुरा में पूर्व CM बीपी मंडल की जयंती मनी:विधानसभा उपाध्यक्ष ने कहा- मंडलजी ने सामाजिक न्याय की नींव रखी

पूर्व मुख्यमंत्री और मंडल आयोग के अध्यक्ष रहे बीपी मंडल की 109वीं जयंती मंगलवार को मनाई गई। मुख्य समारोह उनके पैतृक गांव मुरहो स्थित समाधि स्थल पर हुआ। विधानसभा उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव, सदर विधायक प्रो. चंद्रशेखर, डीएम अभिषेक रंजन, एसपी संदीप सिंह सहित अन्य अतिथियों ने बीपी मंडल की समाधि पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। जयंती समारोह की शुरुआत सुबह 6 बजे मुरहो और मधेपुरा शहर में प्रभातफेरी से हुई। विचारों और आदर्शों को जीवन में उतारा जाए – सदर विधायक इसके बाद सुबह 10 बजे बीपी मंडल चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि और माल्यार्पण किया गया। सुबह 10.30 बजे मुरहो स्थित समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद 10.35 बजे सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई। विधानसभा उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि बीपी मंडल ने सामाजिक न्याय की नींव मजबूत करने और पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया। सदर विधायक प्रो. चंद्रशेखर ने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए कहा कि बीपी मंडल को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब उनके विचारों और आदर्शों को जीवन में उतारा जाए। डीएम अभिषेक रंजन ने कहा कि बीपी मंडल ने समानता और समावेशी विकास की जरूरत को दशकों पहले समझ लिया था। बीएन मंडल स्टेडियम में सांस्कृतिक कार्यक्रम परिवार की तरह समाज और सरकार की भी जिम्मेदारी है कि कमजोर वर्गों को सहयोग देकर आगे बढ़ाया जाए। मंडल आयोग की सिफारिशों और उनके कार्यों ने समाज में ‘साइलेंट रिवोल्यूशन’ लाने का काम किया। उन्होंने कहा कि समान अवसर के बिना प्रतिभाशाली लोग आगे नहीं बढ़ सकते और देश का विकास भी संभव नहीं है। कार्यक्रम को समाजसेवी साहित्यकार डॉ. भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी और अन्य अतिथियों ने भी संबोधित किया। शाम 6.30 बजे बीएन मंडल स्टेडियम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। इसमें स्थानीय और ख्याति प्राप्त कलाकार प्रस्तुति देंगे। इंडियन आइडल फेम रितिका राज सिंह भी अपनी प्रस्तुति देंगी। कार्यक्रम रात 9.50 बजे तक चलेगा। 1952 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता बता दें कि 25 अगस्त 1918 को वाराणसी में जन्मे बीपी मंडल का जीवन संघर्षों से भरा रहा। जन्म के अगले ही दिन उनके पिता का निधन हो गया था। प्रारंभिक शिक्षा मुरहो से शुरू करने के बाद उन्होंने मधेपुरा और दरभंगा में पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही वे जातीय भेदभाव के खिलाफ मुखर रहे। बड़े भाई केपी मंडल के निधन के बाद उन्हें पढ़ाई छोड़कर मुरहो लौटना पड़ा। बाद में वे सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय हुए। 1952 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। उन्होंने तीन बार विधानसभा, एक बार विधान परिषद और दो बार लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया। 1 फरवरी 1968 को वे बिहार के मुख्यमंत्री बने। उनका कार्यकाल करीब 47 दिनों का रहा, लेकिन इस दौरान उन्होंने पिछड़े और वंचित वर्गों के बीच राजनीतिक आत्मविश्वास पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 64 साल की उम्र में हुआ निधन 1979 में केंद्र सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए दूसरे पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया और बीपी मंडल को इसका अध्यक्ष बनाया। आयोग ने 3,743 जातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में चिह्नित करते हुए आरक्षण सहित कई सिफारिशें कीं। 31 दिसंबर 1980 को आयोग की रिपोर्ट तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी को सौंपी गई। बाद में 1990 में केंद्र सरकार ने आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय सेवाओं में ओबीसी आरक्षण लागू करने की घोषणा की। 