समस्तीपुर रजिस्ट्री कार्यालय में कातिबों की अनिश्चितकालीन हड़ताल:पेपरलेस व्यवस्था के विरोध में कामकाज ठप, बोले- 40 साल पुरानी रोजी-रोटी पर संकट

समस्तीपुर रजिस्ट्री कार्यालय में कातिबों की अनिश्चितकालीन हड़ताल:पेपरलेस व्यवस्था के विरोध में कामकाज ठप, बोले- 40 साल पुरानी रोजी-रोटी पर संकट

समस्तीपुर रजिस्ट्री ऑफिस में पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के विरोध में कातिबों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस कारण रजिस्ट्री कार्यालय का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। हड़ताल के चलते सोमवार से अब तक एक भी दस्तावेज की रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। कातिबों का कहना है कि नई व्यवस्था ने उनकी 40 साल पुरानी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर दिया है। बिहार राज्य नवी संघ के राज्य महामंत्री सुबेष कुमार सिंह ने बताया कि सैकड़ों कातिब पिछले करीब 40 वर्षों से निबंधन कार्यालय से जुड़कर दस्तावेज लेखन का काम कर रहे हैं। इसी कार्य से उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है। कातिब बोले- पेपरलेस व्यवस्था में हमारी भूमिका पूरी तरह खत्म कातिबों के अनुसार, सरकार द्वारा लागू की गई पेपरलेस व्यवस्था में दस्तावेज तैयार करने और रजिस्ट्री प्रक्रिया में उनकी भूमिका लगभग समाप्त हो गई है। इससे लंबे समय से इस पेशे से जुड़े सैकड़ों लोगों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। हड़ताल पर गए कातिबों ने स्पष्ट किया कि वे सरकार की डिजिटल व्यवस्था के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि, उनका कहना है कि ऐसी व्यवस्था लागू करने से पहले उनके रोजगार और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उचित उपाय किए जाने चाहिए। कातिबों का दावा है कि यह समस्या केवल समस्तीपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बिहार में पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद इस पेशे से जुड़े लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है। उन्होंने सरकार से इस मामले पर गंभीरता से विचार करने और डिजिटल व्यवस्था के साथ-साथ उनके रोजगार को भी सुरक्षित रखने का रास्ता निकालने की अपील की है। इधर, कातिबों के काम बंद करने से निबंधन कार्यालय आने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रजिस्ट्री कराने वाले अनिल कुमार, पवन कुमार अमर कुमार ने बताया कि डिजिटल रजिस्ट्री से उन लोगों को परेशानी हो रही है ।कार्यालय परिसर में भी सामान्य दिनों की अपेक्षा गतिविधियां काफी कम नजर आ रही हैं। कातिबों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता और सरकार की ओर से उनके रोजगार को लेकर ठोस पहल नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रखने पर विचार किया जाएगा। अब देखना होगा कि कातिबों की हड़ताल के बीच प्रशासन और सरकार की ओर से उनकी मांगों को लेकर क्या पहल की जाती है। रजिस्टार अमित कुमार ने बताया कि सरकार के द्वारा पेपर लेस व्यवस्था किए जाने के बाद कातिबों को इसका स्वागत करना चाहिए। इस व्यवस्था से कातिबों को कोई नुकसान नहीं होगा। समस्तीपुर रजिस्ट्री ऑफिस में पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के विरोध में कातिबों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस कारण रजिस्ट्री कार्यालय का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। हड़ताल के चलते सोमवार से अब तक एक भी दस्तावेज की रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। कातिबों का कहना है कि नई व्यवस्था ने उनकी 40 साल पुरानी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर दिया है। बिहार राज्य नवी संघ के राज्य महामंत्री सुबेष कुमार सिंह ने बताया कि सैकड़ों कातिब पिछले करीब 40 वर्षों से निबंधन कार्यालय से जुड़कर दस्तावेज लेखन का काम कर रहे हैं। इसी कार्य से उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है। कातिब बोले- पेपरलेस व्यवस्था में हमारी भूमिका पूरी तरह खत्म कातिबों के अनुसार, सरकार द्वारा लागू की गई पेपरलेस व्यवस्था में दस्तावेज तैयार करने और रजिस्ट्री प्रक्रिया में उनकी भूमिका लगभग समाप्त हो गई है। इससे लंबे समय से इस पेशे से जुड़े सैकड़ों लोगों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। हड़ताल पर गए कातिबों ने स्पष्ट किया कि वे सरकार की डिजिटल व्यवस्था के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि, उनका कहना है कि ऐसी व्यवस्था लागू करने से पहले उनके रोजगार और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उचित उपाय किए जाने चाहिए। कातिबों का दावा है कि यह समस्या केवल समस्तीपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बिहार में पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद इस पेशे से जुड़े लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है। उन्होंने सरकार से इस मामले पर गंभीरता से विचार करने और डिजिटल व्यवस्था के साथ-साथ उनके रोजगार को भी सुरक्षित रखने का रास्ता निकालने की अपील की है। इधर, कातिबों के काम बंद करने से निबंधन कार्यालय आने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रजिस्ट्री कराने वाले अनिल कुमार, पवन कुमार अमर कुमार ने बताया कि डिजिटल रजिस्ट्री से उन लोगों को परेशानी हो रही है ।कार्यालय परिसर में भी सामान्य दिनों की अपेक्षा गतिविधियां काफी कम नजर आ रही हैं। कातिबों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता और सरकार की ओर से उनके रोजगार को लेकर ठोस पहल नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रखने पर विचार किया जाएगा। अब देखना होगा कि कातिबों की हड़ताल के बीच प्रशासन और सरकार की ओर से उनकी मांगों को लेकर क्या पहल की जाती है। रजिस्टार अमित कुमार ने बताया कि सरकार के द्वारा पेपर लेस व्यवस्था किए जाने के बाद कातिबों को इसका स्वागत करना चाहिए। इस व्यवस्था से कातिबों को कोई नुकसान नहीं होगा।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *