एसडीओ कोर्ट ने मांगा खाता स्टेटमेंट-एग्रीमेंट:दोनों पक्षों से लिखित जवाब तलब, मशरूम क्लस्टर में वित्तीय गड़बड़ी में हुई सुनवाई

एसडीओ कोर्ट ने मांगा खाता स्टेटमेंट-एग्रीमेंट:दोनों पक्षों से लिखित जवाब तलब, मशरूम क्लस्टर में वित्तीय गड़बड़ी में हुई सुनवाई

मशरूम क्लस्टर के नाम पर लिए गए कर्ज और वित्तीय अनियमितता का मामले में बुधवार काे एसडीओ पूर्वी के न्यायालय सुनवाई हुई। इसमें छह जीविका दीदियों समेत मामले से जुड़े सभी पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा। जीविका दीदियों ने तीन पक्षों को जिम्मेदार ठहराया है। इनमें पहला एजेंसी, दूसरी जीविका डीपीएम और तीसरा बैंक के अधिकारी शामिल है। सुनवाई के दौरान जीविका की डीपीएम अनीशा गांगुली ने कहा कि उन्हें बैंक खाते और उसके स्टेटमेंट की जानकारी नहीं है। एसडीओ पूर्वी न्यायालय ने उन्हें संबंधित ग्रामीण बैंक से खाता संख्या और स्टेटमेंट प्राप्त कर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले में अब अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी। न्यायालय ने दोनों पक्षों से लिखित पक्ष मांगा है। साथ ही क्लस्टर से संबंधित एग्रीमेंट की प्रति भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। एक तरफ छह जीविका दीदियां, दूसरी ओर एजेंसी-डीपीएम और बैंक बुधवार की सुनवाई में एक पक्ष में छह जीविका दीदियों को रखा गया। दूसरे पक्ष में ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी, उसके निदेशक आशुतोष मंगलम, जीविका डीपीएम अनीशा गांगुली और उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक की बोचहां और मुशहरी शाखाओं के प्रबंधक शामिल हैं। सुनवाई में जीविका दीदियों की ओर से कर्ज की राशि, मशरूम क्लस्टर के संचालन और कथित तौर पर राशि के इस्तेमाल से जुड़े सवाल उठाए गए। वहीं दूसरे पक्ष ने भी अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को लेकर न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा। दीदियाें का आराेप, पहले कर्ज का बोझ, अब तारीख पर तारीख सुनवाई के बाद जीविका दीदियों में नाराजगी साफ दिखी। मुशहरी ब्लॉक की विशाल सीएलएफ से जुड़ी निभा सिंह ने कहा कि वे गरीब महिलाएं हैं। बार-बार कोर्ट आने में समय और पैसे दोनों खर्च होते हैं। उनके अनुसार, महिलाओं पर पहले से ही करीब पांच लाख रुपये तक के कर्ज का बोझ बताया जा रहा है। निभा सिंह ने कहा कि उन्हें न्यायालय से न्याय की उम्मीद है, लेकिन यदि सुनवाई लगातार आगे बढ़ती रही तो वे अपनी आवाज दिल्ली तक ले जाने से भी पीछे नहीं हटेंगी। जीविका दीदियों ने अपनी मौजूदा स्थिति के लिए तीन पक्षों को जिम्मेदार ठहराया है। उनके अनुसार इनमें ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी, जीविका की डीपीएम और संबंधित बैंक अधिकारी शामिल हैं। महिलाओं का आरोप है कि क्लस्टर के लिए लोन स्वीकृत और वितरित करने से पहले बैंक स्तर पर योजना, क्लस्टर और कार्य की स्थिति का समुचित सत्यापन होना चाहिए था। एजेंसी पर लोन की राशि निकलवानेका आरोप लगाया गया है। वहीं डीपीएम पर महिलाओं ने दबाव बनाने और शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। ये सभी आरोप जीविका दीदियों की ओर से लगाए गए हैं और इनकी वास्तविकता न्यायालय की सुनवाई व जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। सादे कागज पर कराए गए थे हस्ताक्षर निभा सिंह ने आरोप लगाया कि महिलाओं को बैंक में बुलाकर दस्तावेज समझाने के बजाय कई बार सादे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए जाते थे। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान महिलाओं पर दबाव भी बनाया जाता था। