लखीसराय के प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में सावन की चौथी और अंतिम सोमवारी पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़े। अहले सुबह मंदिर के पट खुलते ही कांवरियों और अन्य श्रद्धालुओं की 2 किलोमीटर तक लंबी कतारें लग गईं। पूरा मंदिर परिसर केसरिया रंग में रंगा नजर आया और ‘बोल बम’ के जयकारे गूंजते रहे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सावन के महीने में भगवान शिव पर जल चढ़ाने की प्राचीन परंपरा है, और सोमवार को शिवलिंग पर जलार्पण को विशेष शुभ माना जाता है। इसी आस्था के साथ बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे अशोक धाम पहुंचे। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के मद्देनजर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में दंडाधिकारियों के साथ पर्याप्त संख्या में महिला और पुरुष पुलिस बल तैनात किया गया था। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए लगातार निगरानी रखी गई। मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी गतिविधियों पर नजर रखी गई, ताकि जलाभिषेक के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। लखीसराय के प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में सावन की चौथी और अंतिम सोमवारी पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़े। अहले सुबह मंदिर के पट खुलते ही कांवरियों और अन्य श्रद्धालुओं की 2 किलोमीटर तक लंबी कतारें लग गईं। पूरा मंदिर परिसर केसरिया रंग में रंगा नजर आया और ‘बोल बम’ के जयकारे गूंजते रहे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सावन के महीने में भगवान शिव पर जल चढ़ाने की प्राचीन परंपरा है, और सोमवार को शिवलिंग पर जलार्पण को विशेष शुभ माना जाता है। इसी आस्था के साथ बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे अशोक धाम पहुंचे। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के मद्देनजर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में दंडाधिकारियों के साथ पर्याप्त संख्या में महिला और पुरुष पुलिस बल तैनात किया गया था। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए लगातार निगरानी रखी गई। मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी गतिविधियों पर नजर रखी गई, ताकि जलाभिषेक के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

