बक्सर में स्नेक बाइट से 45 वर्षीय मजदूर की मौत:सोते समय करैत ने काटा, पहले अस्पताल ले गए फिर झाड़-फूंक में देरी से गई जान

बक्सर में स्नेक बाइट से 45 वर्षीय मजदूर की मौत:सोते समय करैत ने काटा, पहले अस्पताल ले गए फिर झाड़-फूंक में देरी से गई जान

बक्सर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मोहनपुरवा गांव में बुधवार को सांप काटने से 45 वर्षीय मजदूर कृष्णा राजभर की मौत हो गई। परिजनों ने समय पर अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक का सहारा लिया, जिसके कारण अस्पताल पहुंचने में देरी हुई। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कृष्णा मोहनपुरवा निवासी विश्वनाथ राजभर के पुत्र थे। जानकारी के अनुसार, कृष्णा राजभर बुधवार रात मजदूरी कर घर लौटे थे। खाना खाने के बाद वे सोने चले गए। आधी रात के आसपास उन्हें गर्दन के पास कुछ काटने का एहसास हुआ। बिस्तर पर दिखाई दिया करैत सांप उन्होंने उठकर कमरे की बत्ती जलाई तो बिस्तर पर एक करैत सांप दिखाई दिया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी की, लेकिन बाद में झाड़-फूंक कराने का फैसला किया। परिजन कृष्णा को उत्तर प्रदेश के गहमर स्थित ‘बकस बाबा’ के पास ले गए। वहां से लौटने के बाद उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। स्थिति गंभीर होने पर परिजन उन्हें बक्सर सदर अस्पताल ले गए। चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन कृष्णा को प्रताप सागर अस्पताल ले गए, जहां जांच के बाद चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल के बाद झाड़-फूंक के लिए पहुंचे मृत घोषित किए जाने के बाद भी परिजन एक बार फिर झाड़-फूंक के लिए उन्हें कुछ अन्य स्थानों पर ले गए। बुधवार शाम जब परिजन कृष्णा का शव लेकर मोहनपुरवा स्थित अपने घर पहुंचे, तो वहां आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, कृष्णा मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में लगभग 12 और 8 वर्ष की दो बेटियां हैं। उनकी असामयिक मृत्यु से परिवार में गहरा शोक है। घटना की सूचना मिलने पर मुफस्सिल थाना की पुलिस गांव पहुंची। पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और मृतक ही मजदूरी कर परिवार की जिम्मेदारी संभालता था।
बरसात में बढ़ जाता है सांपों का खतरा बक्सर के प्रसिद्ध सांप पकड़ने वाले हरिओम चौबे ने बताया कि बरसात के मौसम में सांपों के निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ग्रामीण इलाकों में करैत और कोबरा जैसे जहरीले सांपों का खतरा अधिक रहता है। उन्होंने कहा कि सांप के काटने के बाद झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने के बजाय पीड़ित को बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाना चाहिए। अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी और जरूरत पड़ने पर सांप के जहर के इलाज के लिए उपलब्ध दवा दी जाती है। करैत के काटने से तेज दर्द-सूजन हरिओम चौबे ने बताया कि करैत बेहद जहरीला सांप है। यह मुख्य रूप से रात में सक्रिय रहता है और कई बार लोगों के घरों में घुसकर बिस्तर तक पहुंच जाता है। करैत के काटने की खास बात यह है कि इसके काटने पर हमेशा तेज दर्द या अधिक सूजन नहीं होती। ऐसे में पीड़ित और परिजन कई बार इसे गंभीरता से नहीं लेते और इलाज में देरी हो जाती है। उन्होंने बताया कि करैत का विष तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। जहर का असर बढ़ने पर शरीर में कमजोरी, मांसपेशियों पर नियंत्रण कम होना, निगलने या बोलने में परेशानी और सांस लेने में दिक्कत जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए सांप काटने के बाद लक्षणों का इंतजार करना भी खतरनाक हो सकता है।
चार सांपों को माना जाता है बेहद खतरनाक हरिओम चौबे के अनुसार भारत में सांपों की करीब 300 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें कई विषैले सांप शामिल हैं। सांप के काटने से होने वाली गंभीर घटनाओं में चार प्रमुख प्रजातियों का नाम अक्सर सामने आता है, जिन्हें आम तौर पर ‘बिग फोर’ के नाम से जाना जाता है। इनमें करैत, कोबरा, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं। घर से बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करें उन्होंने लोगों से अपील की कि रात में घर से बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करें और जमीन पर सोने से बचें। बिस्तर, कपड़े और जूते इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह जांच लें। यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो उसे शांत रखते हुए तुरंत अस्पताल ले जाएं। सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि सांप के काटने के बाद झाड़-फूंक में लगाया गया हर मिनट मरीज के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। समय पर अस्पताल पहुंचना ही जान बचाने का सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। बक्सर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मोहनपुरवा गांव में बुधवार को सांप काटने से 45 वर्षीय मजदूर कृष्णा राजभर की मौत हो गई। परिजनों ने समय पर अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक का सहारा लिया, जिसके कारण अस्पताल पहुंचने में देरी हुई। