सहरसा में जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पेपरलेस किए जाने के बाद खरीद-बिक्री प्रभावित हुई है। बिहार दस्तावेज नवीस संघ के आह्वान पर दस्तावेज नवीस 3 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसका सीधा असर जिला निबंधन कार्यालय के कामकाज पर पड़ा है। पहले जहां प्रतिदिन 100 से अधिक जमीन का निबंधन होता था, वहीं 3 से 21 अगस्त के बीच महज पांच पेपरलेस रजिस्ट्री होने का दावा किया गया है। इस नई व्यवस्था से जमीन बेचने वालों में भरोसे की कमी देखी जा रही है, जिससे खरीदार परेशान हैं। देखें, मौके से आई तस्वीरें… सिलसिलेवार पढ़ें,पूरा मामला… पेपरलेस प्रक्रिया से विक्रेता तैयार नहीं हो रहा दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम ने शुक्रवार को सहरसा जिला निबंधन कार्यालय पहुंचकर जमीन की रजिस्ट्री कराने आए लोगों से बातचीत की। सोनबरसा राज प्रखंड के फतेहपुर निवासी 40 वर्षीय रमेश कुमार ने बताया कि वह गांव के सुनील केडिया से 16 कट्ठा जमीन खरीदना चाहते हैं। करीब 15 दिनों से बातचीत चल रही थी, लेकिन पेपरलेस प्रक्रिया की जानकारी मिलने के बाद विक्रेता रजिस्ट्री के लिए तैयार नहीं हुआ। ऑनलाइन प्रक्रिया पर विक्रेता को भरोसा नहीं रमेश के अनुसार, पहले दस्तावेज नवीस द्वारा पूरी जानकारी लिखकर पढ़ाई जाती थी और गवाहों व संबंधित पक्षों के हस्ताक्षर होते थे। अब ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण विक्रेता को यह भरोसा नहीं हो रहा कि दस्तावेज में क्या दर्ज किया जा रहा है। नवहट्टा प्रखंड के रसलपुर गांव निवासी 70 वर्षीय ललन यादव ने भी अपनी परेशानी बताई। उन्हें गांव के अशोक मुखिया से 10 कट्ठा जमीन खरीदनी है, लेकिन पेपरलेस व्यवस्था की जानकारी मिलने के बाद विक्रेता ने रजिस्ट्री कराने से इनकार कर दिया। दस्तावेज में कई बातें अंग्रेजी में होने से परेशानी ललन यादव के मुताबिक, पहले मोहर्रिर दस्तावेज की पूरी जानकारी पढ़कर सुनाते थे, जिससे उन्हें समझ में आता था। अब दस्तावेज में कई बातें अंग्रेजी में होने के कारण भी लोगों को समझने में परेशानी हो रही है। तीन दिन से कार्यालय का चक्कर लगा रहे अमरेंद्र नवहट्टा प्रखंड के सतौर वार्ड नंबर 12 निवासी 65 वर्षीय अमरेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि उन्होंने गांव के ही एक व्यक्ति से 15 कट्ठा जमीन खरीदने की बात तय की है। वह तीन दिनों से विक्रेता को लेकर जिला निबंधन कार्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन हर बार बिना रजिस्ट्री कराए लौटना पड़ रहा है।
अमरेंद्र के मुताबिक, विक्रेता ने पेपरलेस प्रक्रिया की जानकारी लेने के बाद रजिस्ट्री कराने से मना कर दिया। उन्होंने बताया कि जमीन की खरीद के लिए विक्रेता को कुछ नगद राशि भी दे चुके हैं पहले दस्तावेज खुद पढ़कर समझ लेते थे लेकिन अब वह रजिस्ट्री को टाल रहा है। उनका कहना है कि पहले चार-पांच स्टांप पेपर पर दस्तावेज तैयार होता था, जिसे वे खुद पढ़कर समझ लेते थे। अब उन्हें डर है कि ऑनलाइन दस्तावेज में कहीं उनकी जमीन से संबंधित अधिक विवरण दर्ज न हो जाए।
उन्होंने जमीन की माप की नई शब्दावली को लेकर भी असमंजस जताया। कहा कि वे कट्ठा और बीघा जैसी पारंपरिक माप समझते हैं, लेकिन डिसमिल में जमीन का विवरण होने से आम लोगों को परेशानी हो रही है। दस्तावेज नवीस संघ ने गिनाईं पेपरलेस व्यवस्था की खामियां
