अररिया जिले के पलासी प्रखंड स्थित सुक्सेना पंचायत के आंगनवाड़ी केंद्र संख्या-116 की सेविका बीबी किशवर जहां ने एक अनूठी पहल की है। उन्होंने घरों में बेकार समझी जाने वाली अनुपयोगी वस्तुओं को बच्चों के लिए उपयोगी शिक्षण सामग्री और खिलौनों में बदल दिया है। बीबी किशवर जहां ने गत्ते, कार्डबोर्ड, खाली डिब्बे और बोतलों जैसी घरेलू सामग्रियों का उपयोग कर आकर्षक एवं शिक्षाप्रद खिलौने बनाए हैं। केंद्र पर बच्चों के लिए A से Z, 1 से 100 और क से ज्ञ तक अक्षर ज्ञान, रंगों व आकारों की पहचान से जुड़ी शिक्षण सामग्री भी तैयार की गई है। सामग्रियों के जरिए प्रभावी ढंग से सिखाया जा रहा उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र का एक मॉडल भी तैयार किया है, जो बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इन स्वयं निर्मित सामग्रियों के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में और करके सीखने के अवसर मिल रहे हैं। पढ़ाई को बोझिल बनाने के बजाय, इसे सरल और रोचक बनाया गया है। रंग, आकार, संख्या, अक्षर, पशु-पक्षी, फल-सब्जियों आदि से जुड़ी गतिविधियों को इन सामग्रियों के जरिए प्रभावी ढंग से सिखाया जा रहा है। इससे बच्चों की सीखने में रुचि बढ़ रही है और उनकी कल्पनाशीलता, रचनात्मकता तथा बौद्धिक विकास को प्रोत्साहन मिल रहा है। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि ‘कचरे को संसाधन में बदलकर सीखने का साधन’ बनाया गया है। हमेशा महंगे संसाधनों की ज़रूरत नहीं इसके जरिए बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, पुनर्चक्रण और उपलब्ध संसाधनों के सदुपयोग का संदेश भी मिल रहा है। बीबी किशवर जहां का यह प्रयास दर्शाता है कि गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा के लिए हमेशा महंगे संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि रचनात्मक सोच और व्यक्तिगत प्रयासों से भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इच्छाशक्ति, कल्पनाशीलता और बच्चों के प्रति समर्पण हो तो स्थानीय स्तर पर उपलब्ध साधारण वस्तुओं से भी प्रभावी शिक्षण सामग्री तैयार की जा सकती है। उनका यह नवाचार न केवल सुक्सेना पंचायत के बच्चों के लिए सीखने का नया अनुभव बन रहा है, बल्कि जिले के अन्य आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए भी प्रेरणादायी और अनुकरणीय उदाहरण बनकर सामने आया है। अररिया जिले के पलासी प्रखंड स्थित सुक्सेना पंचायत के आंगनवाड़ी केंद्र संख्या-116 की सेविका बीबी किशवर जहां ने एक अनूठी पहल की है। उन्होंने घरों में बेकार समझी जाने वाली अनुपयोगी वस्तुओं को बच्चों के लिए उपयोगी शिक्षण सामग्री और खिलौनों में बदल दिया है। बीबी किशवर जहां ने गत्ते, कार्डबोर्ड, खाली डिब्बे और बोतलों जैसी घरेलू सामग्रियों का उपयोग कर आकर्षक एवं शिक्षाप्रद खिलौने बनाए हैं। केंद्र पर बच्चों के लिए A से Z, 1 से 100 और क से ज्ञ तक अक्षर ज्ञान, रंगों व आकारों की पहचान से जुड़ी शिक्षण सामग्री भी तैयार की गई है। सामग्रियों के जरिए प्रभावी ढंग से सिखाया जा रहा उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र का एक मॉडल भी तैयार किया है, जो बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इन स्वयं निर्मित सामग्रियों के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में और करके सीखने के अवसर मिल रहे हैं। पढ़ाई को बोझिल बनाने के बजाय, इसे सरल और रोचक बनाया गया है। रंग, आकार, संख्या, अक्षर, पशु-पक्षी, फल-सब्जियों आदि से जुड़ी गतिविधियों को इन सामग्रियों के जरिए प्रभावी ढंग से सिखाया जा रहा है। इससे बच्चों की सीखने में रुचि बढ़ रही है और उनकी कल्पनाशीलता, रचनात्मकता तथा बौद्धिक विकास को प्रोत्साहन मिल रहा है। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि ‘कचरे को संसाधन में बदलकर सीखने का साधन’ बनाया गया है। हमेशा महंगे संसाधनों की ज़रूरत नहीं इसके जरिए बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, पुनर्चक्रण और उपलब्ध संसाधनों के सदुपयोग का संदेश भी मिल रहा है। बीबी किशवर जहां का यह प्रयास दर्शाता है कि गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा के लिए हमेशा महंगे संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि रचनात्मक सोच और व्यक्तिगत प्रयासों से भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इच्छाशक्ति, कल्पनाशीलता और बच्चों के प्रति समर्पण हो तो स्थानीय स्तर पर उपलब्ध साधारण वस्तुओं से भी प्रभावी शिक्षण सामग्री तैयार की जा सकती है। उनका यह नवाचार न केवल सुक्सेना पंचायत के बच्चों के लिए सीखने का नया अनुभव बन रहा है, बल्कि जिले के अन्य आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए भी प्रेरणादायी और अनुकरणीय उदाहरण बनकर सामने आया है।