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की अंतिम स्थिति न्यायालय के समक्ष लिखित जवाब आने और मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगी। बोचहां की फूलमाला सीएलएफ से जुड़ी जीविका दीदी संगीता कुमारी ने कहा कि सुनवाई में बैंक मैनेजर, एजेंसी निदेशक, डीपीएम और जीविका दीदियों की बातें सुनी गईं। अब अगली तारीख मिल गई है। उन्होंने कहा कि वे गरीब महिलाएं हैं। पहले से कर्ज का बोझ है और ऊपर से हर तारीख पर मुजफ्फरपुर आने-जाने का खर्च अलग। ऐसे में बार-बार कोर्ट पहुंचना उनके लिए आसान नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मामले का जल्द समाधान कराने की मांग की।
दो दिन के अनशन के बाद कोर्ट तक पहुंचा मामला मशरूम क्लस्टर मामले में न्याय की मांग को लेकर जीविका दीदियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में दो दिनों तक अनशन किया था। 12 अगस्त की देर रात एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव धरनास्थल पर पहुंचे और पानी पिलाकर महिलाओं का अनशन समाप्त कराया था। इसके बाद महिलाएं अपने घर लौट गई थीं। इसके बाद मामले को लेकर एसडीओ पूर्वी के न्यायालय में वाद दायर किया गया। न्यायालय ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया और 19 अगस्त को सुनवाई की तारीख तय की। डीपीएम ने कहा- ‘लिखित पक्ष न्यायालय में देंगे’ जीविका की डीपीएम अनीशा गांगुली ने कहा कि न्यायालय ने जीविका दीदियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर उनसे लिखित रूप में पक्ष रखने को कहा है। वह अगली सुनवाई में अपना लिखित पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगी। वहीं ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी के चीफ टेक्निकल ऑफिसर आशुतोष मंगलम से पक्ष जानने का प्रयास किया गया। फोन पर भी संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी। बैंक अधिकारियों ने भी मामले में टिप्पणी करने से इनकार किया। सुनवाई के संबंध में एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला अभी लंबी प्रक्रिया में है। उन्होंने बताया कि मामले में हर सप्ताह सुनवाई होगी।
3.32 करोड़ का लोन, 5.70 करोड़ तक पहुंचा बकाया मशरूम क्लस्टर के तहत मुशहरी और बोचहां की करीब 110 जीविका दीदियों के नाम पर वर्ष 2023 में करीब 3.32 करोड़ रुपए का लोन कराया गया था। महिलाओं का आरोप है कि लोन की राशि उनके खातों में आने के बाद एजेंसी ने विड्रॉल फॉर्म पर हस्ताक्षर कराकर राशि निकाल ली। महिलाओं का कहना है कि योजना के तहत जिस तरह रोजगार और मशरूम उत्पादन शुरू होना चाहिए था, वह नहीं हो सका। अब ब्याज समेत बकाया राशि करीब 5.70 करोड़ रुपए तक पहुंचने की बात कही जा रही है।
कर्ज बढ़ा, रोजगार नहीं मिला मुशहरी की करीब 50 और बोचहां की 60 जीविका दीदियों को करीब तीन-तीन लाख रुपए का लोन कराया गया था। महिलाओं के अनुसार, इस राशि से मशरूम उत्पादन के लिए उपकरण और क्लस्टर तैयार किए जाने थे। आरोप है कि राशि निकलने के बाद भी योजना अपेक्षित तरीके से जमीन पर शुरू नहीं हो सकी। अब कई महिलाओं के खातों में एक लाख से लेकर करीब 1.90 लाख रुपए तक ओवरड्यू दिख रहा है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें लोन चुकाने के नोटिस मिल रहे हैं, जबकि उनके पास न तो लोन की राशि है और न उससे तैयार हुआ रोजगार का साधन। जीविका दीदियों का कहना है कि कर्ज की किस्त और बकाया के कारण उनका सिविल स्कोर भी प्रभावित हुआ है। इससे उन्हें अन्य जरूरतों के लिए नया लोन लेने में परेशानी हो रही है। 11 संकुलों की महिलाएं प्रभावित मामले में संगम, सर्वोत्तम-1, सर्वोत्तम-2, मौसम, उत्तम, माला-1, माला-2, किरणमाला, फूलमाला, विशाल और दीपमाला समेत 11 संकुलों से जुड़ी महिलाओं के प्रभावित होने की बात सामने आई है। महिलाओं का आरोप है कि कुछ स्थानों पर क्लस्टर की अधूरी संरचनाएं तैयार की गईं, लेकिन मशरूम उत्पादन और रोजगार की पूरी व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी। मशरूम क्लस्टर के नाम पर लिए गए कर्ज और वित्तीय अनियमितता का मामले में बुधवार काे एसडीओ पूर्वी के न्यायालय सुनवाई हुई। इसमें छह जीविका दीदियों समेत मामले से जुड़े सभी पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा। जीविका दीदियों ने तीन पक्षों को जिम्मेदार ठहराया है। इनमें पहला एजेंसी, दूसरी जीविका डीपीएम और तीसरा बैंक के अधिकारी शामिल है। सुनवाई के दौरान जीविका की डीपीएम अनीशा गांगुली ने कहा कि उन्हें बैंक खाते और उसके स्टेटमेंट की जानकारी नहीं है। एसडीओ पूर्वी न्यायालय ने उन्हें संबंधित ग्रामीण बैंक से खाता संख्या और स्टेटमेंट प्राप्त कर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले में अब अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी। न्यायालय ने दोनों पक्षों से लिखित पक्ष मांगा है। साथ ही क्लस्टर से संबंधित एग्रीमेंट की प्रति भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। एक तरफ छह जीविका दीदियां, दूसरी ओर एजेंसी-डीपीएम और बैंक बुधवार की सुनवाई में एक पक्ष में छह जीविका दीदियों को रखा गया। दूसरे पक्ष में ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी, उसके निदेशक आशुतोष मंगलम, जीविका डीपीएम अनीशा गांगुली और उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक की बोचहां और मुशहरी शाखाओं के प्रबंधक शामिल हैं। सुनवाई में जीविका दीदियों की ओर से कर्ज की राशि, मशरूम क्लस्टर के संचालन और कथित तौर पर राशि के इस्तेमाल से जुड़े सवाल उठाए गए। वहीं दूसरे पक्ष ने भी अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को लेकर न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा। दीदियाें का आराेप, पहले कर्ज का बोझ, अब तारीख पर तारीख सुनवाई के बाद जीविका दीदियों में नाराजगी साफ दिखी। मुशहरी ब्लॉक की विशाल सीएलएफ से जुड़ी निभा सिंह ने कहा कि वे गरीब महिलाएं हैं। बार-बार कोर्ट आने में समय और पैसे दोनों खर्च होते हैं। उनके अनुसार, महिलाओं पर पहले से ही करीब पांच लाख रुपये तक के कर्ज का बोझ बताया जा रहा है। निभा सिंह ने कहा कि उन्हें न्यायालय से न्याय की उम्मीद है, लेकिन यदि सुनवाई लगातार आगे बढ़ती रही तो वे अपनी आवाज दिल्ली तक ले जाने से भी पीछे नहीं हटेंगी। जीविका दीदियों ने अपनी मौजूदा स्थिति के लिए तीन पक्षों को जिम्मेदार ठहराया है। उनके अनुसार इनमें ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी, जीविका की डीपीएम और संबंधित बैंक अधिकारी शामिल हैं। महिलाओं का आरोप है कि क्लस्टर के लिए लोन स्वीकृत और वितरित करने से पहले बैंक स्तर पर योजना, क्लस्टर और कार्य की स्थिति का समुचित सत्यापन होना चाहिए था। एजेंसी पर लोन की राशि निकलवानेका आरोप लगाया गया है। वहीं डीपीएम पर महिलाओं ने दबाव बनाने और शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। ये सभी आरोप जीविका दीदियों की ओर से लगाए गए हैं और इनकी वास्तविकता न्यायालय की सुनवाई व जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। सादे कागज पर कराए गए थे हस्ताक्षर निभा सिंह ने आरोप लगाया कि महिलाओं को बैंक में बुलाकर दस्तावेज समझाने के बजाय कई बार सादे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए जाते थे। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान महिलाओं पर दबाव भी बनाया जाता था। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की अंतिम स्थिति न्यायालय के समक्ष लिखित जवाब आने और मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगी। बोचहां की फूलमाला सीएलएफ से जुड़ी जीविका दीदी संगीता कुमारी ने कहा कि सुनवाई में बैंक मैनेजर, एजेंसी निदेशक, डीपीएम और जीविका दीदियों की बातें सुनी गईं। अब अगली तारीख मिल गई है। उन्होंने कहा कि वे गरीब महिलाएं हैं। पहले से कर्ज का बोझ है और ऊपर से हर तारीख पर मुजफ्फरपुर आने-जाने का खर्च अलग। ऐसे में बार-बार कोर्ट पहुंचना उनके लिए आसान नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मामले का जल्द समाधान कराने की मांग की।