बिहार दस्तावेज नवीस संघ के जिला सचिव रंजीत झा ने कहा कि दस्तावेज नवीस आम लोगों के लिए काम करते हैं और सरकार की ओर से उन्हें कोई वेतन नहीं मिलता है। उनका कहना है कि पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद लोग रजिस्ट्री कराने से ही कतरा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पहले स्टांप पेपर पर दस्तावेज हिंदी में तैयार होता था और सामान्यत: चार-पांच पन्नों में पूरी जानकारी रहती थी। अब पेपरलेस व्यवस्था में करीब 13 पन्नों का दस्तावेज तैयार होने की बात कही जा रही है। कई दस्तावेजों में जमाबंदी किस व्यक्ति के नाम है, इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं होने और केवल जमाबंदी संख्या दर्ज होने की शिकायत भी सामने आ रही है। इससे खरीदार और विक्रेता दोनों में संशय पैदा हो रहा है। रजिस्ट्री घटने से राजस्व पर भी असर
दस्तावेज नवीस संघ का कहना है कि पहले जिला निबंधन कार्यालय में प्रतिदिन 100 से अधिक रजिस्ट्री होती थी। इससे सरकार को बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होता था। संघ के अनुसार, अब रजिस्ट्री की संख्या बेहद कम हो गई है, जिससे सरकारी राजस्व पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
जमीन खरीदने-बेचने वाले लोगों का कहना है कि नई व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा पैदा करने के लिए प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और दस्तावेज की पूरी जानकारी स्थानीय भाषा में स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाए। लोगों का कहना है कि जब तक विक्रेताओं और खरीदारों को नई व्यवस्था पूरी तरह समझ में नहीं आएगी, तब तक जमीन की रजिस्ट्री में आ रही परेशानी दूर करना मुश्किल होगा। सहरसा में जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पेपरलेस किए जाने के बाद खरीद-बिक्री प्रभावित हुई है। बिहार दस्तावेज नवीस संघ के आह्वान पर दस्तावेज नवीस 3 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसका सीधा असर जिला निबंधन कार्यालय के कामकाज पर पड़ा है। पहले जहां प्रतिदिन 100 से अधिक जमीन का निबंधन होता था, वहीं 3 से 21 अगस्त के बीच महज पांच पेपरलेस रजिस्ट्री होने का दावा किया गया है। इस नई व्यवस्था से जमीन बेचने वालों में भरोसे की कमी देखी जा रही है, जिससे खरीदार परेशान हैं। देखें, मौके से आई तस्वीरें… सिलसिलेवार पढ़ें,पूरा मामला… पेपरलेस प्रक्रिया से विक्रेता तैयार नहीं हो रहा दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम ने शुक्रवार को सहरसा जिला निबंधन कार्यालय पहुंचकर जमीन की रजिस्ट्री कराने आए लोगों से बातचीत की। सोनबरसा राज प्रखंड के फतेहपुर निवासी 40 वर्षीय रमेश कुमार ने बताया कि वह गांव के सुनील केडिया से 16 कट्ठा जमीन खरीदना चाहते हैं। करीब 15 दिनों से बातचीत चल रही थी, लेकिन पेपरलेस प्रक्रिया की जानकारी मिलने के बाद विक्रेता रजिस्ट्री के लिए तैयार नहीं हुआ। ऑनलाइन प्रक्रिया पर विक्रेता को भरोसा नहीं रमेश के अनुसार, पहले दस्तावेज नवीस द्वारा पूरी जानकारी लिखकर पढ़ाई जाती थी और गवाहों व संबंधित पक्षों के हस्ताक्षर होते थे। अब ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण विक्रेता को यह भरोसा नहीं हो रहा कि दस्तावेज में क्या दर्ज किया जा रहा है। नवहट्टा प्रखंड के रसलपुर गांव निवासी 70 वर्षीय ललन यादव ने भी अपनी परेशानी बताई। उन्हें गांव के अशोक मुखिया से 10 कट्ठा जमीन खरीदनी है, लेकिन