13 अप्रैल 1982 को 64 वर्ष की उम्र में बीपी मंडल का निधन हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री और मंडल आयोग के अध्यक्ष रहे बीपी मंडल की 109वीं जयंती मंगलवार को मनाई गई। मुख्य समारोह उनके पैतृक गांव मुरहो स्थित समाधि स्थल पर हुआ। विधानसभा उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव, सदर विधायक प्रो. चंद्रशेखर, डीएम अभिषेक रंजन, एसपी संदीप सिंह सहित अन्य अतिथियों ने बीपी मंडल की समाधि पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। जयंती समारोह की शुरुआत सुबह 6 बजे मुरहो और मधेपुरा शहर में प्रभातफेरी से हुई। विचारों और आदर्शों को जीवन में उतारा जाए – सदर विधायक इसके बाद सुबह 10 बजे बीपी मंडल चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि और माल्यार्पण किया गया। सुबह 10.30 बजे मुरहो स्थित समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद 10.35 बजे सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई। विधानसभा उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि बीपी मंडल ने सामाजिक न्याय की नींव मजबूत करने और पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया। सदर विधायक प्रो. चंद्रशेखर ने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए कहा कि बीपी मंडल को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब उनके विचारों और आदर्शों को जीवन में उतारा जाए। डीएम अभिषेक रंजन ने कहा कि बीपी मंडल ने समानता और समावेशी विकास की जरूरत को दशकों पहले समझ लिया था। बीएन मंडल स्टेडियम में सांस्कृतिक कार्यक्रम परिवार की तरह समाज और सरकार की भी जिम्मेदारी है कि कमजोर वर्गों को सहयोग देकर आगे बढ़ाया जाए। मंडल आयोग की सिफारिशों और उनके कार्यों ने समाज में ‘साइलेंट रिवोल्यूशन’ लाने का काम किया। उन्होंने कहा कि समान अवसर के बिना प्रतिभाशाली लोग आगे नहीं बढ़ सकते और देश का विकास भी संभव नहीं है। कार्यक्रम को समाजसेवी साहित्यकार डॉ. भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी और अन्य अतिथियों ने भी संबोधित किया। शाम 6.30 बजे बीएन मंडल स्टेडियम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। इसमें स्थानीय और ख्याति प्राप्त कलाकार प्रस्तुति देंगे। इंडियन आइडल फेम रितिका राज सिंह भी अपनी प्रस्तुति देंगी। कार्यक्रम रात 9.50 बजे तक चलेगा। 1952 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता बता दें कि 25 अगस्त 1918 को वाराणसी में जन्मे बीपी मंडल का जीवन संघर्षों से भरा रहा। जन्म के अगले ही दिन उनके पिता का निधन हो गया था। प्रारंभिक शिक्षा मुरहो से शुरू करने के बाद उन्होंने मधेपुरा और दरभंगा में पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही वे जातीय भेदभाव के खिलाफ मुखर रहे। बड़े भाई केपी मंडल के निधन के बाद उन्हें पढ़ाई छोड़कर मुरहो लौटना पड़ा। बाद में वे सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय हुए। 1952 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। उन्होंने तीन बार विधानसभा, एक बार विधान परिषद और दो बार लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया। 1 फरवरी 1968 को वे बिहार के मुख्यमंत्री बने। उनका कार्यकाल करीब 47 दिनों का रहा, लेकिन इस दौरान उन्होंने पिछड़े और वंचित वर्गों के बीच राजनीतिक आत्मविश्वास पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 64 साल की उम्र में हुआ निधन 1979 में केंद्र सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए दूसरे पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया और बीपी मंडल को इसका अध्यक्ष बनाया। आयोग ने 3,743 जातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में चिह्नित करते हुए आरक्षण सहित कई सिफारिशें कीं। 31 दिसंबर 1980 को आयोग की रिपोर्ट तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी को सौंपी गई। बाद में 1990 में केंद्र सरकार ने आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय सेवाओं में ओबीसी आरक्षण लागू करने की घोषणा की। 13 अप्रैल 1982 को 64 वर्ष की उम्र में बीपी मंडल का निधन हो गया।  

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