मुंगेर में तैनात ASI की हत्या में 8 दोषी:7 सितंबर को मिलेगी सजा; फैसला सुनते ही कोर्ट में पुलिस से भिड़े

मुंगेर में तैनात ASI की हत्या में 8 दोषी:7 सितंबर को मिलेगी सजा; फैसला सुनते ही कोर्ट में पुलिस से भिड़े

मुंगेर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नंदलालपुर स्थित एलआईसी कार्यालय के सामने होली के दिन हुए विवाद में ड्यूटी पर तैनात पुलिस पदाधिकारी संतोष कुमार सिंह की हत्या के मामले में अदालत ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। मुंगेर न्यायालय की एडीजे चतुर्थ कुमारी मनीषा की अदालत ने मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद सभी 8 अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। दोषियों की सजा के बिंदु पर अब 7 सितंबर को सुनवाई होगी। यह मामला 14 मार्च 2025 का है। पुलिस पदाधिकारी दो पक्षों के बीच हुए विवाद को शांत कराने और शराब के नशे में हंगामा कर रहे लोगों को समझाने पहुंचे थे। इसी दौरान उन पर लाठी-डंडे और धारदार हथियारों से हमला कर दिया गया था। गंभीर रूप से घायल संतोष कुमार सिंह की इलाज के दौरान पटना के पारस अस्पताल में मौत हो गई थी। पहले समझाकर लौटे थे, शाम में फिर शुरू हुआ विवाद 14 मार्च 2025 को दोपहर करीब 2:05 बजे नंदलालपुर स्थित एलआईसी कार्यालय के सामने दो पक्षों के बीच विवाद और मारपीट की सूचना मिली थी। सूचना पर डायल-112 में तैनात सहायक अवर निरीक्षक संतोष कुमार सिंह सिपाही दीपक कुमार के साथ मौके पर पहुंचे थे। पुलिस टीम ने दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद शाम करीब 7:30 बजे गश्ती के दौरान पुलिस ने दोनों पक्षों को फिर गाली-गलौज करते देखा। पुलिस के अनुसार, इस दौरान एक पक्ष के कुछ लोग शराब के नशे में हंगामा कर रहे थे। संतोष कुमार सिंह पहले एक पक्ष के लोगों को समझाने पहुंचे। इसके बाद वह दूसरे पक्ष के आंगन में उन्हें समझाने गए। आंगन में घेरकर लोहे की रड और दबिया से हमला अभियोजन पक्ष के अनुसार, दूसरे पक्ष के लोगों ने पुलिस पदाधिकारी को घेर लिया। आरोप है कि राजीव कुमार, रणवीर कुमार, राजू कुमार, गुड्डू कुमार, विकास कुमार, रेखा देवी, सरिता देवी और मौसम कुमारी ने एकजुट होकर संतोष कुमार सिंह पर हमला कर दिया। हमले में लोहे की रड, दबिया, हुक और लात-मुक्के का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। मारपीट में संतोष कुमार सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। लोक अभियोजक संजय कुमार सिंह के अनुसार, हमले के बाद पुलिस पदाधिकारी को घसीटकर पड़ोसी प्रदीप यादव के घर के पास ले जाकर रखने का भी आरोप है। उन्हें गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। पटना के पारस अस्पताल में इलाज के दौरान मौत गंभीर रूप से घायल संतोष कुमार सिंह को इलाज के लिए पटना के पारस अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद सिपाही दीपक कुमार की सूचना पर मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और अभियुक्तों के खिलाफ साक्ष्य जुटाए। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से लोक अभियोजक मुंगेर संजय कुमार सिंह ने अभियोजन पक्ष रखा। डेढ़ साल में स्पीड ट्रायल से आया फैसला एसपी सैयद इमरान मसूद ने कहा कि यह मामला पुलिस महकमे के लिए बड़ी चुनौती था। पुलिस ने मामले के अनुसंधान में तकनीकी जांच का भी सहारा लिया। उन्होंने कहा कि लोक अभियोजक का भी मामले को मजबूत तरीके से रखने में महत्वपूर्ण योगदान रहा। एसपी के मुताबिक, स्पीड ट्रायल के तहत करीब डेढ़ साल में अदालत ने आठों आरोपियों को दोषी करार दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस पदाधिकारी की हत्या के मामले में दोषियों को सजा दिलाने के लिए पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान के साथ सभी पहलुओं पर काम किया। अब 7 सितंबर को अदालत दोषियों की सजा के बिंदु पर सुनवाई करेगी। फैसला सुनते ही कोर्ट परिसर में अभियुक्तों ने किया हंगामा अदालत से दोषी करार दिए जाने के बाद मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। सभी अभियुक्तों को कोर्ट की हाजत में ले जाने के दौरान उन्होंने कथित तौर पर हंगामा शुरू कर दिया। पुलिसकर्मियों ने उन्हें शांत कराने की कोशिश की तो अभियुक्तों के पुलिसकर्मियों से उलझने की बात सामने आई। इस दौरान एएसआई विनोद कुमार, सिपाही विनोद कुमार झा, निर्जला कुमारी और हवलदार बिंदेश्री मांझी को चोट लगने की जानकारी दी गई है। पुलिस के अनुसार, अभियुक्तों