Alwar News: जयपुर संभाग के 12 शिक्षकों से वन-टू-वन संवाद, पीएमश्री स्कूल और छात्रावासों का भी निरीक्षण

Alwar News: जयपुर संभाग के 12 शिक्षकों से वन-टू-वन संवाद, पीएमश्री स्कूल और छात्रावासों का भी निरीक्षण

राजकीय नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेवात बालिका आवासीय विद्यालय चनिया का बास, महुआ खुर्द में बुधवार को प्रदेश स्तरीय बातचीत कार्यक्रम का पहला एपिसोड हुआ। कार्यक्रम की थीम ‘बालिकाओं का नामांकन एवं उपस्थिति’ रही। राज्य परियोजना समन्वयक एवं आयुक्त राजस्थान शिक्षा परिषद जयपुर डॉ. रश्मि शर्मा, अतिरिक्त निदेशक कृष्णा शर्मा और उपायुक्त बालिका शिक्षा ने जयपुर संभाग के 12 शिक्षकों से वन-टू-वन संवाद कर स्कूलों की जमीनी स्थिति जानी।

शिक्षकों से स्कूलों में आ रही दिक्कतों, कम नामांकन के कारणों, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति बढ़ाने और कमजोर बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के उपायों पर चर्चा की गई। शिक्षकों ने संसाधनों की कमी से लेकर विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर तक की चुनौतियां अधिकारियों के सामने रखीं। कार्यक्रम में सीडीईओ महेश कुमार गुप्ता, डीईओ माध्यमिक मनोज कुमार शर्मा, एडीपीसी समसा महेश कुमार मेहता और डीईओ प्रारंभिक देवेन्द्र कुमार मौजूद रहे। मंच संचालन डॉ. दीपक शर्मा ने किया।

पीएमश्री स्कूल और छात्रावास देखे

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने पीएमश्री स्कूल राजगढ़, आवासीय छात्रावास पिनान और आवासीय विद्यालय चनिया का बास का निरीक्षण किया। व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ बालिकाओं से भोजन, छात्रावास की सुविधाओं और पढ़ाई को लेकर सीधे फीडबैक लिया गया। अधिकारियों ने विद्यार्थियों से बातचीत कर यह भी जाना कि उन्हें स्कूल और छात्रावास में किस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं।

खुले मंच पर शिक्षकों ने रखी समस्याएं

संवाद कार्यक्रम में जयपुर संभाग के सभी 12 शिक्षकों ने बारी-बारी से अपने स्कूल की वास्तविक स्थिति साझा की। उन्होंने नामांकन बढ़ाने में आ रही परेशानियों, संसाधनों की कमी और विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर से जुड़ी चुनौतियों पर सवाल किए। अधिकारियों ने शिक्षकों के सुझाव सुने और व्यावहारिक समाधान पर चर्चा की। डॉ. रश्मि शर्मा ने अलवर शिक्षा विभाग के कार्मिकों को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए।

किस स्कूल में क्या स्थिति

स्कूल और छात्रावास में करीब 100 बालिकाओं का नामांकन है, लेकिन व्यवस्था संभालने के लिए केवल दो लोग लगे हैं। भवन और कक्षाएं पर्याप्त हैं, लेकिन चार और कार्मिकों की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चे भी स्कूल आ रहे हैं, जिन्होंने पहले कभी स्कूल नहीं देखा। उन्हें भी शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है – शबनम, नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेवात बालिका आवासीय विद्यालय, जमालपुर

स्कूल में 97 विद्यार्थियों का नामांकन है। गांव में बालकों को निजी स्कूल में भेजने की धारणा बनी हुई है। कमजोर विद्यार्थियों के लिए अलग समूह बनाया गया है और अच्छे विद्यार्थी उनकी पढ़ाई में सहयोग कर रहे हैं – राजेन्द्र प्रसाद मीणा, बडबेरा

उनके स्कूल में पहले 100 विद्यार्थियों का नामांकन था, जो बढ़कर 150 हो गया है। संसाधनों की कमी के कारण अब और नामांकन नहीं हो पा रहा। स्कूल में चार कमरे हैं। कक्षा आठ के बाद बालिकाओं की पढ़ाई जारी रखने को लेकर अभिभावकों में जागरुकता की कमी बड़ी चुनौती है। अभिभावकों से संवाद कर इसमें सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं – मनोज कुमार शर्मा, उमरैण

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