दो दिन के अनशन के बाद कोर्ट तक पहुंचा मामला मशरूम क्लस्टर मामले में न्याय की मांग को लेकर जीविका दीदियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में दो दिनों तक अनशन किया था। 12 अगस्त की देर रात एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव धरनास्थल पर पहुंचे और पानी पिलाकर महिलाओं का अनशन समाप्त कराया था। इसके बाद महिलाएं अपने घर लौट गई थीं। इसके बाद मामले को लेकर एसडीओ पूर्वी के न्यायालय में वाद दायर किया गया। न्यायालय ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया और 19 अगस्त को सुनवाई की तारीख तय की। डीपीएम ने कहा- ‘लिखित पक्ष न्यायालय में देंगे’ जीविका की डीपीएम अनीशा गांगुली ने कहा कि न्यायालय ने जीविका दीदियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर उनसे लिखित रूप में पक्ष रखने को कहा है। वह अगली सुनवाई में अपना लिखित पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगी। वहीं ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी के चीफ टेक्निकल ऑफिसर आशुतोष मंगलम से पक्ष जानने का प्रयास किया गया। फोन पर भी संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी। बैंक अधिकारियों ने भी मामले में टिप्पणी करने से इनकार किया। सुनवाई के संबंध में एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला अभी लंबी प्रक्रिया में है। उन्होंने बताया कि मामले में हर सप्ताह सुनवाई होगी।
3.32 करोड़ का लोन, 5.70 करोड़ तक पहुंचा बकाया मशरूम क्लस्टर के तहत मुशहरी और बोचहां की करीब 110 जीविका दीदियों के नाम पर वर्ष 2023 में करीब 3.32 करोड़ रुपए का लोन कराया गया था। महिलाओं का आरोप है कि लोन की राशि उनके खातों में आने के बाद एजेंसी ने विड्रॉल फॉर्म पर हस्ताक्षर कराकर राशि निकाल ली। महिलाओं का कहना है कि योजना के तहत जिस तरह रोजगार और मशरूम उत्पादन शुरू होना चाहिए था, वह नहीं हो सका। अब ब्याज समेत बकाया राशि करीब 5.70 करोड़ रुपए तक पहुंचने की बात कही जा रही है।
कर्ज बढ़ा, रोजगार नहीं मिला मुशहरी की करीब 50 और बोचहां की 60 जीविका दीदियों को करीब तीन-तीन लाख रुपए का लोन कराया गया था। महिलाओं के अनुसार, इस राशि से मशरूम उत्पादन के लिए उपकरण और क्लस्टर तैयार किए जाने थे। आरोप है कि राशि निकलने के बाद भी योजना अपेक्षित तरीके से जमीन पर शुरू नहीं हो सकी। अब कई महिलाओं के खातों में एक लाख से लेकर करीब 1.90 लाख रुपए तक ओवरड्यू दिख रहा है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें लोन चुकाने के नोटिस मिल रहे हैं, जबकि उनके पास न तो लोन की राशि है और न उससे तैयार हुआ रोजगार का साधन। जीविका दीदियों का कहना है कि कर्ज की किस्त और बकाया के कारण उनका सिविल स्कोर भी प्रभावित हुआ है। इससे उन्हें अन्य जरूरतों के लिए नया लोन लेने में परेशानी हो रही है। 11 संकुलों की महिलाएं प्रभावित मामले में संगम, सर्वोत्तम-1, सर्वोत्तम-2, मौसम, उत्तम, माला-1, माला-2, किरणमाला, फूलमाला, विशाल और दीपमाला समेत 11 संकुलों से जुड़ी महिलाओं के प्रभावित होने की बात सामने आई है। महिलाओं का आरोप है कि कुछ स्थानों पर क्लस्टर की अधूरी संरचनाएं तैयार की गईं, लेकिन मशरूम उत्पादन और रोजगार की पूरी व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी।  

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