मोबाइल फोन के निर्माण में भारत को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 21 अगस्त को 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन निर्माण योजना अधिसूचित कर दी है। पांच साल की यह योजना मौजूदा वित्त वर्ष से लागू मानी जाएगी और वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगी। सरकार का जोर सिर्फ मोबाइल फोन बनाने की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि देश में इसके कलपुर्जों और उप-इकाइयों का उत्पादन बढ़ाने पर भी है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन के मुताबिक, योजना के तहत भारत में निर्मित मोबाइल फोन की पात्र बिक्री पर कंपनियों को 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा निर्धारित कलपुर्जों और उप-इकाइयों की खरीद भारत से करने पर 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जा सकेगा।
सरकार ने भारतीय कंपनियों को भी खास महत्व दिया है। भारतीय मोबाइल ब्रांडों को अधिकतम 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन मिलने की बात कही गई है। वहीं, अपने उत्पादों के डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास पर काम करने वाली कंपनियों को पात्र बिक्री पर अतिरिक्त 3 प्रतिशत प्रोत्साहन मिल सकता है। इसका उद्देश्य भारतीय कंपनियों को देश के साथ-साथ विदेशी बाजारों में विस्तार के लिए तैयार करना है।
बता दें कि नई योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 जुलाई को मंजूरी दी थी। सरकार को उम्मीद है कि पांच साल की अवधि में इसके तहत करीब 39 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन होगा और लगभग 60 हजार सीधे रोजगार पैदा होंगे।
यह योजना पुरानी उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के बाद शुरू हुई है, जिसकी अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई थी। पिछली योजना के दौरान मोबाइल फोन उत्पादन 11.61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा, जबकि लक्ष्य 8.12 लाख करोड़ रुपये का था। इसी तरह निवेश 20,500 करोड़ रुपये से अधिक रहा, जबकि निर्धारित लक्ष्य 7,000 करोड़ रुपये था।
गौरतलब है कि पिछली योजना से सैमसंग और भारत में एप्पल के उपकरण बनाने वाली कंपनियों समेत कई बड़ी वैश्विक कंपनियों को देश में उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली। मंत्रालय के अनुसार, इस योजना की शुरुआत के बाद भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में करीब 14 अरब डॉलर का निवेश हुआ है और मोबाइल फोन निर्माण से लगभग 12 लाख रोजगार जुड़े हैं।
अब सरकार का अगला लक्ष्य स्थानीय स्तर पर कलपुर्जों की हिस्सेदारी बढ़ाना है। एस. कृष्णन के अनुसार, मोबाइल फोन निर्माण में देश के भीतर होने वाला मूल्य संवर्धन करीब 15 प्रतिशत से बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया है। नई योजना के जरिए इसे और ऊपर ले जाने की कोशिश होगी।
मौजूद जानकारी के अनुसार, भारत मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। देश में इस्तेमाल होने वाले करीब 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन भारत में ही बनाए जाते हैं। 2014 से 2025 के बीच मोबाइल फोन निर्यात में 166 गुना वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में मोबाइल फोन की हिस्सेदारी करीब 61 प्रतिशत रही है।
सरकार का मानना है कि नई योजना से भारत में मोबाइल निर्माण का पैमाना बढ़ेगा, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और भारतीय कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा क्षमता बेहतर होगी।

