तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बुधवार को मुख्यमंत्री व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत सालाना कवरेज को पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की घोषणा की। राज्य की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए कई अहम नयी पहलों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि चिकित्सा सुविधा एक बुनियादी अधिकार है, कोई विशेषाधिकार नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद हर व्यक्ति को उसकी आय या स्थान की परवाह किए बिना गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है।
उन्होंने विधानसभा में नियम 110 के तहत घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार की मुख्यमंत्री व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना (सीएमसीएचआईएस) के तहत वार्षिक स्वास्थ्य बीमा कवरेज को मौजूदा पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि उत्तर चेन्नई के पेरम्बूर में 300 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला 400 बिस्तरों का मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल बनाया जाएगा। राज्य की स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को विशेष चिकित्सा और सर्जरी सेवाओं के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।
यह सुविधा चेन्नई, तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन और कन्याकुमारी सहित सात सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में उपलब्ध कराई जाएगी। विजय ने कहा कि चिकित्सा कर्मियों की कमी को दूर करने के लिए 351 करोड़ रुपये का निवेश कर नर्सिंग और फार्मेसी पाठ्यक्रमों में अतिरिक्त सीटें बढ़ाई जाएंगी। इसके तहत सात नए नर्सिंग कॉलेज शुरू किए जाएंगे और मौजूदा संस्थानों में भी सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
मुख्यमंत्री कैंसर देखभाल मिशन को 677.44 करोड़ रुपये के बजट के साथ उन्नत किया जाएगा। इसके अलावा, चेन्नई के राजीव गांधी सरकारी जनरल अस्पताल में 471.80 करोड़ रुपये की लागत से चार मंजिल वाला एक नया एकीकृत कैंसर उपचार केंद्र स्थापित किया जाएगा। साथ ही, तंजावुर, कोयंबटूर और मदुरै सहित विभिन्न जिलों में पांच क्षेत्रीय कैंसर केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
विजय ने कहा कि अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी प्रणाली और ‘लीनियर एक्सेलरेटर’ (रेडियोथेरेपी मशीन) सहित अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा, कुछ जिलों में महिलाओं के लिए एचपीवी डीएनए जांच की सुविधा शुरू की जाएगी, ताकि गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का कारण बनने वाले ‘हाई-रिस्क ह्यूमन पैपिलोमावायरस’ (एचपीवी) संक्रमण की शुरुआती पहचान की जा सके। इसके साथ ही मरीजों को पोषण संबंधी सहायता भी प्रदान की जाएगी।

