India vs Brazil: बाइचुंग भूटिया ने की Boycott की अपील, बोले- 30 करोड़ Football Development पर हों खर्च

India vs Brazil: बाइचुंग भूटिया ने की Boycott की अपील, बोले- 30 करोड़ Football Development पर हों खर्च

ब्राजील जैसी दुनिया की दिग्गज फुटबॉल टीम के खिलाफ भारत को खेलते देखने का सपना देश के करोड़ों प्रशंसकों का हो सकता है, लेकिन पूर्व भारतीय कप्तान बाइचुंग भूटिया ने इस मुकाबले को लेकर ही अलग राय रखी है। उन्होंने प्रशंसकों से प्रस्तावित दोस्ताना मुकाबले का बहिष्कार करने की अपील की है। भूटिया का कहना है कि इस आयोजन पर खर्च होने वाली रकम को भारतीय और खासकर पश्चिम बंगाल के फुटबॉल विकास में लगाया जाना ज्यादा फायदेमंद होगा।बाइचुंग भूटिया ने 420 ग्राम्स कार्यक्रम में कहा कि अगर प्रशंसक इस मुकाबले का बहिष्कार करते हैं तो इससे आयोजकों और फुटबॉल संघों को बड़ा संदेश जाएगा। उनके मुताबिक, इससे भविष्य में किसी बड़े आयोजन पर पैसा खर्च करने से पहले संबंधित संस्थाएं उसके फायदे पर भी विचार करेंगी।भूटिया ने पश्चिम बंगाल सरकार की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार इस मुकाबले के लिए पैसा देने या जुटाने की कोशिश कर रही है, तो उसी रकम को राज्य के खिलाड़ियों को तैयार करने में लगाया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया।गौरतलब है कि भारत ने शुरुआती दक्षिण-पूर्व एशिया कप में खेलने का मौका छोड़कर ब्राजील के खिलाफ दोस्ताना मुकाबला खेलने का फैसला किया है। इंडोनेशिया की मेजबानी में होने वाले इस टूर्नामेंट में भारत को आमंत्रित किया गया था। इसमें इंडोनेशिया के अलावा सिंगापुर और मलेशिया भी शामिल हैं। टूर्नामेंट का फाइनल 4 अक्टूबर को होना है, जबकि भारत और ब्राजील के बीच दोस्ताना मुकाबला 3 अक्टूबर को प्रस्तावित है।मौजूद जानकारी के अनुसार, इस मुकाबले के आयोजन पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की चर्चाएं हैं। हालांकि, भूटिया ने कहा कि इतनी बड़ी रकम को सिर्फ 90 मिनट के एक मुकाबले पर खर्च करने के बजाय लंबे समय की योजना के तहत इस्तेमाल किया जाना चाहिए।उन्होंने सुझाव दिया कि 30 करोड़ रुपये से अगले चार वर्षों में पश्चिम बंगाल के खिलाड़ियों को राष्ट्रमंडल खेलों के लिए तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने राज्य से ओलंपिक पदक विजेता तैयार करने और अलग-अलग क्षेत्रों में फुटसल के करीब 100 छोटे मैदान बनाने का सुझाव भी दिया।भूटिया का तर्क है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबले से एक दिन के लिए उत्साह जरूर पैदा होगा। दर्शक स्टेडियम पहुंचेंगे, मीडिया में चर्चा होगी और सरकार तथा आयोजकों को भी इससे प्रचार मिलेगा, लेकिन मुकाबला खत्म होने के बाद वह पैसा वापस नहीं आएगा। उनके अनुसार, अगर यही रकम आधारभूत ढांचे और खिलाड़ियों की तैयारी पर खर्च की जाए तो उसका लाभ कई वर्षों तक मिल सकता है।उन्होंने यह भी कहा कि ब्राजील के खिलाफ मुकाबला होने पर प्रशंसक उत्साहित होंगे, लेकिन इसके बाद भारतीय फुटबॉल के सामने मौजूद बुनियादी समस्याएं खत्म नहीं होंगी। इसलिए उनका जोर एक बड़े मुकाबले के बजाय ऐसी योजना पर है, जिससे आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, मैदान और सुविधाएं मिल सकें। उनके बयान ने भारतीय फुटबॉल में तात्कालिक रोमांच और दीर्घकालिक विकास के बीच चल रही बहस को फिर सामने ला दिया है। 

ब्राजील जैसी दुनिया की दिग्गज फुटबॉल टीम के खिलाफ भारत को खेलते देखने का सपना देश के करोड़ों प्रशंसकों का हो सकता है, लेकिन पूर्व भारतीय कप्तान बाइचुंग भूटिया ने इस मुकाबले को लेकर ही अलग राय रखी है। उन्होंने प्रशंसकों से प्रस्तावित दोस्ताना मुकाबले का बहिष्कार करने की अपील की है। भूटिया का कहना है कि इस आयोजन पर खर्च होने वाली रकम को भारतीय और खासकर पश्चिम बंगाल के फुटबॉल विकास में लगाया जाना ज्यादा फायदेमंद होगा।
बाइचुंग भूटिया ने 420 ग्राम्स कार्यक्रम में कहा कि अगर प्रशंसक इस मुकाबले का बहिष्कार करते हैं तो इससे आयोजकों और फुटबॉल संघों को बड़ा संदेश जाएगा। उनके मुताबिक, इससे भविष्य में किसी बड़े आयोजन पर पैसा खर्च करने से पहले संबंधित संस्थाएं उसके फायदे पर भी विचार करेंगी।
भूटिया ने पश्चिम बंगाल सरकार की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार इस मुकाबले के लिए पैसा देने या जुटाने की कोशिश कर रही है, तो उसी रकम को राज्य के खिलाड़ियों को तैयार करने में लगाया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया।
गौरतलब है कि भारत ने शुरुआती दक्षिण-पूर्व एशिया कप में खेलने का मौका छोड़कर ब्राजील के खिलाफ दोस्ताना मुकाबला खेलने का फैसला किया है। इंडोनेशिया की मेजबानी में होने वाले इस टूर्नामेंट में भारत को आमंत्रित किया गया था। इसमें इंडोनेशिया के अलावा सिंगापुर और मलेशिया भी शामिल हैं। टूर्नामेंट का फाइनल 4 अक्टूबर को होना है, जबकि भारत और ब्राजील के बीच दोस्ताना मुकाबला 3 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस मुकाबले के आयोजन पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की चर्चाएं हैं। हालांकि, भूटिया ने कहा कि इतनी बड़ी रकम को सिर्फ 90 मिनट के एक मुकाबले पर खर्च करने के बजाय लंबे समय की योजना के तहत इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि 30 करोड़ रुपये से अगले चार वर्षों में पश्चिम बंगाल के खिलाड़ियों को राष्ट्रमंडल खेलों के लिए तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने राज्य से ओलंपिक पदक विजेता तैयार करने और अलग-अलग क्षेत्रों में फुटसल के करीब 100 छोटे मैदान बनाने का सुझाव भी दिया।
भूटिया का तर्क है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबले से एक दिन के लिए उत्साह जरूर पैदा होगा। दर्शक स्टेडियम पहुंचेंगे, मीडिया में चर्चा होगी और सरकार तथा आयोजकों को भी इससे प्रचार मिलेगा, लेकिन मुकाबला खत्म होने के बाद वह पैसा वापस नहीं आएगा। उनके अनुसार, अगर यही रकम आधारभूत ढांचे और खिलाड़ियों की तैयारी पर खर्च की जाए तो उसका लाभ कई वर्षों तक मिल सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि ब्राजील के खिलाफ मुकाबला होने पर प्रशंसक उत्साहित होंगे, लेकिन इसके बाद भारतीय फुटबॉल के सामने मौजूद बुनियादी समस्याएं खत्म नहीं होंगी। इसलिए उनका जोर एक बड़े मुकाबले के बजाय ऐसी योजना पर है, जिससे आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, मैदान और सुविधाएं मिल सकें। उनके बयान ने भारतीय फुटबॉल में तात्कालिक रोमांच और दीर्घकालिक विकास के बीच चल रही बहस को फिर सामने ला दिया है।

​Hindi News – News in Hindi – Latest News in Hindi | Prabhasakshi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *