पटना में रिहायशी मकानों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर निगम सख्त:नोटिस के बाद रोज छह अंचलों में होगी जनसुनवाई, कार्यपालक पदाधिकारी सुनेंगे सबका पक्ष

पटना में रिहायशी मकानों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर निगम सख्त:नोटिस के बाद रोज छह अंचलों में होगी जनसुनवाई, कार्यपालक पदाधिकारी सुनेंगे सबका पक्ष

पटना के रिहायशी इलाकों में बड़ी संख्या में मकानों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। नगर निगम की जांच में ऐसे 26,745 मकानों की पहचान हुई है। उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। नोटिस पाने वाले मकान मालिकों को अपनी संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और व्यावसायिक गतिविधि को लेकर अपना पक्ष रखने का मौका दिया जा रहा है। लोगों को अपना पक्ष अंचल कार्यालय में बताना है। लोगों की बढ़ती भीड़ पर निगम प्रशासन ने नया निर्देश जारी किया है। अब सभी छह अंचलों में तीन-तीन दिन की जगह हर दिन जनसुनवाई होगी। इसके लिए अंचल के कार्यपालक पदाधिकारी को अधिकृत किया गया है। जो कमर्शियल एक्टिविटी कर रहे, उन्हें नोटिस दें- इंद्रनाथ मिश्रा वार्ड 50 के इंद्रनाथ मिश्रा ने कहा, ‘1951 से मेरा कोल्ड स्टोरेज रन कर रहा था। बीच में बंद होने के कारण हमने उसे गोदाम में कन्वर्ट कर दिया। हम कई सालों से कमर्शियल टैक्स पे कर रहे हैं। निगम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से आदेश आया है तो फिर उसका जवाब देना तो नगर निगम का ड्यूटी है। उन्होंने कहा, ‘जो कमर्शियल एक्टिविटी कर रहे हैं और टैक्स नहीं पे कर रहे हैं, उसे नोटिस देना चाहिए। नगर निगम सभी को नोटिस दे रही है।’ निगम टैक्स वापस नहीं देगी तो परेशान भी नहीं करें- स्थानीय निवासी एक स्थानीय निवासी ने कहा, ‘मुझे 14 अगस्त को नोटिस आया था, उसमें यह स्पष्टीकरण मांगा गया था कि आवासीय क्षेत्र में गैर आवासीय एक्टिविटी कैसे कर रहे हैं। उन्हें यह बात एक सर्वे में पता चली है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, ‘मेरा यह प्रश्न है कि क्या निगम का आवासीय और आवासीय क्षेत्र चिह्नित है। अगर नगर निगम को लगता है कि हम लोग अवैध एक्टिविटी कर रहे हैं तो उसका एक नियम कानून बनाकर हमें चेतावनी दे। उसके बाद हम उस पर अपना जवाब देंगे। हमारे मकानों को अन्य श्रेणी में डालकर ज्यादा टैक्स लिया गया है। अभी तक जो नगर निगम में टैक्स दिया है, क्या वह उसे वापस देगी? अगर नहीं देगी तो प्रार्थना है कि परेशान भी नहीं किया जाए। मकान अवैध है, तो 20 साल से जमा टैक्स मुझे रिफंड करो- पंकज कुमार वार्ड 45 के पंकज कुमार ने कहा, ‘मुझे भी नोटिस मिला है। हर साल आदमी 10 हजार टैक्स भरता है। आज यहां सुनवाई हो रही है मगर कोई कुछ बताने वाला नहीं है। यह नगर निगम एकदम लावारिस है। नगर निगम ने हमसे करोड़ों का टैक्स वसूल लिया और आज बोल रहे कि अवैध है। अगर ऐसा है तो 20 साल से जमा किया हुआ मेरा कमर्शियल टैक्स नगर निगम मुझे रिफंड कर दे। अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर लगेगी रोक नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने सभी कार्यपालक पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित मामलों में नियमित सुनवाई की जाए। नियमों के तहत सभी मामलों का निष्पादन किया जाए। रिहायशी क्षेत्रों में नियमों के विपरीत गैर-आवासीय गतिविधियां करने वाले जिन संपत्तिधारकों को नोटिस दिया गया है, उनके मामलों की सुनवाई के लिए अंचल स्तर पर प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। सुनवाई को अनावश्यक लटकाया नहीं जाएगा। पटना