हिमाचल प्रदेश में जनगणना ड्यूटी करने वाले सरकारी कर्मचारियों की छुट्टी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि प्रदेश की कई तहसीलों में तहसीलदारों ने जनगणना ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को तीन से चार दिन की कंपन्सेटरी लीव (प्रतिपूरक अवकाश) देने के आदेश जारी कर दिए, जबकि कई अन्य तहसीलों में इस तरह के कोई आदेश ही नहीं हुए। कुछ कर्मचारियों ने इन आदेशों के आधार पर छुट्टी भी ले ली है। दूसरी ओर जिन कर्मचारियों को यह सुविधा नहीं मिली है, वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और अब सरकार अथवा विभाग के स्पष्ट आदेशों का इंतजार कर रहे हैं। मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि जनगणना ड्यूटी के बदले ‘कंपन्सेटरी लीव’ देने का प्रावधान था, तो पूरे प्रदेश में एक समान आदेश क्यों नहीं जारी हुए? और यदि ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं था तो तहसील स्तर पर अधिकारियों ने अपने स्तर पर कर्मचारियों को छुट्टी देने के आदेश कैसे जारी कर दिए? वहीं सेंसन डिपार्टमेंट ने स्पष्ट किया कि जनगणना कर्मियों को इस काम का ऑनरेरियम दिया जाता है। कर्मचारियों को ऐसी कोई छुट्टी देने का प्रावधान नहीं है। 16 जून से 15 जुलाई तक चली थी पहले चरण की जनगणना जनगणना-2027 के पहले चरण में हिमाचल प्रदेश में हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेंसेस का काम 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक चला था। इससे पहले 1 जून से 15 जून तक सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा दी गई थी। पहले चरण में घरों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और परिवारों के पास मौजूद परिसंपत्तियों से जुड़ी जानकारी जुटाई गई। प्रदेश में इस काम के लिए लगभग 25 हजार सरकारी कर्मचारियों को जनगणना ड्यूटी पर लगाया गया था। इनकी ड्यूटी तहसील लेवल पर लगाई गई थी। इसलिए कंपन्सेटरी लीव के ऑर्डर भी तहसीलदार के लेवल पर किए गए। कहीं 3-4 दिन की छुट्टी, कहीं इंतजार विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रदेश की कुछ तहसीलों में जनगणना ड्यूटी पूरी करने वाले कर्मचारियों को तहसीलदारों के स्तर से तीन से चार दिन की कंपन्सेटरी लीव देने के आदेश जारी किए गए। इन आदेशों के बाद संबंधित कर्मचारियों ने छुट्टियां भी लेनी शुरू कर दीं। कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि एक ही राज्य में, एक ही राष्ट्रीय कार्य के लिए और लगभग समान प्रकृति की ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों के लिए छुट्टी के अलग-अलग नियम कैसे लागू हो सकते हैं। डीसी शिमला ने भी ऐसे आदेश जारी करने से किया इनकार मामले को लेकर जब शिमला के डीसी अनुपम कश्यप से पूछा गया तो उन्होंने भी जिले में इस तरह के आदेश जारी किए जाने की जानकारी से इनकार किया। यानी जिला स्तर पर भी जनगणना ड्यूटी के बदले कंपन्सेटरी लीव देने का कोई सामान्य आदेश सामने नहीं आया है।

