केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि गलत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने वाले सलाहकार राजमार्गों पर दुर्घटनाओं तथा उससे होने वाली मौत के लिए ‘‘दोषी’’ हैं। उन्होंने ठेकेदारों को निर्माण गुणवत्ता से समझौता करने पर ‘ब्लैकलिस्ट’ करने समेत अन्य कार्रवाई की चेतावनी दी। मंत्री की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब खबरें हैं कि उनका मंत्रालय दो से 2.5 लाख करोड़ रुपये मूल्य की सुरंग परियोजनाओं के लिए निविदाएं तैयार कर रहा है।
राष्ट्रीय राजधानी में उद्योग मंडल फिक्की के ‘टनल्स एंड ब्रिजेस कॉन्फ्रेंस 2026’ के चौथे संस्करण को संबोधित करते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने गलत डीपीआर तैयार करने वालों को दुर्घटनाओं के लिए ‘‘दोषी’’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सलाहकार गूगल की मदद से ये दस्तावेज तैयार करते हैं, जिससे जान-माल का नुकसान हो रहा है। गडकरी ने कहा, ‘‘डीपीआर की गुणवत्ता इतनी गलत है कि आज सड़कों पर पांच लाख दुर्घटनाएं होती हैं और 1.8 लाख लोगों की मौत होती है तथा इन सभी मामलों में गलत डीपीआर की समस्या है।’’
मंत्री ने ठेकेदारों को बुनियादी ढांचा परियोजना हासिल करने के बाद निर्माण गुणवत्ता से समझौता करने के खिलाफ भी आगाह किया।
उन्होंने कहा कि वित्तीय ऑडिट के अलावा प्रदर्शन का भी ऑडिट होगा और उसके नतीजों के आधार पर ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी तथा उन्हें ‘ब्लैकलिस्ट’ किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन सब कारणों से आर्थिक नुकसान होता है और सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की जान जा रही है। गडकरी ने कहा कि ठेकेदारों और डीपीआर सलाहकारों को रेटिंग दी जाएगी और इसके आधार पर तय किया जाएगा कि उन्हें भविष्य की बोलियों में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाए या नहीं।
फिक्की के अनुसार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय दो लाख करोड़ से 2.5 लाख करोड़ मूल्य की सुरंग परियोजनाओं के लिए निविदाएं तैयार कर रहा है। फिक्की की सड़क एवं राजमार्ग समिति के चेयरमैन एस. परमशिवन ने मंत्री के समक्ष उद्योग से जुड़ी चार प्रमुख चिंताएं रखीं। एफकॉन इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रबंध निदेशक की भी जिम्मेदारी संभालने वाले परमशिवन ने कहा कि सबसे कम बोली (एल1) के आधार पर ठेके देने की अधिकता के कारण निविदाएं अनुमानित लागत से 20 प्रतिशत या उससे अधिक कम दर पर जा रही हैं।
इससे परियोजनाओं की व्यावसायिक व्यवहार्यता और निर्माण गुणवत्ता पर दबाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में गुणवत्ता-सह-लागत आधारित चयन के प्रावधान पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनका बहुत कम इस्तेमाल होता है। उन्होंने जटिल परियोजनाओं और 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं में इसे प्राथमिक तरीका बनाने का आग्रह किया।

