गिरिडीह जिले के गांडेय प्रखंड स्थित मानियाडीह गांव के किसान भूषण प्रसाद वर्मा ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर खेती को लाभप्रद बनाया है। वे धनिया की खेती से एक माह में 2 से 3 लाख रुपए की कमाई कर ले रहे हैं। अब वो अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। भूषण प्रसाद वर्मा मुख्य रूप से धनिया की खेती करते हैं। वे मेड़ बनाकर खेती करने की सलाह देते हैं, जिससे उत्पादन बेहतर होता है। मेड़ पर फसल लगाने से पानी से सड़ने की समस्या कम होती है और खरपतवार भी नियंत्रित रहते हैं। 80 किलो बीज की बुआई हो चुकी
सिंचाई के लिए वे स्प्रिंकलर (फुहारा सिंचाई) यंत्र का उपयोग करते हैं, जिससे पानी की बचत होती है और फसल को आवश्यकतानुसार पानी मिल जाता है। भूषण के बेटे प्रदीप वर्मा के अनुसार, इस वर्ष उन्होंने धनिया की खेती के लिए लगभग तीन क्विंटल बीज लगाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से 80 किलो बीज की बुआई हो चुकी है। वे साल में कई बार धनिया की फसल लेते हैं और इस वर्ष अब तक तीन बार खेती कर चुके हैं। उनकी मेहनत और आधुनिक तकनीक से खेतों में अच्छी पैदावार मिल रही है। किसान भूषण प्रसाद वर्मा बताते हैं कि उनकी धनिया की फसल का उत्पादन लगभग 200 क्विंटल तक पहुंच जाता है। इससे उन्हें हर महीने करीब दो से तीन लाख रुपए की आय होती है। उनके खेतों में उगाई गई धनिया की मांग गिरिडीह जिले के साथ-साथ झारखंड के कई अन्य जिलों और पश्चिम बंगाल के आसनसोल तक है। स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ा
भूषण प्रसाद वर्मा की खेती केवल उनके परिवार की ही आर्थिक स्थिति को मजबूत नहीं कर रही, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार का भी जरिया बनी है। उनकी खेती में लगभग 10 से 15 स्थानीय महिलाओं को काम मिलता है। भूषण बताते हैं कि धनिया का बाजार भाव मौसम और मांग के अनुसार लगातार बदलता रहता है। कभी धनिया 300 रुपए किलो तक बिक जाता है, तो कभी इसका भाव घटकर 50 रुपए किलो तक पहुंच जाता है। कृषि से बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है: भूषण वर्मा
इसके बावजूद आधुनिक कृषि तकनीक, बेहतर उत्पादन और बाजार की सही समझ के बल पर उन्होंने खेती को आर्थिक मजबूती और रोजगार का माध्यम बना लिया है। भूषण वर्मा का कहना है कि किसान यदि पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और बाजार की मांग को समझकर खेती करें, तो कृषि से बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है। गिरिडीह जिले के गांडेय प्रखंड स्थित मानियाडीह गांव के किसान भूषण प्रसाद वर्मा ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर खेती को लाभप्रद बनाया है। वे धनिया की खेती से एक माह में 2 से 3 लाख रुपए की कमाई कर ले रहे हैं। अब वो अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। भूषण प्रसाद वर्मा मुख्य रूप से धनिया की खेती करते हैं। वे मेड़ बनाकर खेती करने की सलाह देते हैं, जिससे उत्पादन बेहतर होता है। मेड़ पर फसल लगाने से पानी से सड़ने की समस्या कम होती है और खरपतवार भी नियंत्रित रहते हैं। 80 किलो बीज की बुआई हो चुकी
सिंचाई के लिए वे स्प्रिंकलर (फुहारा सिंचाई) यंत्र का उपयोग करते हैं, जिससे पानी की बचत होती है और फसल को आवश्यकतानुसार पानी मिल जाता है। भूषण के बेटे प्रदीप वर्मा के अनुसार, इस वर्ष उन्होंने धनिया की खेती के लिए लगभग तीन क्विंटल बीज लगाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से 80 किलो बीज की बुआई हो चुकी है। वे साल में कई बार धनिया की फसल लेते हैं और इस वर्ष अब तक तीन बार खेती कर चुके हैं। उनकी मेहनत और आधुनिक तकनीक से खेतों में अच्छी पैदावार मिल रही है। किसान भूषण प्रसाद वर्मा बताते हैं कि उनकी धनिया की फसल का उत्पादन लगभग 200 क्विंटल तक पहुंच जाता है। इससे उन्हें हर महीने करीब दो से तीन लाख रुपए की आय होती है। उनके खेतों में उगाई गई धनिया की मांग गिरिडीह जिले के साथ-साथ झारखंड के कई अन्य जिलों और पश्चिम बंगाल के आसनसोल तक है। स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ा
भूषण प्रसाद वर्मा की खेती केवल उनके परिवार की ही आर्थिक स्थिति को मजबूत नहीं कर रही, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार का भी जरिया बनी है। उनकी खेती में लगभग 10 से 15 स्थानीय महिलाओं को काम मिलता है। भूषण बताते हैं कि धनिया का बाजार भाव मौसम और मांग के अनुसार लगातार बदलता रहता है। कभी धनिया 300 रुपए किलो तक बिक जाता है, तो कभी इसका भाव घटकर 50 रुपए किलो तक पहुंच जाता है। कृषि से बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है: भूषण वर्मा
इसके बावजूद आधुनिक कृषि तकनीक, बेहतर उत्पादन और बाजार की सही समझ के बल पर उन्होंने खेती को आर्थिक मजबूती और रोजगार का माध्यम बना लिया है। भूषण वर्मा का कहना है कि किसान यदि पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और बाजार की मांग को समझकर खेती करें, तो कृषि से बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है।

