एटा की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग दलित किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में दोषी नजीम उर्फ नाजिम उर्फ मुन्ने खान को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 35 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। फैसला विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट नरेंद्र पाल सिंह राणा की अदालत ने सुनाया। 2020 में दर्ज हुआ था मुकदमा मामला वर्ष 2020 का है। मारहरा थाना क्षेत्र में पीड़िता के परिजनों ने आरोपी के खिलाफ अपहरण और दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपी नजीम उर्फ नाजिम उर्फ मुन्ने खान मारहरा थाना क्षेत्र के बजरिया का रहने वाला है। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोष सिद्ध मामला नाबालिग दलित किशोरी के यौन शोषण से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने गंभीरता से विवेचना की। जांच पूरी करने के बाद विवेचक ने आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद विशेष न्यायाधीश नरेंद्र पाल सिंह राणा ने आरोपी को दोषी माना और 10 साल के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। सजा के बाद जेल भेजा अदालत का फैसला आने के बाद दोषी नजीम उर्फ नाजिम उर्फ मुन्ने खान को जेल भेज दिया गया। मामले में अदालत के निर्णय के बाद पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