पेपरलेस व्यवस्था की जानकारी मिलने के बाद विक्रेता ने रजिस्ट्री कराने से इनकार कर दिया। दस्तावेज में कई बातें अंग्रेजी में होने से परेशानी ललन यादव के मुताबिक, पहले मोहर्रिर दस्तावेज की पूरी जानकारी पढ़कर सुनाते थे, जिससे उन्हें समझ में आता था। अब दस्तावेज में कई बातें अंग्रेजी में होने के कारण भी लोगों को समझने में परेशानी हो रही है। तीन दिन से कार्यालय का चक्कर लगा रहे अमरेंद्र नवहट्टा प्रखंड के सतौर वार्ड नंबर 12 निवासी 65 वर्षीय अमरेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि उन्होंने गांव के ही एक व्यक्ति से 15 कट्ठा जमीन खरीदने की बात तय की है। वह तीन दिनों से विक्रेता को लेकर जिला निबंधन कार्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन हर बार बिना रजिस्ट्री कराए लौटना पड़ रहा है।
अमरेंद्र के मुताबिक, विक्रेता ने पेपरलेस प्रक्रिया की जानकारी लेने के बाद रजिस्ट्री कराने से मना कर दिया। उन्होंने बताया कि जमीन की खरीद के लिए विक्रेता को कुछ नगद राशि भी दे चुके हैं पहले दस्तावेज खुद पढ़कर समझ लेते थे लेकिन अब वह रजिस्ट्री को टाल रहा है। उनका कहना है कि पहले चार-पांच स्टांप पेपर पर दस्तावेज तैयार होता था, जिसे वे खुद पढ़कर समझ लेते थे। अब उन्हें डर है कि ऑनलाइन दस्तावेज में कहीं उनकी जमीन से संबंधित अधिक विवरण दर्ज न हो जाए।
उन्होंने जमीन की माप की नई शब्दावली को लेकर भी असमंजस जताया। कहा कि वे कट्ठा और बीघा जैसी पारंपरिक माप समझते हैं, लेकिन डिसमिल में जमीन का विवरण होने से आम लोगों को परेशानी हो रही है। दस्तावेज नवीस संघ ने गिनाईं पेपरलेस व्यवस्था की खामियां
बिहार दस्तावेज नवीस संघ के जिला सचिव रंजीत झा ने कहा कि दस्तावेज नवीस आम लोगों के लिए काम करते हैं और सरकार की ओर से उन्हें कोई वेतन नहीं मिलता है। उनका कहना है कि पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद लोग रजिस्ट्री कराने से ही कतरा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पहले स्टांप पेपर पर दस्तावेज हिंदी में तैयार होता था और सामान्यत: चार-पांच पन्नों में पूरी जानकारी रहती थी। अब पेपरलेस व्यवस्था में करीब 13 पन्नों का दस्तावेज तैयार होने की बात कही जा रही है। कई दस्तावेजों में जमाबंदी किस व्यक्ति के नाम है, इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं होने और केवल जमाबंदी संख्या दर्ज होने की शिकायत भी सामने आ रही है। इससे खरीदार और विक्रेता दोनों में संशय पैदा हो रहा है। रजिस्ट्री घटने से राजस्व पर भी असर
दस्तावेज नवीस संघ का कहना है कि पहले जिला निबंधन कार्यालय में प्रतिदिन 100 से अधिक रजिस्ट्री होती थी। इससे सरकार को बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होता था। संघ के अनुसार, अब रजिस्ट्री की संख्या बेहद कम हो गई है, जिससे सरकारी राजस्व पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
जमीन खरीदने-बेचने वाले लोगों का कहना है कि नई व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा पैदा करने के लिए प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और दस्तावेज की पूरी जानकारी स्थानीय भाषा में स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाए। लोगों का कहना है कि जब तक विक्रेताओं और खरीदारों को नई व्यवस्था पूरी तरह समझ में नहीं आएगी, तब तक जमीन की रजिस्ट्री में आ रही परेशानी दूर करना मुश्किल होगा।

