‘अपराधियों से ज्यादा पुलिस का डर महसूस करते हैं लोग’:दरभंगा के मोनू आत्महत्या केस पर मंत्री का बयान, कहा- पुलिसकर्मी वसूली भी करते हैं

‘अपराधियों से ज्यादा पुलिस का डर महसूस करते हैं लोग’:दरभंगा के मोनू आत्महत्या केस पर मंत्री का बयान, कहा- पुलिसकर्मी वसूली भी करते हैं

बिहार सरकार के मंत्री और बहादुरपुर के विधायक मदन सहनी ने बुधवार को दरभंगा में कहा कि बिहार में कई जगहों पर लोगों को अपराधियों से ज्यादा पुलिस से भय महसूस होता है। मंत्री ने पुलिस अधिकारियों, दरोगा और पुलिसकर्मियों पर आम लोगों से अवैध वसूली का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ और ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लगी तो जनप्रतिनिधियों को भी इस संबंध में गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। दरअसल, मंत्री मदन सहनी दरभंगा के बहादुरपुर थाना क्षेत्र के खराजपुर गांव के मोनू सहनी की आत्महत्या केस को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे थे। मदन सहनी ने मोनू आत्महत्या मामले की जांच दरभंगा एसएसपी से व्यक्तिगत रूप से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में दोषी पाए जाने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। मंत्री ने दरभंगा पुलिस की कार्यशैली के साथ भारत तिवारी एनकाउंटर मामले में आरोपी डीएसपी की पोस्टिंग को लेकर भी सवाल उठाए। मोबाइल लोकेशन से मोनू सहनी के घर पहुंची थी पुलिस टीम दरअसल, बहादुरपुर थाना क्षेत्र के खराजपुर पंचायत के वार्ड-9 में सोमवार को 22 साल के मोनू सहनी ने घर में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। मोनू, जागेश्वर सहनी का बेटा था। परिजन का आरोप है कि मोबाइल फोन को लेकर पुलिस की कार्रवाई और दबाव के कारण मोनू मानसिक रूप से परेशान था। मृतक के पिता जागेश्वर सहनी ने बताया कि उनके बेटे ने करीब 2 हजार रुपए में एक मोबाइल खरीदा था। मोबाइल का लोकेशन ट्रैक करते हुए पुलिस टीम उसके घर पहुंची थी। मोनू ने मोबाइल पुलिस को दे दिया था। इसके बाद उससे अन्य मोबाइल को लेकर पूछताछ की गई। परिजन का आरोप है कि पुलिस की ओर से मोनू पर दूसरे मामले में फंसाने का दबाव बनाया गया और रुपए की मांग की गई। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों से अलग घटनाक्रम बताते हुए कहा कि टेक्निकल सेल की टीम मोबाइल के लोकेशन के आधार पर वहां पहुंची थी और एक मोबाइल बरामद किया गया था। पुलिस टीम पर हमला हुआ था, सर्विस पिस्टल छीनी थी पुलिस के अनुसार, मोनू की आत्महत्या की सूचना मिलने के बाद परिजनों ने टेक्निकल सेल की टीम को फोन कर अन्य मोबाइल मिलने की जानकारी दी थी। मोबाइल लेने के लिए एएसआई इंद्रदेव कुमार और सिपाही कुंदन कुमार खराजपुर पहुंचे थे। सदर एसडीपीओ शुभेंद्र कुमार सुमन के अनुसार, वहां स्थानीय लोगों और परिजनों ने दोनों पुलिसकर्मियों को घेर लिया और उनके साथ मारपीट की। आरोप है कि भीड़ ने पुलिसकर्मियों की सर्विस पिस्टल भी छीन ली थी। घटना की सूचना मिलने पर बहादुरपुर, लहेरियासराय, बेंता, एपीएम समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को भीड़ से बाहर निकाला गया। दोनों घायल पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए डीएमसीएच में भर्ती कराया गया। पुलिस ने उनकी बाइक और छीनी गई सर्विस पिस्टल बरामद कर ली थी। । पुलिस पर फायरिंग के भी आरोप, सीसीटीवी फुटेज का दावा घटना के बाद स्थानीय लोगों की ओर से सादे लिबास में दोबारा पहुंचे पुलिसकर्मियों पर पिस्टल निकालकर फायरिंग करने का भी आरोप लगाया गया। फायरिंग से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, घटनास्थल पर पहुंचे एसडीपीओ ने पुलिस की ओर से फायरिंग किए जाने के आरोप से इनकार किया था। जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक वजह
