स्मार्ट कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस परियोजना में काम कर रहे कर्मचारियों को अब बिना नोटिस और उनका पक्ष सुने नौकरी से नहीं हटाया जा सकेगा। परिवहन विभाग ने कर्मचारियों की सेवा, तबादले और वेतन भुगतान को लेकर कार्यदायी संस्थाओं पर कई पाबंदियां लगाई हैं। विभाग ने साफ किया है कि किसी कर्मचारी को सेवा से हटाने से पहले उसे नोटिस देना और सुनवाई का मौका देना जरूरी होगा। परियोजना के तहत प्रदेश के अलग-अलग जिलों, सेंट्रलाइज्ड कार्ड प्रिंटिंग सेंटर (सीसीपीसी) और परिवहन मुख्यालय में कार्यदायी संस्थाओं के जरिए कर्मचारी तैनात हैं। परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर सिंह के मुताबिक, इन कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामलों में मनमानी रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। मनमाने तबादले पर भी रोक विभाग ने कर्मचारियों के तबादले को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। किसी कर्मचारी को एक जिले या स्थान से दूसरे जिले या स्थान पर भेजने से पहले मुख्यालय को इसकी जानकारी देना और जरूरी होने पर अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसी तरह परियोजना में नए कर्मचारियों की नियुक्ति भी मुख्यालय को जानकारी दिए बिना नहीं की जा सकेगी। नई तैनाती में संबंधित कर्मचारी के अनुबंध की शर्तों और परिवहन आयुक्त की ओर से तय मैनपावर संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। सात तारीख तक देना होगा वेतन का हिसाब कर्मचारियों के वेतन भुगतान को लेकर भी जवाबदेही तय की गई है। हर कर्मचारी को महीने में कितना वेतन दिया गया, इसका पूरा विवरण अगले महीने की सात तारीख तक मुख्यालय को उपलब्ध कराना होगा। विभाग की इस व्यवस्था से कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी या गड़बड़ी पर भी निगरानी रखी जा सकेगी। परिवहन विभाग का जोर इस बात पर है कि स्मार्ट कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस परियोजना में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ सेवा संबंधी मामलों में पारदर्शी तरीके से कार्रवाई हो और कार्यदायी संस्थाएं अपने स्तर पर मनमाने फैसले न ले सकें।

