अररिया में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ने गाजर घास के दुष्प्रभावों और इसके प्रभावी नियंत्रण के प्रति किसानों व ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए एक अभियान चलाया। इस जागरूकता अभियान में केवीके के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और रावे (RAWE) विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। अभियान के दौरान किसानों और ग्रामीणों को गाजर घास से होने वाले कृषि, पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान की विस्तृत जानकारी दी गई। केवीके वैज्ञानिकों ने बताया कि गाजर घास एक तेजी से फैलने वाला हानिकारक खरपतवार है, जो फसलों की उत्पादकता को प्रभावित करता है। इसके अत्यधिक फैलाव से कृषि भूमि की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। नियमित निगरानी और समय पर नियंत्रण आवश्यक वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि गाजर घास पर्यावरण के लिए भी समस्या पैदा करती है। इसके संपर्क में आने से मनुष्यों और पशुओं में एलर्जी तथा त्वचा संबंधी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। किसानों को सलाह दी गई कि गाजर घास का नियंत्रण समय रहते करना बेहद जरूरी है। वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से बताया कि गाजर घास में फूल और बीज बनने से पहले ही इसे उखाड़कर या अनुशंसित वैज्ञानिक विधियों से नियंत्रित कर दिया जाए। बीज बनने के बाद पौधे हटाने से इसका प्रसार बढ़ सकता है। इसलिए खेतों, मेड़ों, खाली भूमि, सड़क किनारे तथा अन्य स्थानों पर उगने वाली गाजर घास की नियमित निगरानी और समय पर नियंत्रण आवश्यक है। स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण का संदेश रावे विद्यार्थियों ने भी ग्रामीणों से संवाद कर गाजर घास की पहचान, दुष्प्रभाव और रोकथाम के उपायों के बारे में जानकारी साझा की। किसानों को इसके प्रसार को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संदेश दिया गया। इस अभियान के माध्यम से गाजर घास मुक्त खेत, सुरक्षित कृषि और स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण का संदेश दिया गया। वैज्ञानिकों और रावे विद्यार्थियों की सहभागिता ने इस जागरूकता कार्यक्रम को प्रभावी बनाया। अररिया में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ने गाजर घास के दुष्प्रभावों और इसके प्रभावी नियंत्रण के प्रति किसानों व ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए एक अभियान चलाया। इस जागरूकता अभियान में केवीके के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और रावे (RAWE) विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। अभियान के दौरान किसानों और ग्रामीणों को गाजर घास से होने वाले कृषि, पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान की विस्तृत जानकारी दी गई। केवीके वैज्ञानिकों ने बताया कि गाजर घास एक तेजी से फैलने वाला हानिकारक खरपतवार है, जो फसलों की उत्पादकता को प्रभावित करता है। इसके अत्यधिक फैलाव से कृषि भूमि की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। नियमित निगरानी और समय पर नियंत्रण आवश्यक वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि गाजर घास पर्यावरण के लिए भी समस्या पैदा करती है। इसके संपर्क में आने से मनुष्यों और पशुओं में एलर्जी तथा त्वचा संबंधी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। किसानों को सलाह दी गई कि गाजर घास का नियंत्रण समय रहते करना बेहद जरूरी है। वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से बताया कि गाजर घास में फूल और बीज बनने से पहले ही इसे उखाड़कर या अनुशंसित वैज्ञानिक विधियों से नियंत्रित कर दिया जाए। बीज बनने के बाद पौधे हटाने से इसका प्रसार बढ़ सकता है। इसलिए खेतों, मेड़ों, खाली भूमि, सड़क किनारे तथा अन्य स्थानों पर उगने वाली गाजर घास की नियमित निगरानी और समय पर नियंत्रण आवश्यक है। स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण का संदेश रावे विद्यार्थियों ने भी ग्रामीणों से संवाद कर गाजर घास की पहचान, दुष्प्रभाव और रोकथाम के उपायों के बारे में जानकारी साझा की। किसानों को इसके प्रसार को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संदेश दिया गया। इस अभियान के माध्यम से गाजर घास मुक्त खेत, सुरक्षित कृषि और स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण का संदेश दिया गया। वैज्ञानिकों और रावे विद्यार्थियों की सहभागिता ने इस जागरूकता कार्यक्रम को प्रभावी बनाया।

