अजमेर में साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं। एक मामले में ठगों ने ट्रांसपोर्ट कारोबारी को निशाना बनाया। फर्जी ट्रांसपोर्टर बनकर ट्रांसपोर्ट कारोबारी को दो ट्रकों के एडवांस किराए के नाम पर 2 लाख रुपए खाते में ट्रांसफर करवाए। फिर रकम हड़प ली। वहीं, दूसरे मामले में निजी शिक्षक को ठगा गया। निजी शिक्षक को ऑनलाइन निवेश में मुनाफे का झांसा देकर पहले 10 हजार और फिर रकम निकालने के नाम पर 23,518 रुपए जमा करवाए। दोनों मामलों में पीड़ितों ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है। केस 1- ट्रांसपोर्ट कारोबारी से 2 लाख की ठगी बावड़ी निवासी 25 वर्षीय नारायण जाट ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं। उनका नसीराबाद में ऑफिस है। रिपोर्ट के अनुसार, 18 अगस्त को उन्हें मानकपुर, जोधपुर से होस्पेट, कर्नाटक माल पहुंचाने का काम मिला था। इसके लिए उन्होंने ट्रक उपलब्ध कराने के लिए वाट्सएप पर जानकारी शेयर की। इसी दौरान मनोज उर्फ मुकेश नाम के व्यक्ति ने संपर्क किया। उसने खुद को नागौर बस स्टैंड के पास सांवरिया ट्रांसपोर्ट कंपनी चलाने वाला बताया। बातचीत के बाद उसने दो ट्रकों के नंबर और ड्राइवरों के मोबाइल नंबर भेजे। दोनों ट्रकों का किराया 3800 रुपए प्रति टन तय हुआ। 19 अगस्त को दोनों ट्रक मानकपुर पहुंचकर माल लोड कर रवाना हो गए। 20 अगस्त को मनोज के बताए अनुसार नारायण ने सोनू कुमार के बैंक खाते में तीन बार में कुल 2 लाख रुपए ट्रांसफर किए। इनमें 50 हजार रुपए NEFT, 50 हजार IMPS और 1 लाख रुपए IMPS से भेजे गए। इसके बाद गणेश रोड लाइंस के लोकेश का फोन आया। उसने बताया कि ट्रकों की एडवांस राशि उसे नहीं मिली है। नारायण ने मनोज से बात करने को कहा। मनोज ने बार-बार जल्द भुगतान करने का भरोसा दिया, लेकिन न तो लोकेश को रुपए दिए और न ही नारायण को वापस लौटाए। ठगी का एहसास होने पर नारायण ने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। मामले में BNS की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज कर जांच हेड कॉन्स्टेबल जितेंद्र सिंह को सौंपी गई है। केस 2- निवेश में मुनाफे का झांसा देकर शिक्षक से 23,518 रुपए ठगे अलवरगेट थाना क्षेत्र के मेयो लिंक रोड निवासी निजी शिक्षक दिग्विजय सिंह राठौड़ को टेलीग्राम पर निवेश में अच्छा मुनाफा कमाने का झांसा देकर ठगी की गई। 3 फरवरी को टेलीग्राम पर विज्ञापन देखने के बाद वे वाट्सएप चैट के जरिए ठगों के संपर्क में आए। ठग ने अलग-अलग निवेश प्लान भेजे और स्कैनर के जरिए रुपए जमा करवाए। दिग्विजय ने पहले फोन-पे से दो बार 1-1 हजार और चार बार 2-2 हजार रुपए यानी कुल 10 हजार रुपए जमा किए। जब उन्होंने रकम वापस निकालने की कोशिश की तो ठग ने कहा कि पहले 23,518 रुपए जमा करने होंगे। पीड़ित ने यह राशि भी जमा कर दी। इसके बाद रकम निकालने के लिए ठग ने फिर 23,520 रुपए जमा करने को कहा। इस पर उन्हें ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने उसी दिन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई है। HDFC बैंक और RBI में भी शिकायत की गई। RBI की शिकायत के बाद 10 हजार रुपए कुछ दिन बाद खाते में वापस आ गए, लेकिन 23,518 रुपए अभी तक वापस नहीं मिले हैं।