को कैदी वाहन में बैठाने के बाद भी हंगामा जारी रहा। इस दौरान कैदी वाहन की खिड़की का शीशा भी तोड़ दिया गया। अतिरिक्त बल बुलाकर सभी को जेल भेजा हवलदार बिंदेश्री मांझी ने बताया कि दोषी करार दिए जाने के बाद सभी अभियुक्तों को हाजत में ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद सभी अभियुक्तों को कैदी वाहन में बैठाया गया। आगे जाने के दौरान वाहन का शीशा तोड़ दिया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। कड़ी सुरक्षा के बीच सभी दोषियों को जेल भेजा गया। पुलिस पर हमले को लेकर अलग केस होगा दर्ज एसपी सैयद इमरान मसूद ने बताया कि दोषी करार दिए जाने के बाद अभियुक्तों ने पुलिसकर्मियों से भी मारपीट की। इस घटना में एक पुलिसकर्मी को गंभीर चोट लगने की बात उन्होंने कही। उन्होंने बताया कि कोर्ट परिसर में पुलिसकर्मियों पर हमला करने के मामले में सभी अभियुक्तों के खिलाफ अलग से प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। एसपी ने कहा कि अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर सभी अभियुक्तों को सुरक्षा के साथ जेल भेजा गया। सुरक्षा को देखते हुए एसपी खुद जेल पहुंचे और जेल अधीक्षक किरण निधि को सभी अभियुक्तों पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया। लोक अभियोजक बोले- पुलिस पदाधिकारी को घेरकर किया था हमला लोक अभियोजक संजय कुमार सिंह ने बताया कि 14 मार्च 2025 को नंदलालपुर में दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था। पहली बार पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया था। शाम में जब दोबारा विवाद शुरू हुआ तो गश्ती पर मौजूद एएसआई संतोष कुमार सिंह और अन्य पुलिसकर्मी लोगों को समझाने पहुंचे। इसी दौरान रणवीर यादव सहित उसके परिजनों पर संतोष कुमार सिंह के साथ जानलेवा हमला करने का आरोप है। लोक अभियोजक के अनुसार, मारपीट में गंभीर रूप से घायल एएसआई को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इसी हत्या के मामले में अदालत ने सभी आठ अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। अब पूरे मामले में 7 सितंबर को सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी। वहीं, कोर्ट परिसर में पुलिसकर्मियों के साथ हुए कथित हमले को लेकर एक नया मामला दर्ज किए जाने की तैयारी है। मुंगेर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नंदलालपुर स्थित एलआईसी कार्यालय के सामने होली के दिन हुए विवाद में ड्यूटी पर तैनात पुलिस पदाधिकारी संतोष कुमार सिंह की हत्या के मामले में अदालत ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। मुंगेर न्यायालय की एडीजे चतुर्थ कुमारी मनीषा की अदालत ने मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद सभी 8 अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। दोषियों की सजा के बिंदु पर अब 7 सितंबर को सुनवाई होगी। यह मामला 14 मार्च 2025 का है। पुलिस पदाधिकारी दो पक्षों के बीच हुए विवाद को शांत कराने और शराब के नशे में हंगामा कर रहे लोगों को समझाने पहुंचे थे। इसी दौरान उन पर लाठी-डंडे और धारदार हथियारों से हमला कर दिया गया था। गंभीर रूप से घायल संतोष कुमार सिंह की इलाज के दौरान पटना के पारस अस्पताल में मौत हो गई थी। पहले समझाकर लौटे थे, शाम में फिर शुरू हुआ विवाद 14 मार्च 2025 को दोपहर करीब 2:05 बजे नंदलालपुर स्थित एलआईसी कार्यालय के सामने दो पक्षों के बीच विवाद और मारपीट की सूचना मिली थी। सूचना पर डायल-112 में तैनात सहायक अवर निरीक्षक संतोष कुमार सिंह सिपाही दीपक कुमार के साथ मौके पर पहुंचे थे। पुलिस टीम ने दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद शाम करीब 7:30 बजे गश्ती के दौरान पुलिस ने दोनों पक्षों को फिर गाली-गलौज करते देखा। पुलिस के अनुसार, इस दौरान एक पक्ष के कुछ लोग शराब के नशे में हंगामा कर रहे थे। संतोष कुमार सिंह पहले एक पक्ष के लोगों को समझाने पहुंचे। इसके बाद वह दूसरे पक्ष के आंगन में उन्हें समझाने गए। आंगन में घेरकर लोहे की रड और दबिया से हमला अभियोजन पक्ष के अनुसार, दूसरे पक्ष के लोगों ने पुलिस पदाधिकारी को घेर लिया। आरोप है कि राजीव कुमार, रणवीर कुमार, राजू कुमार, गुड्डू कुमार, विकास कुमार, रेखा देवी, सरिता देवी और मौसम कुमारी ने एकजुट होकर संतोष कुमार सिंह पर हमला कर दिया। हमले में लोहे की रड, दबिया, हुक और लात-मुक्के का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। मारपीट में संतोष कुमार सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। लोक अभियोजक संजय कुमार सिंह के अनुसार, हमले के बाद पुलिस पदाधिकारी को घसीटकर पड़ोसी प्रदीप यादव के घर के पास ले जाकर रखने का भी आरोप है। उन्हें गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। पटना के पारस अस्पताल में इलाज के दौरान मौत गंभीर रूप से घायल संतोष कुमार सिंह को इलाज के लिए पटना के पारस अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद सिपाही दीपक कुमार की सूचना पर मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और अभियुक्तों के खिलाफ साक्ष्य जुटाए। