उत्तर प्रदेश में ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए यात्री व डिलीवरी सेवाएं देने वाले एग्रीगेटर्स के लिए परिवहन विभाग ने लाइसेंस की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है। एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत विभाग ने upmyfleet.com पोर्टल शुरू किया है। अब एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं को लाइसेंस के लिए इसी पोर्टल पर आवेदन करना होगा। पहले से सेवाएं दे रही कंपनियों को भी जल्द लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा, जबकि नई कंपनी बिना लाइसेंस के एग्रीगेटर या डिलीवरी सेवा शुरू नहीं कर सकेगी। परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की गाइडलाइन के तहत पोर्टल तैयार किया गया है। आवेदन के समय 25 हजार रुपये फीस देनी होगी। लाइसेंस जारी करने की फीस पांच लाख रुपये तय की गई है। ऑनलाइन आने वाले आवेदनों पर संबंधित प्राधिकरण फैसला करेगा। वाहनों की संख्या के हिसाब से देनी होगी सिक्योरिटी मनी पॉलिसी में एग्रीगेटर की फ्लीट के हिसाब से सिक्योरिटी मनी भी तय की गई है। 100 बसों या 1,000 अन्य मोटर वाहनों तक के लिए 10 लाख रुपये की सुरक्षा राशि देनी होगी। 1,000 बसों या 10 हजार अन्य वाहनों तक यह राशि 25 लाख रुपये होगी। इससे अधिक वाहनों की फ्लीट होने पर 50 लाख रुपये की सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी। ड्राइवर का चरित्र सत्यापन और मनोवैज्ञानिक परीक्षण यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर पॉलिसी में कई प्रावधान किए गए हैं। वाहनों की लाइव ट्रैकिंग के साथ प्रत्येक ऑनबोर्ड ड्राइवर का चरित्र सत्यापन और मनोवैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा। ड्राइवरों को समय-समय पर रिफ्रेशर ट्रेनिंग भी दी जाएगी। यात्रियों की शिकायतों के निस्तारण के लिए हर एग्रीगेटर को ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफिसर नियुक्त करना होगा। पॉलिसी में यात्रियों के लिए बीमा की व्यवस्था भी शामिल है। वहीं प्रत्येक चालक के कल्याण के लिए एग्रीगेटर को पांच लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध कराना होगा। बेस फेयर से 50% से ज्यादा नहीं बढ़ सकेगा किराया एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी किराया बढ़ोतरी पर भी रोक लगाने की व्यवस्था की गई है। डायनेमिक प्राइसिंग के दौरान निर्धारित बेस फेयर से अधिकतम 50 प्रतिशत ज्यादा किराया ही लिया जा सकेगा। वहीं ट्रिप बुक होने के बाद निर्धारित समय तक यात्री को पिकअप नहीं करने पर चालक पर 100 रुपये की पेनाल्टी लगेगी। इसका लाभ यात्री को अगली ट्रिप में दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, NCR में निगरानी पॉलिसी में वाहनजनित वायु प्रदूषण कम करने और एग्रीगेटर की फ्लीट को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर ले जाने का प्रावधान भी किया गया है। खासकर एनसीआर में चलने वाले वाहनों की पोर्टल के जरिए लगातार निगरानी की जाएगी। इसके अलावा लाइसेंस की शर्तों या मोटर वाहन अधिनियम और नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर पेनाल्टी लगाई जा सकेगी। परिवहन विभाग के मुताबिक पॉलिसी का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, किफायती और आसानी से उपलब्ध परिवहन सेवा देना है। इसके दायरे में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कुरियर, पैकेज और पार्सल की डिलीवरी के लिए चालक को विक्रेता, ई-कॉमर्स इकाई या खरीदार से जोड़ने वाली सेवाएं भी शामिल होंगी।

