लखनऊ में विश्व कायस्थ संस्थान की ओर से आयोजित हरियाली तीज समारोह सावन के रंगों, लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सराबोर रहा। रिमझिम फुहारों के बीच महिलाओं ने पारंपरिक गीतों और नृत्य से समां बांध दिया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान चित्रगुप्त की पूजा और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। इस अवसर पर यशी श्रीवास्तव ने ‘एक दंताय’ पर गणेश वंदना प्रस्तुत की। मिथिलेश श्रीवास्तव ने भोजपुरी भजन ‘गुरु चरण मिलेला बड़ी भाग्य से’ सुनाया, जबकि बीना सक्सेना के अवधी गीत ‘हमका सावन में झूलनी गढ़ाई दे पिया’ ने लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। मंजुला श्रीवास्तव, आरती श्रीवास्तव और सविता श्रीवास्तव ने मिलकर कजरी ‘पिया मेहंदी मंगा दे मोती झील से’ प्रस्तुत की। नृत्य कर सावन की उमंग को जीवंत किया श्रुति श्रीवास्तव ने ‘अब के सजन सावन में’ गीत से फिल्मी संगीत का रंग घोला। अनीता रानी श्रीवास्तव ने ‘हमका धीरज दिए जाना’ गीत सुनाकर दर्शकों की तालियां बटोरीं। छाया सक्सेना ने ‘सावन में मोरनी बनके’ पर नृत्य कर सावन की उमंग को जीवंत किया। बाल कलाकार शौर्य मोहन की तेलुगु नृत्य प्रस्तुति ‘राई राई रा रा’ कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही, जिसकी ऊर्जावान प्रस्तुति पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। समूह नृत्य व भरतनाट्यम प्रस्तुत किया डॉ. आकांक्षा निगम ने ‘हमें तुमसे प्यार कितना’ गीत सुनाया। मंजूषा श्रीवास्तव ने ‘सूखी बरसे झम झम पानी’ और रूपा श्रीवास्तव ने ‘पिया ऐसा जिया में समाए गये रे’ प्रस्तुत किया। शुभम सिन्हा और चांदनी ने समूह नृत्य व भरतनाट्यम प्रस्तुत किया, वहीं अलका श्रीवास्तव ने ‘देखो सांवरे के संग गोरी झूले रे हिंडोला’ समूह गीत पेश किया। आलोक श्रीवास्तव और सविता श्रीवास्तव के युगल गीत ‘रिमझिम झोरे सावन’ ने माहौल को और भी सावनमय बना दिया। पूजा श्रीवास्तव ने ‘चूड़ी मजा न देगी, कंगन मजा न देगा’ पर नृत्य किया। अवनीश कौसर ने ‘बरखा रानी जरा जम के बरसो’ और आर.के. सिन्हा ने ‘झूमता सावन देखो आया’ गीत सुनाकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम का समापन 85 वर्षीय समाजसेवी कुमुद श्रीवास्तव के सम्मान के साथ हुआ।