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कृष्णा मोहनपुरवा निवासी विश्वनाथ राजभर के पुत्र थे। जानकारी के अनुसार, कृष्णा राजभर बुधवार रात मजदूरी कर घर लौटे थे। खाना खाने के बाद वे सोने चले गए। आधी रात के आसपास उन्हें गर्दन के पास कुछ काटने का एहसास हुआ। बिस्तर पर दिखाई दिया करैत सांप उन्होंने उठकर कमरे की बत्ती जलाई तो बिस्तर पर एक करैत सांप दिखाई दिया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी की, लेकिन बाद में झाड़-फूंक कराने का फैसला किया। परिजन कृष्णा को उत्तर प्रदेश के गहमर स्थित ‘बकस बाबा’ के पास ले गए। वहां से लौटने के बाद उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। स्थिति गंभीर होने पर परिजन उन्हें बक्सर सदर अस्पताल ले गए। चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन कृष्णा को प्रताप सागर अस्पताल ले गए, जहां जांच के बाद चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल के बाद झाड़-फूंक के लिए पहुंचे मृत घोषित किए जाने के बाद भी परिजन एक बार फिर झाड़-फूंक के लिए उन्हें कुछ अन्य स्थानों पर ले गए। बुधवार शाम जब परिजन कृष्णा का शव लेकर मोहनपुरवा स्थित अपने घर पहुंचे, तो वहां आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, कृष्णा मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में लगभग 12 और 8 वर्ष की दो बेटियां हैं। उनकी असामयिक मृत्यु से परिवार में गहरा शोक है। घटना की सूचना मिलने पर मुफस्सिल थाना की पुलिस गांव पहुंची। पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और मृतक ही मजदूरी कर परिवार की जिम्मेदारी संभालता था।
बरसात में बढ़ जाता है सांपों का खतरा बक्सर के प्रसिद्ध सांप पकड़ने वाले हरिओम चौबे ने बताया कि बरसात के मौसम में सांपों के निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ग्रामीण इलाकों में करैत और कोबरा जैसे जहरीले सांपों का खतरा अधिक रहता है। उन्होंने कहा कि सांप के काटने के बाद झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने के बजाय पीड़ित को बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाना चाहिए। अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी और जरूरत पड़ने पर सांप के जहर के इलाज के लिए उपलब्ध दवा दी जाती है। करैत के काटने से तेज दर्द-सूजन हरिओम चौबे ने बताया कि करैत बेहद जहरीला सांप है। यह मुख्य रूप से रात में सक्रिय रहता है और कई बार लोगों के घरों में घुसकर बिस्तर तक पहुंच जाता है। करैत के काटने की खास बात यह है कि इसके काटने पर हमेशा तेज दर्द या अधिक सूजन नहीं होती। ऐसे में पीड़ित और परिजन कई बार इसे गंभीरता से नहीं लेते और इलाज में देरी हो जाती है। उन्होंने बताया कि करैत का विष तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। जहर का असर बढ़ने पर शरीर में कमजोरी, मांसपेशियों पर नियंत्रण कम होना, निगलने या बोलने में परेशानी और सांस लेने में दिक्कत जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए सांप काटने के बाद लक्षणों का इंतजार करना भी खतरनाक हो सकता है।
चार सांपों को माना जाता है बेहद खतरनाक हरिओम चौबे के अनुसार भारत में सांपों की करीब 300 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें कई विषैले सांप शामिल हैं। सांप के काटने से होने वाली गंभीर घटनाओं में चार प्रमुख प्रजातियों का नाम अक्सर सामने आता है, जिन्हें आम तौर पर ‘बिग फोर’ के नाम से जाना जाता है। इनमें करैत, कोबरा, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं। घर से बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करें उन्होंने लोगों से अपील की कि रात में घर से बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करें और जमीन पर सोने से बचें। बिस्तर, कपड़े और जूते इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह जांच लें। यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो उसे शांत रखते हुए तुरंत अस्पताल ले जाएं। सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि सांप के काटने के बाद झाड़-फूंक में लगाया गया हर मिनट मरीज के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। समय पर अस्पताल पहुंचना ही जान बचाने का सबसे महत्वपूर्ण उपाय है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *