पूर्व माले विधायक और JDU विधायक में क्रेडिट विवाद:डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को लेकर पूर्व माले MLA बोले- श्रेय लेना नाखून कटवाकर शहीद होने जैसा

पूर्व माले विधायक और JDU विधायक में क्रेडिट विवाद:डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को लेकर पूर्व माले MLA बोले- श्रेय लेना नाखून कटवाकर शहीद होने जैसा

बक्सर जिले के डुमरांव में विकास योजनाओं का श्रेय लेने को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। वर्तमान जदयू विधायक राहुल सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर झील वाली सड़क, आरओबी और बाईपास सहित कई परियोजनाओं को अपने प्रयासों की उपलब्धि बताया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सवाल और राजनीतिक टिप्पणियों का दौर शुरू हो गया है। इस मामले को लेकर डुमरांव के पूर्व माले विधायक अजीत कुमार सिंह ने वर्तमान विधायक राहुल सिंह पर निशाना साधा है। पूर्व विधायक ने छह मिनट का वीडियो जारी किया उन्होंने विशेष रूप से डुमरांव रेल फाटक के पास बन रहे आरओबी का श्रेय लेने पर तंज कसा। अजीत कुमार सिंह ने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर वर्षों से आंदोलन होते रहे, जनता की मांग उठती रही और राजनीतिक स्तर पर प्रयास किए जाते रहे, अब उन्हीं कार्यों का श्रेय लेने की होड़ मची है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि विधायक बनने और शपथ लेने से पहले ही जिन कार्यों की प्रक्रिया और प्रयास शुरू हो चुके थे, उनका श्रेय लेना ‘नाखून कटवाकर शहीद’ होने जैसा है। अपने दावे के समर्थन में, पूर्व विधायक अजीत कुमार सिंह ने लगभग छह मिनट का एक वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने पुराने अखबारी कतरनों, विधानसभा में उठाए गए सवालों और पुराने वीडियो को प्रस्तुत किया। उनका तर्क है कि डुमरांव रेल फाटक पर आरओबी निर्माण सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर लंबे समय से संघर्ष किया जाता रहा है। ऐसे में इन योजनाओं का श्रेय वर्तमान में किसी एक व्यक्ति को देना उचित नहीं है। समस्या आज भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी पूर्व विधायक के इस वीडियो के बाद डुमरांव की राजनीति में विकास योजनाओं के श्रेय को लेकर बहस और तेज हो गई है। हालांकि, इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग, आम लोगों की नजर अब इन योजनाओं के वास्तविक धरातल पर उतरने पर टिकी है। गौरतलब है कि डुमरांव में बारिश के दौरान जलजमाव, खराब सड़कों और कीचड़ की समस्या आज भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। कई इलाकों में जलनिकासी की व्यवस्था को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जनता के बीच यह सवाल महत्वपूर्ण है कि योजनाओं का श्रेय किसे मिलेगा, इससे ज्यादा जरूरी यह है कि योजनाएं समय पर पूरी होकर लोगों को राहत कब देंगी। डुमरांव अपनी ऐतिहासिक और क्रांतिकारी विरासत के लिए जाना जाता है, लेकिन विकास कार्यों के श्रेय को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान ने नई बहस जरूर छेड़ दी है। अब देखना होगा कि यह श्रेय की राजनीति आगे क्या रूप लेती है और धरातल पर विकास की तस्वीर कब बदलती है। बक्सर जिले के डुमरांव में विकास योजनाओं का श्रेय लेने को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। वर्तमान जदयू विधायक राहुल सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर झील वाली सड़क, आरओबी और बाईपास सहित कई परियोजनाओं को अपने प्रयासों की उपलब्धि बताया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सवाल और राजनीतिक टिप्पणियों का दौर शुरू हो गया है। इस मामले को लेकर डुमरांव के पूर्व माले विधायक अजीत कुमार सिंह ने वर्तमान विधायक राहुल सिंह पर निशाना साधा है। पूर्व विधायक ने छह मिनट का वीडियो जारी किया उन्होंने विशेष रूप से डुमरांव रेल फाटक के पास बन रहे आरओबी का श्रेय लेने पर तंज कसा। अजीत कुमार सिंह ने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर वर्षों से आंदोलन होते रहे, जनता की मांग उठती रही और राजनीतिक स्तर पर प्रयास किए जाते रहे, अब उन्हीं कार्यों का श्रेय लेने की होड़ मची है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि विधायक बनने और शपथ लेने से पहले ही जिन कार्यों की प्रक्रिया और प्रयास शुरू हो चुके थे, उनका श्रेय लेना ‘नाखून कटवाकर शहीद’ होने जैसा है। अपने दावे के समर्थन में, पूर्व विधायक अजीत कुमार सिंह ने लगभग छह मिनट का एक वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने पुराने अखबारी कतरनों, विधानसभा में उठाए गए सवालों और पुराने वीडियो को प्रस्तुत किया। उनका तर्क है कि डुमरांव रेल फाटक पर आरओबी निर्माण सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर लंबे समय से संघर्ष किया जाता रहा है। ऐसे में इन योजनाओं का श्रेय वर्तमान में किसी एक व्यक्ति को देना उचित नहीं है। समस्या आज भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी पूर्व विधायक के इस वीडियो के बाद डुमरांव की राजनीति में विकास योजनाओं के श्रेय को लेकर बहस और तेज हो गई है। हालांकि, इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग, आम लोगों की नजर अब इन योजनाओं के वास्तविक धरातल पर उतरने पर टिकी है। गौरतलब है कि डुमरांव में बारिश के दौरान जलजमाव, खराब सड़कों और कीचड़ की समस्या आज भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। कई इलाकों में जलनिकासी की व्यवस्था को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जनता के बीच यह सवाल महत्वपूर्ण है कि योजनाओं का श्रेय किसे मिलेगा, इससे ज्यादा जरूरी यह है कि योजनाएं समय पर पूरी होकर लोगों को राहत कब देंगी। डुमरांव अपनी ऐतिहासिक और क्रांतिकारी विरासत के लिए जाना जाता है, लेकिन विकास कार्यों के श्रेय को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान ने नई बहस जरूर छेड़ दी है। अब देखना होगा कि यह श्रेय की राजनीति आगे क्या रूप लेती है और धरातल पर विकास की तस्वीर कब बदलती है।  

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