मोनू की मौत के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए डीएमसीएच भेज दिया। पुलिस का कहना है कि युवक ने किन परिस्थितियों में आत्महत्या की और पुलिस की कार्रवाई तथा उसकी मौत के बीच कोई संबंध था या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि मोनू ने किन परिस्थितियों में आत्महत्या की और पुलिस पर लगाए गए अवैध वसूली, दबाव और भयादोहन के आरोपों में कितनी सच्चाई है। वहीं, पुलिसकर्मियों पर हमला और सरकारी हथियार छीने जाने के मामले में भी पुलिस कार्रवाई की तैयारी कर रही है। बिहार सरकार के मंत्री और बहादुरपुर के विधायक मदन सहनी ने बुधवार को दरभंगा में कहा कि बिहार में कई जगहों पर लोगों को अपराधियों से ज्यादा पुलिस से भय महसूस होता है। मंत्री ने पुलिस अधिकारियों, दरोगा और पुलिसकर्मियों पर आम लोगों से अवैध वसूली का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ और ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लगी तो जनप्रतिनिधियों को भी इस संबंध में गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। दरअसल, मंत्री मदन सहनी दरभंगा के बहादुरपुर थाना क्षेत्र के खराजपुर गांव के मोनू सहनी की आत्महत्या केस को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे थे। मदन सहनी ने मोनू आत्महत्या मामले की जांच दरभंगा एसएसपी से व्यक्तिगत रूप से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में दोषी पाए जाने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। मंत्री ने दरभंगा पुलिस की कार्यशैली के साथ भारत तिवारी एनकाउंटर मामले में आरोपी डीएसपी की पोस्टिंग को लेकर भी सवाल उठाए। मोबाइल लोकेशन से मोनू सहनी के घर पहुंची थी पुलिस टीम दरअसल, बहादुरपुर थाना क्षेत्र के खराजपुर पंचायत के वार्ड-9 में सोमवार को 22 साल के मोनू सहनी ने घर में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। मोनू, जागेश्वर सहनी का बेटा था। परिजन का आरोप है कि मोबाइल फोन को लेकर पुलिस की कार्रवाई और दबाव के कारण मोनू मानसिक रूप से परेशान था। मृतक के पिता जागेश्वर सहनी ने बताया कि उनके बेटे ने करीब 2 हजार रुपए में एक मोबाइल खरीदा था। मोबाइल का लोकेशन ट्रैक करते हुए पुलिस टीम उसके घर पहुंची थी। मोनू ने मोबाइल पुलिस को दे दिया था। इसके बाद उससे अन्य मोबाइल को लेकर पूछताछ की गई। परिजन का आरोप है कि पुलिस की ओर से मोनू पर दूसरे मामले में फंसाने का दबाव बनाया गया और रुपए की मांग की गई। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों से अलग घटनाक्रम बताते हुए कहा कि टेक्निकल सेल की टीम मोबाइल के लोकेशन के आधार पर वहां पहुंची थी और एक मोबाइल बरामद किया गया था। पुलिस टीम पर हमला हुआ था, सर्विस पिस्टल छीनी थी पुलिस के अनुसार, मोनू की आत्महत्या की सूचना मिलने के बाद परिजनों ने टेक्निकल सेल की टीम को फोन कर अन्य मोबाइल मिलने की जानकारी दी थी। मोबाइल लेने के लिए एएसआई इंद्रदेव कुमार और सिपाही कुंदन कुमार खराजपुर पहुंचे थे। सदर एसडीपीओ शुभेंद्र कुमार सुमन के अनुसार, वहां स्थानीय लोगों और परिजनों ने दोनों पुलिसकर्मियों को घेर लिया और उनके साथ मारपीट की। आरोप है कि भीड़ ने पुलिसकर्मियों की सर्विस पिस्टल भी छीन ली थी। घटना की सूचना मिलने पर बहादुरपुर, लहेरियासराय, बेंता, एपीएम समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को भीड़ से बाहर निकाला गया। दोनों घायल पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए डीएमसीएच में भर्ती कराया गया। पुलिस ने उनकी बाइक और छीनी गई सर्विस पिस्टल बरामद कर ली थी। । पुलिस पर फायरिंग के भी आरोप, सीसीटीवी फुटेज का दावा घटना के बाद स्थानीय लोगों की ओर से सादे लिबास में दोबारा पहुंचे पुलिसकर्मियों पर पिस्टल निकालकर फायरिंग करने का भी आरोप लगाया गया। फायरिंग से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, घटनास्थल पर पहुंचे एसडीपीओ ने पुलिस की ओर से फायरिंग किए जाने के आरोप से इनकार किया था। जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक वजह
मोनू की मौत के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए डीएमसीएच भेज दिया। पुलिस का कहना है कि युवक ने किन परिस्थितियों में आत्महत्या की और पुलिस की कार्रवाई तथा उसकी मौत के बीच कोई संबंध था या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि मोनू ने किन परिस्थितियों में आत्महत्या की और पुलिस पर लगाए गए अवैध वसूली, दबाव और भयादोहन के आरोपों में कितनी सच्चाई है। वहीं, पुलिसकर्मियों पर हमला और सरकारी हथियार छीने जाने के मामले में भी पुलिस कार्रवाई की तैयारी कर रही है।  

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