मध्य प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में स्थानीय स्व-सहायता समूहों के माध्यम से तैयार टीएचआर (टेक होम राशन) का वितरण प्रारंभ किया जा रहा है। राज्य सरकार ने बच्चों, गर्भवती-धात्री माताओं को पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराने के लिए यह व्यवस्था लागू की है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसी माह से नई टेक होम राशन (टीएचआर) व्यवस्था लागू की है। इसमें स्थानीय स्व-सहायता समूहों के माध्यम से हितग्राहियों को स्थानीय स्तर पर तैयार टीएचआर उपलब्ध कराया जा रहा है। विभाग ने कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले के बाद यह व्यवस्था लागू की है। आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को मिलता है गर्म पका भोजन सरकार का कहना है कि पूरक पोषण कार्यक्रम में तय प्रावधानों के अनुसार पात्र हितग्राहियों को साल भर में कम से कम 300 दिन पूरक पोषण सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अंतर्गत 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों पर रोज नाश्ता एवं गर्म पका भोजन दिया जा रहा है। वहीं 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं के लिए मंगलवार को गर्म पका भोजन तथा शेष दिनों में टीएचआर उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। 6 से 60 माह के अति गंभीर कुपोषित (एसएएम) तथा 6 से 72 माह के अति कम वजन (एसयूडब्ल्यू) बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषण आहार के रूप में भी स्थानीय स्तर पर तैयार टीएचआर दिया जा रहा है। पोषण ट्रैकर पर दर्ज होती है वजन और लंबाई-ऊंचाई बच्चों की पोषण स्थिति की नियमित निगरानी के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन एवं लंबाई-ऊंचाई मापकर पोषण ट्रैकर पर दर्ज किया जा रहा है। जो तय मापदंड से कम पोषित और लंबाई व हाईट वाले निकलते हैं, ऐसे चिन्हित बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण परामर्श और आवश्यक देखभाल के साथ जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य विभाग एवं पोषण पुनर्वास केंद्रों से समन्वय कर रेफरल की कार्रवाई की जाती है। हर महीने आयोजित 10 दिवसीय शारीरिक माप दिवसों में जन्म से 6 वर्ष तक के बच्चों की सघन स्क्रीनिंग एवं स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। चिन्हित एसएएम, एमएएम एवं एसयूडब्ल्यू बच्चों का मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम में पंजीयन कर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। मैदानी अमले द्वारा गृहभेंट के माध्यम से बच्चों का नियमित फॉलोअप और परिवारों को पोषण संबंधी परामर्श भी दिया जाता है। विशेष जनजातीय क्षेत्रों में पोषण सेवाओं पर ध्यान मध्यप्रदेश के विशेष जनजातीय क्षेत्रों में बच्चों एवं माताओं तक पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान के अंतर्गत जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से 681 नवीन आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन प्रारंभ किया गया है। सहरिया, बैगा एवं भारिया जैसे विशेष जनजातीय समूहों के क्षेत्रों में आंगनवाड़ी सेवाओं, पूरक पोषण आहार तथा बच्चों की वृद्धि एवं पोषण स्थिति की निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर नियमित स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य जांच, रेफरल और फॉलोअप की व्यवस्था की जा रही है।

