मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को अधिकारियों को पन्ना और छतरपुर जिलों के गांवों का दौरा करने तथा केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित लोगों की समस्याओं को समझने के निर्देश दिए। खजुराहो में परियोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यादव ने कहा कि यह परियोजना बुंदेलखंड के विकास में मील का पत्थर साबित होगी और इससे क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल तथा ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि विकास परियोजना के साथ प्रभावित और विस्थापित परिवारों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र विस्थापित परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ उनके घर तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने नए स्थानों पर निवास बना लिया है, वहां स्कूल, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। यादव ने पन्ना की रूंझ-मझगांव परियोजना के प्रभावित परिवारों को स्वीकृत अतिरिक्त राशि का शीघ्र भुगतान करने के भी निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जिन प्रभावितों के पास उम्र संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उनकी आयु का निर्धारण मेडिकल परीक्षण के आधार पर किया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को परियोजना की नियमित निगरानी करने और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वीडियो कॉफ्रेंस के माध्यम से जुड़े राज्य के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट को भी परियोजना की गांव-गांव निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया।
यादव ने बताया कि परियोजना पूरी होने पर मध्यप्रदेश में करीब 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी और 44 लाख से अधिक लोगों को पेयजल सुविधा मिलने की उम्मीद है। परियोजना में 103 मेगावाट जल विद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का भी प्रावधान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन–बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड एवं मध्य भारत के पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, विदिशा, रायसेन, शिवपुरी और दतिया जिलों के करीब 1,382 गांवों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।
बैठक में खजुराहो सांसद वी.डी. शर्मा, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, पन्ना, छतरपुर, बिजावर और राजनगर के विधायक तथा अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