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से लोक अभियोजक मुंगेर संजय कुमार सिंह ने अभियोजन पक्ष रखा। डेढ़ साल में स्पीड ट्रायल से आया फैसला एसपी सैयद इमरान मसूद ने कहा कि यह मामला पुलिस महकमे के लिए बड़ी चुनौती था। पुलिस ने मामले के अनुसंधान में तकनीकी जांच का भी सहारा लिया। उन्होंने कहा कि लोक अभियोजक का भी मामले को मजबूत तरीके से रखने में महत्वपूर्ण योगदान रहा। एसपी के मुताबिक, स्पीड ट्रायल के तहत करीब डेढ़ साल में अदालत ने आठों आरोपियों को दोषी करार दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस पदाधिकारी की हत्या के मामले में दोषियों को सजा दिलाने के लिए पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान के साथ सभी पहलुओं पर काम किया। अब 7 सितंबर को अदालत दोषियों की सजा के बिंदु पर सुनवाई करेगी। फैसला सुनते ही कोर्ट परिसर में अभियुक्तों ने किया हंगामा अदालत से दोषी करार दिए जाने के बाद मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। सभी अभियुक्तों को कोर्ट की हाजत में ले जाने के दौरान उन्होंने कथित तौर पर हंगामा शुरू कर दिया। पुलिसकर्मियों ने उन्हें शांत कराने की कोशिश की तो अभियुक्तों के पुलिसकर्मियों से उलझने की बात सामने आई। इस दौरान एएसआई विनोद कुमार, सिपाही विनोद कुमार झा, निर्जला कुमारी और हवलदार बिंदेश्री मांझी को चोट लगने की जानकारी दी गई है। पुलिस के अनुसार, अभियुक्तों को कैदी वाहन में बैठाने के बाद भी हंगामा जारी रहा। इस दौरान कैदी वाहन की खिड़की का शीशा भी तोड़ दिया गया। अतिरिक्त बल बुलाकर सभी को जेल भेजा हवलदार बिंदेश्री मांझी ने बताया कि दोषी करार दिए जाने के बाद सभी अभियुक्तों को हाजत में ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद सभी अभियुक्तों को कैदी वाहन में बैठाया गया। आगे जाने के दौरान वाहन का शीशा तोड़ दिया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। कड़ी सुरक्षा के बीच सभी दोषियों को जेल भेजा गया। पुलिस पर हमले को लेकर अलग केस होगा दर्ज एसपी सैयद इमरान मसूद ने बताया कि दोषी करार दिए जाने के बाद अभियुक्तों ने पुलिसकर्मियों से भी मारपीट की। इस घटना में एक पुलिसकर्मी को गंभीर चोट लगने की बात उन्होंने कही। उन्होंने बताया कि कोर्ट परिसर में पुलिसकर्मियों पर हमला करने के मामले में सभी अभियुक्तों के खिलाफ अलग से प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। एसपी ने कहा कि अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर सभी अभियुक्तों को सुरक्षा के साथ जेल भेजा गया। सुरक्षा को देखते हुए एसपी खुद जेल पहुंचे और जेल अधीक्षक किरण निधि को सभी अभियुक्तों पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया। लोक अभियोजक बोले- पुलिस पदाधिकारी को घेरकर किया था हमला लोक अभियोजक संजय कुमार सिंह ने बताया कि 14 मार्च 2025 को नंदलालपुर में दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था। पहली बार पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया था। शाम में जब दोबारा विवाद शुरू हुआ तो गश्ती पर मौजूद एएसआई संतोष कुमार सिंह और अन्य पुलिसकर्मी लोगों को समझाने पहुंचे। इसी दौरान रणवीर यादव सहित उसके परिजनों पर संतोष कुमार सिंह के साथ जानलेवा हमला करने का आरोप है। लोक अभियोजक के अनुसार, मारपीट में गंभीर रूप से घायल एएसआई को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इसी हत्या के मामले में अदालत ने सभी आठ अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। अब पूरे मामले में 7 सितंबर को सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी। वहीं, कोर्ट परिसर में पुलिसकर्मियों के साथ हुए कथित हमले को लेकर एक नया मामला दर्ज किए जाने की तैयारी है।  

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