तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस के कई विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों ने शुक्रवार को पार्टी नेतृत्व से राज्य की वन मंत्री कोंडा सुरेखा की बेटी द्वारा मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी व अन्य नेताओं के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर ‘‘कड़ी कार्रवाई’’ करने की मांग की। करीब 20 विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वे सुरेखा के इस बयान से भी असहमत हैं कि उनकी बेटी की टिप्पणियां उनके निजी विचार हैं। कांग्रेस विधायक वेमुला वीरेशम ने कहा कि वह और उनके सहयोगी मुख्यमंत्री के खिलाफ टिप्पणी करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग मुख्यमंत्री में खामियां निकालते हैं, उन्हें पार्टी में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।’’
वीरेशम ने कहा, ‘‘कोंडा सुरेखा ने अनुशासन समिति को दिए अपने जवाब में कहा कि उनका अपनी बेटी की टिप्पणियों से कोई लेना-देना नहीं है। अगर आपका इससे कोई लेना-देना नहीं है, तो आपने उन टिप्पणियों की निंदा क्यों नहीं की? हम पूछ रहे हैं कि जब आप मुख्यमंत्री के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, तो क्या ऐसी टिप्पणियों की निंदा करना आपकी जिम्मेदारी नहीं है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि सुरेखा की पिछली कुछ टिप्पणियों से भी पार्टी को नुकसान पहुंचा है और आग्रह किया कि अब कांग्रेस आला कमान या प्रदेश अध्यक्ष इस मामले में कड़ा फैसला लें।
विधायक ने मुख्यमंत्री से ऐसे लोगों को हटाने की मांग की, जो उनके अनुसार पार्टी और सरकार के लिए ‘‘सिरदर्द’’ बन गए हैं। वीरेशम ने पार्टी नेताओं से अपने विचार पार्टी के मंच पर रखने और मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणियों के लिए माफी मांगने की भी अपील की। कांग्रेस विधायक वेदमा बोज्जू ने कोमटिरेड्डी राजगोपाल रेड्डी और राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष जी. चिन्ना रेड्डी सहित अलग-अलग संदर्भों में पार्टी के अन्य नेताओं की हालिया टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई।
तेलंगाना कांग्रेस की अनुशासन समिति ने 19 अगस्त को कोंडा सुरेखा को नोटिस जारी कर उनकी बेटी सुष्मिता द्वारा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ की गई टिप्पणियों के संबंध में तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा था। सुरेखा ने 20 अगस्त को दिए अपने जवाब में कहा कि उनकी बेटी द्वारा की गई टिप्पणियों के लिए उनसे स्पष्टीकरण मांगना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि बेटी की टिप्पणियों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

