सीवान सदर अस्पताल में मरीज की मौत:इलाज में लापरवाही के आरोप में परिजन ने किया हंगामा, अस्पताल में दवा नहीं था उपलब्ध

सीवान सदर अस्पताल में मरीज की मौत:इलाज में लापरवाही के आरोप में परिजन ने किया हंगामा, अस्पताल में दवा नहीं था उपलब्ध

सीवान सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीज की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर सुनील कुमार के साथ मारपीट का प्रयास भी किया गया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सूचना मिलने पर नगर थाना प्रभारी अविनाश कुमार, गश्ती पदाधिकारी दिवाकर कुमार और सदर अस्पताल टीओपी प्रभारी सुजीत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। मृतक की पहचान बसंतपुर थाना क्षेत्र के कोरड़ निवासी कृष्णा सिंह(65) के रूप में हुई है। बताया गया कि कृष्णा सिंह हृदय रोग से पीड़ित थे। अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें पहले बसंतपुर पीएचसी ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया था। मरीज को अस्पताल में नहीं मिला स्ट्रेचर परिजनों ने आरोप लगाया कि सरकारी एंबुलेंस से सदर अस्पताल पहुंचने के बाद मरीज को उतारने के लिए स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया गया। काफी तलाश के बाद भी स्ट्रेचर या व्हीलचेयर नहीं मिलने पर मरीज को पैदल ही इमरजेंसी वार्ड तक ले जाना पड़ा।

परिजनों के अनुसार, इमरजेंसी में भी मरीज को तत्काल ऑक्सीजन नहीं लगाया गया। काफी प्रयास के बाद पुर्जा कटवाया गया और डॉक्टर ने दवा लिखी, लेकिन वह दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी। परिजनों को दवा बाहर से खरीदकर लानी पड़ी। जब वे दवा लेकर लौटे, तब तक डॉक्टर ने मरीज को मृत घोषित कर दिया। ऑक्सीजन टाइम पर मिल जाता तो बच सकती थी जान

इसके बाद परिजनों ने इलाज में देरी और अस्पताल की व्यवस्था को लेकर आक्रोश व्यक्त करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि यदि समय पर ऑक्सीजन और उचित इलाज मिल जाता तो मरीज की जान बच सकती थी।

इस पूरे मामले में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. सर्फुद्दीन की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया गया कि इमरजेंसी में उनकी ड्यूटी थी, लेकिन वे बिना सूचना के अनुपस्थित थे, जिससे कुछ समय तक इमरजेंसी की व्यवस्था प्रभावित रही। सूचना मिलने पर नोडल पदाधिकारी ने डॉ. सुनील कुमार से बात कर उन्हें ड्यूटी पर लगाया। देर रात ड्यूटी से गायब होने की शिकायत पहले भी सामने आती रही है। वहीं अस्पताल में इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी दवाओं और इंजेक्शनों की कमी को लेकर भी मरीजों के परिजन परेशान हैं। उनका आरोप है कि गैस, दर्द और एंटीबायोटिक सहित कई जरूरी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने से उन्हें बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है। देर रात निजी दुकानों के बंद रहने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सीवान सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीज की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर सुनील कुमार के साथ मारपीट का प्रयास भी किया गया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सूचना मिलने पर नगर थाना प्रभारी अविनाश कुमार, गश्ती पदाधिकारी दिवाकर कुमार और सदर अस्पताल टीओपी प्रभारी सुजीत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। मृतक की पहचान बसंतपुर थाना क्षेत्र के कोरड़ निवासी कृष्णा सिंह(65) के रूप में हुई है। बताया गया कि कृष्णा सिंह हृदय रोग से पीड़ित थे। अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें पहले बसंतपुर पीएचसी ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया था। मरीज को अस्पताल में नहीं मिला स्ट्रेचर परिजनों ने आरोप लगाया कि सरकारी एंबुलेंस से सदर अस्पताल पहुंचने के बाद मरीज को उतारने के लिए स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया गया। काफी तलाश के बाद भी स्ट्रेचर या व्हीलचेयर नहीं मिलने पर मरीज को पैदल ही इमरजेंसी वार्ड तक ले जाना पड़ा।

परिजनों के अनुसार, इमरजेंसी में भी मरीज को तत्काल ऑक्सीजन नहीं लगाया गया। काफी प्रयास के बाद पुर्जा कटवाया गया और डॉक्टर ने दवा लिखी, लेकिन वह दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी। परिजनों को दवा बाहर से खरीदकर लानी पड़ी। जब वे दवा लेकर लौटे, तब तक डॉक्टर ने मरीज को मृत घोषित कर दिया। ऑक्सीजन टाइम पर मिल जाता तो बच सकती थी जान

इसके बाद परिजनों ने इलाज में देरी और अस्पताल की व्यवस्था को लेकर आक्रोश व्यक्त करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि यदि समय पर ऑक्सीजन और उचित इलाज मिल जाता तो मरीज की जान बच सकती थी।

इस पूरे मामले में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. सर्फुद्दीन की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया गया कि इमरजेंसी में उनकी ड्यूटी थी, लेकिन वे बिना सूचना के अनुपस्थित थे, जिससे कुछ समय तक इमरजेंसी की व्यवस्था प्रभावित रही। सूचना मिलने पर नोडल पदाधिकारी ने डॉ. सुनील कुमार से बात कर उन्हें ड्यूटी पर लगाया। देर रात ड्यूटी से गायब होने की शिकायत पहले भी सामने आती रही है। वहीं अस्पताल में इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी दवाओं और इंजेक्शनों की कमी को लेकर भी मरीजों के परिजन परेशान हैं। उनका आरोप है कि गैस, दर्द और एंटीबायोटिक सहित कई जरूरी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने से उन्हें बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है। देर रात निजी दुकानों के बंद रहने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।  

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