का 47.55% हिस्सा आवासीय, फिर भी हर गली में खुलीं दुकानें बिहार गजट में प्रकाशित पटना के आधिकारिक भूमि-उपयोग आंकड़ों के मुताबिक, नगर निगम क्षेत्र के कुल 104.22 वर्ग किलोमीटर में से 49.56 वर्ग किलोमीटर यानी 47.55% हिस्सा केवल आवासीय उपयोग के लिए तय है। इसके मुकाबले वाणिज्यिक उपयोग के लिए महज 4.46% (4.65 वर्ग किमी) और मिश्रित उपयोग के लिए 3.37% (3.52 वर्ग किमी) क्षेत्र ही निर्धारित है। बावजूद इसके, रिहायशी कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियां पैर पसारती चली गईं। गजट के अनुसार, खाली व कृषि भूमि (18.40%) और मनोरंजक खुले स्थानों (3.20%) पर हुए इस अनियोजित निर्माण ने आज पूरे शहर की व्यवस्था को बिगाड़ दिया है। दुकानों और ऑफिसों की संख्या सबसे ज्यादा रिहायशी परिसरों में सबसे अधिक दुकानें और व्यावसायिक कार्यालय संचालित होते मिले हैं। इसके अलावा पार्किंग, मैरिज हॉल, अस्पताल, हॉस्टल, कोचिंग संस्थान, स्कूल, गोदाम, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट जैसी गतिविधियां भी चिन्हित की गई हैं। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, आवासीय इलाकों में 194 गेस्ट हाउस, 154 छोटे उद्योग और 106 होटल संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 15 कॉलेज, 39 हेल्थ क्लब, 70 नर्सिंग होम और 37 रेस्टोरेंट भी सूची में शामिल हैं। रिहायशी जोन में किन गतिविधियों की अनुमति पटना के रेजिडेंशियल जोन-1, रेजिडेंशियल जोन-2 और अर्बन सेंटर जोन में मुख्य रूप से आवासीय गतिविधियों की अनुमति है। यहां मकान, हॉस्टल, बोर्डिंग-लॉजिंग हाउस, नाइट शेल्टर और इंटीग्रेटेड टाउनशिप जैसी गतिविधियां हो सकती हैं। कुछ परिस्थितियों में बैंक और बेकरी-कन्फेक्शनरी जैसी गतिविधियों की भी अनुमति है। कॉलेज जैसी गतिविधियों के लिए निर्धारित शर्तों और विशेष अनुमति की जरूरत हो सकती है। नगर निगम अब नोटिस के जवाब और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगा। पटना के रिहायशी इलाकों में बड़ी संख्या में मकानों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। नगर निगम की जांच में ऐसे 26,745 मकानों की पहचान हुई है। उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। नोटिस पाने वाले मकान मालिकों को अपनी संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और व्यावसायिक गतिविधि को लेकर अपना पक्ष रखने का मौका दिया जा रहा है। लोगों को अपना पक्ष अंचल कार्यालय में बताना है। लोगों की बढ़ती भीड़ पर निगम प्रशासन ने नया निर्देश जारी किया है। अब सभी छह अंचलों में तीन-तीन दिन की जगह हर दिन जनसुनवाई होगी। इसके लिए अंचल के कार्यपालक पदाधिकारी को अधिकृत किया गया है। जो कमर्शियल एक्टिविटी कर रहे, उन्हें नोटिस दें- इंद्रनाथ मिश्रा वार्ड 50 के इंद्रनाथ मिश्रा ने कहा, ‘1951 से मेरा कोल्ड स्टोरेज रन कर रहा था। बीच में बंद होने के कारण हमने उसे गोदाम में कन्वर्ट कर दिया। हम कई सालों से कमर्शियल टैक्स पे कर रहे हैं। निगम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से आदेश आया है तो फिर उसका जवाब देना तो नगर निगम का ड्यूटी है। उन्होंने कहा, ‘जो कमर्शियल एक्टिविटी कर रहे हैं और टैक्स नहीं पे कर रहे हैं, उसे नोटिस देना चाहिए। नगर निगम सभी को नोटिस दे रही है।’ निगम टैक्स वापस नहीं देगी तो परेशान भी नहीं करें- स्थानीय निवासी एक स्थानीय निवासी ने कहा, ‘मुझे 14 अगस्त को नोटिस आया था, उसमें यह स्पष्टीकरण मांगा गया था कि आवासीय क्षेत्र में गैर आवासीय एक्टिविटी कैसे कर रहे हैं। उन्हें यह बात एक सर्वे में पता चली है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, ‘मेरा यह प्रश्न है कि क्या निगम का आवासीय और आवासीय क्षेत्र चिह्नित है। अगर नगर निगम को लगता है कि हम लोग अवैध एक्टिविटी कर रहे हैं तो उसका एक नियम कानून बनाकर हमें चेतावनी दे। उसके बाद हम उस पर अपना जवाब देंगे। हमारे मकानों को अन्य श्रेणी में डालकर ज्यादा टैक्स लिया गया है। अभी तक जो नगर निगम में टैक्स दिया है, क्या वह उसे वापस देगी? अगर नहीं देगी तो प्रार्थना है कि परेशान भी नहीं किया जाए। मकान अवैध है, तो 20 साल से जमा टैक्स मुझे रिफंड करो- पंकज कुमार वार्ड 45 के पंकज कुमार ने कहा, ‘मुझे भी नोटिस मिला है। हर साल आदमी 10 हजार टैक्स भरता है। आज यहां सुनवाई हो रही है मगर कोई कुछ बताने वाला नहीं है। यह नगर निगम एकदम लावारिस है। नगर निगम ने हमसे करोड़ों का टैक्स वसूल लिया और आज बोल रहे कि अवैध है। अगर ऐसा है तो 20 साल से जमा किया हुआ मेरा कमर्शियल टैक्स नगर निगम मुझे रिफंड कर दे। अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर लगेगी रोक नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने सभी कार्यपालक पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित मामलों में नियमित सुनवाई की जाए। नियमों के तहत सभी मामलों का निष्पादन किया जाए। रिहायशी क्षेत्रों में नियमों के विपरीत गैर-आवासीय गतिविधियां करने वाले जिन संपत्तिधारकों को नोटिस दिया गया है, उनके मामलों की सुनवाई के लिए अंचल स्तर पर प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। सुनवाई को अनावश्यक लटकाया नहीं जाएगा। पटना का 47.55% हिस्सा आवासीय, फिर भी हर गली में खुलीं दुकानें बिहार गजट में प्रकाशित पटना के आधिकारिक भूमि-उपयोग आंकड़ों के मुताबिक, नगर निगम क्षेत्र के कुल 104.22 वर्ग किलोमीटर में से 49.56 वर्ग किलोमीटर यानी 47.55% हिस्सा केवल आवासीय उपयोग के लिए तय है। इसके मुकाबले वाणिज्यिक उपयोग के लिए महज 4.46% (4.65 वर्ग किमी) और मिश्रित उपयोग के लिए 3.37% (3.52 वर्ग किमी) क्षेत्र ही निर्धारित है। बावजूद इसके, रिहायशी कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियां पैर पसारती चली गईं। गजट के अनुसार, खाली व कृषि भूमि (18.40%) और मनोरंजक खुले स्थानों (3.20%) पर हुए इस अनियोजित निर्माण ने आज पूरे शहर की व्यवस्था को बिगाड़ दिया है। दुकानों और ऑफिसों की संख्या सबसे ज्यादा रिहायशी परिसरों में सबसे अधिक दुकानें और व्यावसायिक कार्यालय संचालित होते मिले हैं। इसके अलावा पार्किंग, मैरिज हॉल, अस्पताल, हॉस्टल, कोचिंग संस्थान, स्कूल, गोदाम, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट जैसी गतिविधियां भी चिन्हित की गई हैं। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, आवासीय इलाकों में 194 गेस्ट हाउस, 154 छोटे उद्योग और 106 होटल संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 15 कॉलेज, 39 हेल्थ क्लब, 70 नर्सिंग होम और 37 रेस्टोरेंट भी सूची में शामिल हैं। रिहायशी जोन में किन गतिविधियों की अनुमति पटना के रेजिडेंशियल जोन-1, रेजिडेंशियल जोन-2 और अर्बन सेंटर जोन में मुख्य रूप से आवासीय गतिविधियों की अनुमति है। यहां मकान, हॉस्टल, बोर्डिंग-लॉजिंग हाउस, नाइट शेल्टर और इंटीग्रेटेड टाउनशिप जैसी गतिविधियां हो सकती हैं। कुछ परिस्थितियों में बैंक और बेकरी-कन्फेक्शनरी जैसी गतिविधियों की भी अनुमति है। कॉलेज जैसी गतिविधियों के लिए निर्धारित शर्तों और विशेष अनुमति की जरूरत हो सकती है। नगर निगम अब नोटिस के जवाब और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगा।  

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